स्तनपान में लापरवाही से रुक सकती है नवजात की सांस

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साभार: google
  • बच्चे से घूंट की आवाज आए तो समझिये स्तनपान का तरीका सही है
  • स्तनपान के समय मां अपनी कमर सीधी रखें, नहीं तो होगा पीठ दर्द

 लखनऊ 2, अगस्त, 2018: स्तनपान में लापरवाही बरतने से रुक सकती है आपके नवजात की सांस. यह कहना है नगरीय स्वास्थ्य केंद्र के बाल रोग चिकित्सक डॉक्टर रेहान का। विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्तनपान के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान डॉक्टर रेहान ने बृहस्पतिवार को बताया कि बच्चे को पैदा होने के एक घंटे के अंदर स्तनपान करवाना चाहिए। लेकिन सही तरीका नहीं अपनाने पर नवजात की सांस भी रुक सकती है। स्तनपान के समय मां अपनी कमर सीधी रखें और स्तनपान के दौरान एक-दो मिनट का विराम लें ताकि यदि नवजात को सांस की समस्या न हो । विराम नहीं लेने की स्थिति में नवजात की जान को खतरा हो सकता है ।

उन्होंने बताया कि मां कोशिश करें कि नवजात के मुंह की पकड़ स्तन पर बन सके। मुंह खुला रहने पर उसको गैस बन सकती है। बच्चे को गोदी में ऐेसे लें कि नवजात का शरीर और सिर अलग-अलग दिशा में हो और स्तन-नवजात के बीच 45 डिग्री का कोण बने।

अधिक मात्रा में दूध होने पर उसको फ्रिज में रख दे। यह दूध 6 घंटे तक नार्मल कर इस्तेमाल किया जा सकता है। मां के दूध को कभी गरम न करें न ही उबालें। दूध को स्तनपान के समय यदि बच्चे की घूंट की आवाज आ रही है तो समझिए सही स्तनपान हो रहा है। स्तन की सफाई का खास ध्यान रखें। स्तनपान के दौरान नवजात के सो जाने पर उसको कान का हिस्सा हिलाकर जगाएं। स्तनपान के बाद नवजात को कंधे पर रखकर हल्के हाथ से ठोकें ताकि उसको गैस की समस्या न हो। काफी देर तक नवजात का पेट खाली रहने पर उसके पेट में गैस बन जाती है। अचानक स्तनपान कराने पर वह पूरा दूध उल्टी कर देता है।

डॉक्टर एस.के. पाण्डेय राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आयुष चिकित्सक ने बताया कि स्तनपान के लिए मां को पौष्टिक भोजन यानी हैवी प्रोटीन युक्त भोजन करना चाहिए। इसके साथ ही प्रतिदिन एक गिलास दूध पीना चाहिए।

यह भी जानें 

बाल रोग विशेषज्ञ के अनुसार बच्चे को पैदा होने के एक घंटे के अंदर स्तनपान करवाना चाहिए। मां के दूध से संक्रमण नहीं होता है। स्तनपान बच्चे और मां दोनों के लिए सुविधाजनक होता है और दोनों में भावनात्मक संबंध भी जोड़ता है। मां का दूध संपूर्ण आहार होता है और आसानी से पच भी जाता है। मां के दूध में बीमारियों से लड़ने के तत्व होते हैं। स्तनपान से ही बच्चा कुछ ग्रहण करने की समझ विकसित करता है। मां का दूध कभी भी किसी भी परिस्थिति में बच्चे को मिल जाता है। टेढ़े, छोटे व कम उभरे निप्पल से अक्सर स्तनपान में समस्या आती है। इसके लिए प्रसव से पूर्व ही चिकित्सक से सलाह लें।

स्तनपान कराने में बुदेलखंड अव्वल :

जन्म के एक घंटे के अंदर बच्चों को दूध पिलाने में बुदेलखंड की महिलाएं सबसे आगे हैं। यह खुलासा हुआ है एन.एफ.एच.एस. 4 यानी नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे में। 28 दिन तक के उम्र के बच्चों को नवजात की श्रेणी में रखा जाता है। सर्वे के अनुसार महोबा की 46-6 प्रतिशत और झांसी की 35-4 प्रतिशत महिलाएं जन्म के एक घंटे के अंदर दूध पिलाती हैं। वहीं इलाहाबाद में 35-9 प्रतिशत, कानपुर नगर में 20-5 प्रतिशत माताओं ने जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराया। जबकि फैजाबाद में यह आंकड़ा 28-5 प्रतिशत, लखनऊ में 23-7 प्रतिशत] वाराणसी में 19-4 प्रतिशत और बरेली में 19-1 प्रतिशत रहा। सर्वे के अनुसार प्रदेश में पैदा होने वाले दिन यानी 24 घंटे के अंदर मां का दूध पीने वालों का प्रतिशत 68 है। जबकि 42 प्रतिशत ऐसे बच्चे पाये गए जिनको पैदा होने के बाद से तीन दिन तक मां का दूध नहीं दिया गया। वहीं छह माह की उम्र वाले मात्र 42 प्रतिशत बच्चे ही मां का दूध पीते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश में एक साल तक के 83 प्रतिशत बच्चे और 2 साल तक के 73 प्रतिशत बच्चे स्तनपान कर रहे हैं।

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