कंपनी के केयर टेकर प्रेमचंद ने साझा की यह बातें
लखनऊ,10 जनवरी। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में जानेमाने ओल्ड मॉन्क रम बनाने वाले खुद शराब नहीं पीते थे। ओल्ड मॉन्क के मालिक कपिल मोहन की लखनऊ स्थित कंपनी मोहन मीकिंस से सुनहरी यादें जुड़ी हैं। कंपनी के केयर टेकर हिमाचल प्रदेश के रहने वाले प्रेमचंद ने यह बातें साझा की। साल 1855 में शुरू हुई इस कंपनी का लखनऊ में एक सदी पार होने को है। इस यात्रा के दौरान मोहन मीकिंस पुराने लखनऊ में एक लैंडमार्क बन गया। इस चर्चित कंपनी के चेयरमैन 88 वर्षीय कपिल मोहन की छह जनवरी को गाजियाबाद स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। ओल्ड मॉन्क रम बनने की शुरुआत आजादी से पहले हुई।
जलियावाला बाग हत्याकांड वाले जनरल डायर के पिता एडवर्ड डायर ने साल 1855 में हिमाचल के कसौली में एक शराब कंपनी खोली थी जिसका नाम डायर ब्रियुरी रखा था। आजादी के बाद इस कंपनी को एनएन मोहन ने खरीद लिया और नाम बदलकर मोहन मेकिन लिमिटेड कर दिया। कपिल मोहन इन्हीं एनएन मोहन के बेटे थे। कंपनी के सिक्यॉरिटी ऑफिसर कुलदीप कुमार ने बताया कि मेरा जन्म मोहन मीकिंस कॉलोनी में ही हुआ। कपिल मोहन का पशु-पक्षियों से बेहद लगाव था। उन्होंने अपने मोहन नगर में शेर तक पाला था। अवधी चाट और व्यंजनों के शौकीन थे, खासकर मटन करी। उनका मुझे ही नहीं सारे कर्मचारियों को प्यार मिला।
प्रेमचंद ने बताया कि जब साल 1979 में मोरारजी देसाई सरकार में शराबबंदी हुई तो ललित मोहन ने फैक्ट्री के मजदूरों से कहा कि किसी को भूखे नहीं मरने दूंगा और उन्होंने लंबे अरसे तक किसी का वेतन नहीं रोका। हिमाचल प्रदेश के रहने वाले सुभाष चंद्र बताते हैं कि फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए कपिल मोहन ने हॉस्पिटल, पोस्ट ऑफिस खुलवाए। साथ ही वह कर्मचारियों को नियमित तीर्थ यात्रा कराते थे। मूलचंद मिश्र बताते हैं कि कपिल मोहन कर्मचारियों के साथ चामुंडा देवी, ज्वाला देवी पर अक्सर जाते थे। वह बताते हैं कि एक बार अमौसी एयरपोर्ट पर विमान हाईजैक हुआ तो उन्होंने अपहरणकर्ताओं को दबोच लिया था। इसके लिए उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार मिले। लगभग 9 साल हो गए उन्हें यहां से गए। फैक्ट्री बंद होने से लगभग 22 एकड़ का परिसर एकदम वीरान हो गया।







