NTPC का ट्रिपल टी मानक कैसे हुआ फेल जिससे गई कई बेगुनाहों की जान?

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  • महारत्न एनटीपीसी का ट्रिपल टी मानक कैसे हुआ फेल, और दर्जनों गरीब मजदूरों की चली गयी जानें अपने आप में बडा सवाल
  • बाटम एैश हूपर में यदि इकटठा हुआ क्लींकर फार्म तो क्यों नही बंद की गयी मशीन
  • ब्वायलर में यदि आक्सीजन की मात्रा हुयी कम तो आक्सीजन एनालाइजर के आधार पर क्यों नही भेजी गयी अतिरिक्त आक्सीजन
  • उपभोक्ता परिषद ने उठाया सवाल महारत्न कम्पनी ने कैसे बरती उदासीनता, क्लींकर फार्म होने पर क्यों नही बंद की गयी मशीन जबकि ब्वायलर में लीकेज पर बंद की जाती है मशीन
लखनऊ 02 नवंबर। महारत्न कम्पनी एनटीपीसी ऊॅंचाहार में कल 500 मेगावाट मशीन का ब्वायलर फट जाने से दर्जनों लोगों की मौत से जहाॅं पूरा उत्तर प्रदेश व देश हिल गया यह कहना गलत नही होगा कि यह ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास की देश की सबसे बडी दुर्घटना है। सबसे बडा सवाल यह उठता है कि महारत्न कम्पनी एनटीपीसी जो पूरे देश के उत्पादन गृहों को बडी बडी तकनीकी सलाह देती है वह कैसे ऊॅचाहार मे फेल हो गयी? उत्पादन गृह चलाने का सबसे महत्वपूर्ण मानक ट्रिपल टी (टरबुलेन्स, टाइम टम्प्रेचर) कैसे फेल हो गया? बिजलीघर को चलाने के लिये यह मानक ही सबसे अहम होता है ऊॅचाहार पावर हाउस का 500 मेगावाट का ब्वायलर फटने का पहला कारण या तो क्लींकर बना या तो ट्रिपल टी मानक फेल हुआ या फिर ब्वायलर के अन्दर माइनस में रहने वाला वैक्यूम प्लस में हो गया। जिसकी वजह से ब्वायलर एवं बाटम एैश हापर फट गया। सबसे बडा सवाल यह उठता है कि एनटीपीसी जैसी महारत्न कम्पनी का कोई भी स्ेाफ्टी सिस्टम क्यों नही काम किया? यदि सिस्टम ने आगाह किया होता तो शायद इस दुर्घटना से बचा जा सकता था।
 उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सीआईएसएफ (सेन्ट्रल इन्डस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स) की रिपोर्ट क्या थी वह प्रथम दृष्टया स्वतः काफी कुछ खुलासा करेगी, लेकिन तकनीकी विषेशज्ञों की चर्चा के उपरान्त यह बात सामने आ रही है कि यदि 500 मेगावाट की मशीन अन्डरलोड लगभग 200 मेगावाट पर चलाई जा रही थी तो उसमें यह जानना अति आवश्यक है कि वह आयल सपोर्ट पर चलायी जा रही थी अथवा पूरी तरह कोल पर। लगभग सभी उत्पादन गृही लगभग 450 डिग्री टम्प्रेचर पर सबसे पहले आयल पर चलाते है। इसके बाद कोयले के प्रयोग करते हैं ब्वायलर के अन्दर जैसा कि परिस्थतियाॅं बता रही हैं कि क्लींकर फार्म हुआ तो इसका मतलब आक्सीजन की कमी रही हो या कोयले की क्वालिटी अच्छी न रही हो दो ही कारण मुख्य हैं। सबसे बडा सवाल यह उठता है कि ब्वायलर के अन्दर यदि हवा के साथ शामिल 21 प्रतिशत आक्सीजन मानक को पूरा नही कर रही थी तो किस मात्रा में अतिरिक्त हवा के साथ शाामिल आक्सीजन भेजी गयी क्या वह आक्सीजन एनालइजर में रिकार्ड है अथवा नही? 200 मेगावाट मशीन को चलाने के लिये लगभग 137 टन प्रति घंटा कोयला चाहिये। यदि इस कोयले में आयल सपोर्ट की आवश्यकता थी तो क्या एनटीपीसी के किसी सेफ्टी डिवाइस में यह बात सामने आयी?
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा बाटम एैश हूपर में क्लींकर फार्म यदि इकटठा हुआ और वह चोक हुआ तो मशीन को क्यों नही बंद किया गया? यदि ब्वायलर में लीेकेज हो जाता है तो मशीन बंद की जाती है। क्लींकर फार्म बनने के बाद जैसा कि परिस्थतियाॅ बता रही है कि उसे नीचे गिराने की कोशिश की गयी और जिसके कारण बडा धमाका हो गया और दर्जनों गरीब मजदूरों व अधिकारियों की जानें गयीं।

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