यादें कोरियोग्राफर की: लखनऊ को सबसे पसंदीदा शहरों में एक मानती थी सरोज खान

0
271

लखनऊ में व्यंजन और चिकन की शौकीन थीं कोरियोग्राफर सरोज खान 

कोरियोग्राफर सरोज खान अब हमारे बीच नहीं रही। लेकिन उनकी सुनहरी यादें हमारे बीच हमेशा रहेंगीं। फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का लम्बी बीमारी के चलते 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। बता दें कि उनका जन्म 22 नवंबर 1948 को मुंबई में हुआ था और निधन 3 जुलाई 2020 को मुंबई में ही हुआ थ। लेकिन यह बहुत कम लोगो को ही पता होगा कि इनका असली नाम निर्मला नागपाल था और 2000 से भी ज्यादा फिल्मों में कोरियोग्राफ किया है। अपनी कई फिल्मों की शूटिंग बतौर लखनऊ को सबसे पसंदीदा शहरों में एक मानती थी सरोज खान।

तो वहीं आ चुकी सरोज खान के बारे में लखनऊ के नवाबी खानदान के वारिस नवाबजादा सय्यद मसूम रजा ने मीडिया को बताया कि 2014 में लखनवी इश्क फिल्म की शूटिंग होनी थी, जिसकी कोरियोग्राफ सरोज को करनी थी और इसी फिल्म के कुछ गानों की शूटिंग उन्ही के घर मे हुई थी। लखनऊ आने के लिए फोन से बात हो जाने के बाद सरोज सीधा मुंबई एयरपोर्ट से लखनऊ आकर किसी होटल न जाते हुये उनके आवास सल्तनत मंजिल पहुंची। जहां रोजाइफ्तार कार्यक्रम में नवाब फैमिली के साथ उन्होंने रोजाइफ्तार किया था।

नवाब मसूमरजा ने मीडिया को बताया, सरोज खान उनकी पूरी फैमिली के साथ बेहद अपनेपन लगाव और घुल-मिलकर रही,तो वहीं लखनवी कल्चर उन्हें बहुत पसंद आया, जिसमे सबसे ज्यादा लखनवी चिकन, व्यंजन उनके पसंदीदा थे। वापस मुंबई जाते समय लखनवी चिकन के कई मॉडल अपने साथ ले गयी थी। अपनी फिल्म लखनवी इश्क की शूटिंग के लिए तमाम बाल कलाकारों को अभिनय प्रस्तुति के लिए अवसर प्रदान करने के साथसाथ बच्चों की कला प्रस्तुति की सराहना की थी। नवाब मासूम रजा ने बताया सरोजखांन उदारवादी छवि, एक नेक दिल इंसान कि थी।

लखनऊ के पत्रकारपुरम में सरोज खान ने किया था डांस एकेडमी का उद्घाटन:

बता दें कि कुछ वर्ष पूर्व सरोज खान ने गोमती नगर के पत्रकारपुरम क्षेत्र में सरोज खान ने अपने ही नाम से डांस एकेडमी का उद्घाटन किया था। इस संस्था में उन्होंने अपने सीखाये कुछ मास्टर्स के साथ लखनऊ के कलाकारों को बॉलीवुड डांस के साथ नृत्य के विभिन्न रूपाकारों से रूबरू करवाया था।

लखनऊ की खुशी सिंह ने मीडिया से जानकारी साझा करते हुए कहती हैं कि सरोज खान केवल बॉलीवुड कलाकारों की ही नहीं, बल्कि पूरे हिन्दुस्तान की डांस की गुरु थी, मुझे डांस करने की प्रेरणा उन्हीं से मिलीं, मैं बचपन से उनके नत्य को फेलो करते आ रहीं हैं। मेरे कुछ पसंदीदा गीत चोली के पीछे, चने के खेत में, डोला रे आदि गीत है, जिस पर मैने मंचों पर परफर्मेस दी है। मै तो उनके निधन की खबर सुनकर मैं स्तब्ध रह गई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here