- अभी सिर्फ खसरे का ही लगता है टीका
- जर्मन खसरे से बचाव के लिए नहीं था उपाय
- सितम्बर से प्रदेशभर में शुरू हो जाएगा टीकाकरण
लखनऊ, 27 मार्च। सितम्बर से प्रदेश भर में खसरा और रूबेला – जिसको जर्मन खसरा भी कहते हैं – का टीका सरकार मुफ्त में लगाएगी। यह टीका यानी एम आर (MR) खसरा के टीके के साथ लगाया जाएगा।
रुबेला एक तेजी से फैलने वाली बीमारी है जिसके कारण गर्भवती महिलाओं में गर्भपात की संभावना होती है। वैसे तो रुबेला से हल्का बुखार और रैश होती है, लेकिन अगर गर्भवती महिलों में यह बीमारी हो तो बच्चा दिव्यांग पैदा हो सकता है। इस स्थिति को congenital rubella syndrome (CRS) कहते हैं। ऐसे बच्चे में कान और आँख से दिव्यांग होते हैं या फिर दिमागी तौर पर कमजोर, कई बच्चों में यह मधुमेह का कारण भी बन सकता है और इन सबके लिए उम्र भर दवाई लेनी पढ़ती है। इस बीमारी का डर सबसे ज्यादा उन देशों में होता है जहाँ बच्चों और महिलाओं में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है क्योंकि उनका टीकाकरण नहीं हुआ होता है।
रुबेला हवा से फैलता है और जब प्रभावित लोग खांसते और छींकते हैं, यह उस व्यक्ति से दूसरे में फैल जाता है. यह वायरस सिर्फ इंसानों से ही फैलता है।
डॉ ऐ. पी. चतुर्वेदी, राज्य टीकाकरण अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया खसरे के टीकाकरण के लिए अभी तक 9 माह पर एम-1 और 16 माह पर एम-2 टीका लगता है। लेकिन सितम्बर से खसरे का टीका रूबेला के टीके के साथ लगाया जाएगा और 9 माह से ऊपर और 15 साल से कम उम्र के बच्चों को 2 बार यह टीका दिया जाएगा। जिन बच्चों के पहले खसरा का टीका लगवाया है वह इस टीके को दोबारा लगवा सकते हैं।
विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार दुनिया भर में 2014 में 1.15 लाख बच्चे खसरे से मरे थे और लगभग एक लाख बच्चे (CRS) से ग्रसित थे। भारत में 2005 में (CRS) से ग्रसित केवल 238 बच्चे थे जो 2014 में बढ़कर 4,146 हुए। इन बढ़ते हुए आंकड़ों को देखते हुए सरकार ने measles -rubella का टीका टीकाकरण अभियान में शामिल करने का फैसला किया।
भारत में अब भी 38,000 के करीब बच्चे खसरे से जुड़े हुए कारणों से हर साल मरते हैं। जिन बच्चों को खसरा होता है उनकी प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है और वह बार- बार दस्त और निमोनिया जैसी बिमारियों का शिकार होते हैं। इन बच्चों की उम्र अमूमन 5 साल से कम होती है।







