तेहरान में रात भर विस्फोट और आग की लपटें, मेहराबाद एयरपोर्ट पर हमला
नई दिल्ली : मध्य पूर्व में अमेरिका-इज़राइल बनाम ईरान युद्ध अब अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और तेज़ी से भयावह रूप ले रहा है। 7 मार्च 2026 की ताज़ा खबरों के अनुसार, संघर्ष अब क्षेत्रीय स्तर पर फैल चुका है, जिसमें लेबनान के हिजबुल्लाह भी शामिल हो गए हैं।
तेहरान पर भारी हमले जारी
शनिवार सुबह तक तेहरान में बड़े पैमाने पर विस्फोट और आग की लपटें देखी गईं। इज़राइल ने रात भर 80 से अधिक फाइटर जेट्स का इस्तेमाल कर “ब्रॉड-स्केल वेव ऑफ स्ट्राइक्स” किए, जिसमें तेहरान के सैन्य ठिकाने, बैलिस्टिक मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर और मेहराबाद एयरपोर्ट (शहर का मुख्य घरेलू हवाई अड्डा) को निशाना बनाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने रनवे पर विमानों के जलते हुए दृश्य देखे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए माफी मांगी और कहा कि अब पड़ोसियों पर हमला नहीं किया जाएगा, जब तक हमले उनके क्षेत्र से न हों। उन्होंने ट्रंप की “अनकंडीशनल सरेंडर” की मांग को “कब्र में ले जाने वाला सपना” करार दिया। ईरान ने जवाब में इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे, जिसमें तेल अवीव के ऊपर सायरन बजे और इंटरसेप्टर लॉन्च हुए।
लेबनान में हिजबुल्लाह पर इज़राइली हमले तीव्र
इज़राइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों (हिजबुल्लाह का गढ़), दक्षिणी लेबनान और बेक घाटी में बड़े हमले किए। रात भर 26 से अधिक लहरों में हमले हुए, जिसमें कमांड सेंटर, हथियार भंडार और हाई-राइज इमारतें निशाना बनीं। इससे 95,000 से अधिक लोग विस्थापित हो गए, और हजारों सड़कों पर सो रहे हैं। हिजबुल्लाह ने इज़राइल पर रॉकेट और ड्रोन दागे, लेकिन इज़राइल ने 500 से अधिक टारगेट नष्ट करने का दावा किया। लेबनान सरकार ने हिजबुल्लाह से हथियार सौंपने की मांग की है।
अमेरिका की भूमिका और ट्रंप का रुख
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग दोहराई और कहा कि वे ईरान के अगले नेता चुनने में भूमिका निभाएंगे। अमेरिका-इज़राइल संयुक्त हमले अब “नई फेज” में हैं, और अधिकारी कह रहे हैं कि युद्ध की सबसे तीव्र बमबारी अभी बाकी है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत शुरुआती हमलों में हो चुकी है, और कई वरिष्ठ नेता मारे जा चुके हैं। ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90% कमी आई है।
भारत पर प्रभाव: तेल संकट और रूस से सप्लाई
युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान बढ़ा है, जहां से भारत के 40-50% क्रूड आयात होते हैं। वैश्विक तेल कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में भारी उछाल आया। पुरानी बुकिंग्स कैंसल हो रही हैं, और आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।
रूस भारत को अतिरिक्त क्रूड सप्लाई करने को तैयार है। रूसी तेल के जहाज भारतीय जल के पास हैं, और भारत रूस से आयात बढ़ा रहा है (वर्तमान में 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन)। अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की छूट दी है ताकि रूसी तेल खरीदा जा सके। रूस भारत की 40% जरूरत पूरी करने को तैयार है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।
यह युद्ध अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला रहा है, जिसमें नागरिक मौतें, विस्थापन और आर्थिक संकट बढ़ रहा है। स्थिति तेज़ी से बदल रही है और कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।







