लखनऊ 23 मई। आने वाले समय में पीजीआई में और मरीजों का इलाज हो सकेगा। मरीजों की संख्या अधिक और बेड की संख्या कम होने से अभी तक काफी लोगों को असुविधा होती थी। पीजीआई में बन रहे 125 बेड वाले वार्ड में दिसम्बर से मरीजों की भर्ती शुरू हो जाएगी। वार्ड के शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
पुरानी ओपीडी में बन रहे इस वार्ड में छह विभागों के अलग-अलग मरीजों के वार्ड बनेंगे। यहां रेडियोलॉजी, जनेटिक्स, न्यूक्लीलियर मेडेसिन समेत छह विभागों के मरीज भर्ती होंगे। प्रशासन ने वार्ड में जरूरी संसाधन, बेड व अन्य जरूरी उपकरणों की खरीद फरोख्त की कार्रवाई शुरू कर दी है।
पीजीआई निदेशक डॉ. राकेश कपूर बताते हैं कि मरीजों का दबाव बढ़ने की वजह से पुरानी ओपीडी को नए भवन में शिफ्ट किया गया था। पुरानी ओपीडी का कोई उपयोग न होने की वजह से यहां पर 125 बेड वाले वार्ड को बनाने की योजना बनायी गई। जिसमें उन छह विभागों के वार्ड बनाए जा रहे हैं जिनके अभी तक अस्थायी वार्ड थे। सरकार को इस वार्ड के बनाने का प्रस्ताव भेजा था। सरकार की सहमति मिलने के बाद प्रशासन ने वार्ड का काम शुरू करा दिया है।
डॉ. कपूर बताते हैं कि एक मंजिला इस भवन में विभाग वार 25 से 35 बेड अलग-अलग वार्ड बनाएं जाएंगे। विभागवार बेड के आवंटन और वार्ड क्रियाशील करने के लिए जरूरी संसाधन और उपकरण के लिए जल्द ही वह अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। साथ ही निर्माण करा रही एजेंसी को निर्देश दिया है कि वो बिल्डिंग को जल्द तैयार कर पीजीआई के सुपुर्द कर दें। ताकि दिसम्बर में मरीजों की भर्ती शुरू कर दी जाए।
पीजीआई के सीएमएस डॉ. अमित अग्रवाल बताते हैं कि पुरानी ओपीडी में निर्माणाधीन भवन में जनेटिक्स, रेडियोथेरेपी, न्यूक्लीलर मेडिसिन, रेडियोलॉजी, पेन एंड पैलेटिव व मेडिकल ऑकोलॉजी विभाग के वार्ड बनेंगे। अभी तक इन विभागों के वार्ड अलग से नहीं थे। अस्थायी रूप से बने हुए वार्ड में मरीजों का इलाज किया जा रहा था। जिसकी वजह से मरीजों के साथ ही डॉक्टरों को काफी दिक्कतें हो रही थी। लेकिन अब नए वार्ड बनने से सबके लिए सुविधाजनक हो जाएगा।







