नवेद शिकोह
लखनऊ : हाल ही में अलीगढ़ में एक रिक्शा चालक ने सपा के झंडे पर अखिलेश यादव की तस्वीर को चूमा, तो बिहार में एक युवक ने वोट अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी के गाल पर चूम लिया। दोनों घटनाओं में जनता का प्यार तो झलकता है, लेकिन इनके नसीब अलग-अलग रहे। अखिलेश की तस्वीर चूमने वाले को सपा ने दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया और नया ई-रिक्शा भेंट किया, जबकि राहुल को चूमने वाले युवक को सुरक्षा कर्मियों (एसपीजी) ने तमाचा जड़ दिया।
बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की जोड़ी इंडिया गठबंधन की एकजुटता का रंग बिखेर रही है। वोट अधिकार यात्रा में दोनों की केमिस्ट्री जमीन पर साफ दिख रही है। इस गठबंधन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जैसे सहयोगी दलों को भी नई उम्मीद मिल रही है। यह यात्रा न केवल विपक्ष की एकता को दर्शाती है, बल्कि भाजपा/एनडीए विरोधियों को यह भरोसा भी दे रही है कि राहुल गांधी क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल बनाकर चुनावी प्रचार में मजबूत प्रदर्शन कर सकते हैं।
खासकर उत्तर प्रदेश में, यदि राहुल गांधी और अखिलेश यादव बिहार की तरह जमीनी स्तर पर संघर्ष करें, तो जनता का अच्छा समर्थन मिल सकता है। इंडिया गठबंधन की यह एकता यूपी, बिहार और उत्तर भारत में भाजपा के लिए चुनौती खड़ी कर सकती है। फिलहाल राहुल, तेजस्वी और अखिलेश को जनता का प्यार तो मिल रहा है, लेकिन यह प्यार वोटों में बदलेगा या नहीं, यह भविष्य बताएगा। इतना तय है कि विपक्ष आगामी चुनावों में वोट चोरी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा।
उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के मजबूत संगठन और जनाधार के साथ राहुल गांधी की वोट अधिकार की लड़ाई निश्चित रूप से चर्चा का विषय बनेगी।







