पत्रकारिता की आबरू बचाएंगे ‘विक्रम और सुल्तान’

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नवेद शिकोह

देश के बहुत सारे कलमकार, पत्रकार, टीवी एंकर, इतिहासकार.. भारतीय समाज के सौहार्द को चुनौती देने की सुपारी खा चुके हैं। मिशन पत्रकारिता इतिहास बन गया, वर्तमान दौर की एजेंडा पत्रकारिता में क़लम ज़हर उगलने लगे हैं। पत्रकार हिन्दू-मुसलमान और भाजपाई या भाजपा विरोधी दायरों में महदूद होते जा रहे हैं।

कुछ मीडिया संस्थान की फंडिंग ही इस शर्त पर होती है कि उनकी टीम नफरत फैलने का लक्ष्य पूरा करें। तमाम प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकार अपनी पत्रकारिता को कलंकित करने पर मजबूर हैं। जीवन भर निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पक्षपात और एकतरफा रिपोर्टिंग के लिए बदनाम हो रहे हैं। कारण ये है कि बड़े-बड़े लिखाड़ पत्रकार जो ख़ाली हैं इन्हें रोजगार या कोई लाभ दिलाने का प्रलोभन देकर सोशल मीडिया पर आग लगाने वाली पोस्ट लिखवाई जा रही हैं। जो सहाफी जीवन भर पत्रकारिता के सिद्धांतों, मूल्यों वाली सामाजिक सरोकारों से जुड़ी संतुलित-निष्पक्ष पत्रकारिता करते रहे वे सियासी एजेंडों को चलाने पर मजबूर है। वजह ये है कि ये पत्रकारिता का फर्ज निभाकर अपने ज़मीर का सौदा नहीं करेंगे तो बेरोजगार हो जायेंगे..भूखा रहने की नौबत आ सकती है।

देश की हिन्दी पत्रकारिता को आकर्षक भाषा, खूबसूरत शैली, गंगा जमुनी तहजीब की नेमतें देने वाली लखनऊ की पत्रकारिता मौजूदा हालात से फिक्रमंद है। स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी, अखिलेश मिश्रा और इशरत अली सिद्दीकी जैसे दर्जनों सितारे जिस लखनऊ की सहाफत के आसमान पर चमके उस शहर-ए-लखनऊ के चंद सहाफी-लेखक भी लखनऊ की तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के सुपारी किलर बन रहे हैं।

ये सब अब नाकाबिले बर्दाश्त हो गया है। शहर की क़ाबिले तारीफ पत्रकारिता को कई दशकों तक अपने जीवन का बहुमूल्य योगदान देने वाले वरिष्ठ लेखक/पत्रकार कलम का शुद्धिकरण करने का प्रयास करेंगे। सामाजिक समरसता, सौहार्द और तोड़ने के बजाय जोड़ने की जिम्मेदारी निभाने जैसा जर्नलिज्म पटरी पर लायेंगे।बीते दिनों की सहाफत के दिन लौटाने की कोशिश होगी। देश की अखंडता, समरसता और साम्प्रदायिक सौहार्द कायम करने के लिए.. देशहित, समाजहित और सकारात्मक नजरिये को बढ़ावा देने के लिए स्वतंत्र पत्रकारों का एक पैनल तैयार करेंगे। सियासी दलों अथवा संकीर्ण मानसिकता वाली ताकते के लिए काम कर रही बिकाऊ कलम/पत्रकारिता पर निगराने रखेंगे। ऐसे लोगों से आग्रह करेंगे कि अपने कलम का उपयोग सौहार्द, सामाजिक सरोकारों, देशहित, समाजहित, सरकार की जनकल्याणकारी/जनहित की योजनाओं के लिए करें।

नहीं माने तो नफरत फैलाने वाले बिकाऊ और गैर जिम्मेदार कलमकारों के खिलाफ कदम उठाने के लिए सरकार, प्रेस काउंसिल और पत्रकार संगठनों से आग्रह किया जायेगा।

कुछ ऐसे रणनीति का ख़ाका तैयार कर रहे हैं शहर के सम्मानित, प्रतिष्ठित और वरिष्ठ पत्रकार वीर विक्रम बहादुर मिश्र जी। लखनऊ के दर्जनों पत्रकारों के गुरुवर कहे जाने वाले हरदिल अज़ीज़ मिश्र जी ने आज बताया कि इस संजीदा मसले और इससे निपटने की रणनीति कें लिए वरिष्ठ सहाफी डा. सुल्तान शाकिर हाशमी साहब और शहर के तमाम पत्रकारों से उनकी बात हो रही है।

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