पंजशीर के आगे बेबस तालिबान

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अफ़ग़ानिस्तान से जुडी किसी भी खबर के साथ आज कहीं न कहीं पंजशीर घाटी का उल्लेख अवश्य आ रहा है। ऐसा इसलिए कि पंजशीर ही अफगान का वह इलाका है जो बदलती सल्तनत के पूरे तालिबान को अकेले टक्कर दिए है। अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल से लगभग 49 किलोमीटर दूर पंजशीर घाटी स्थित है और यहां के कई हज़ार लड़ाके तालिबान के विरोध में लड़ने के लिए इकट्ठा है।

पंजशीर का देश के अशांत होने रहने के लिये इतिहास में हमेशा से रहा है। जब जब इस पर आक्रमण हुआ है तब तब पहले से और अधिक पंजशीर प्रभावशाली बनकर उभरा है। वर्ष 1980 के दशक में सोवियत सेना और 90 के दशक में तालिबान के ख़िलाफ़ यह देश विरोधियों का एक मज़बूत गढ़ के रूप में सामने आया।

इस घाटी में मौजूद नेशनल रेज़िस्टेंस फ़्रंट ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान (एनआरएफ़) ने एक बार फिर से दुनिया को इस घाटी की ताक़त की फिर से एक बार याद दिला दी है। यहां के विदेशी मामलों के प्रमुख अली नज़ारी के अनुसार हमारी ताक़त के आगे रूस की लाल सेना भी हमें हराने में असमर्थ रही, बल्कि 25 तालिबानियों एक दल ने भी घाटी पर कब्ज़ा करने की असफल कोशिश की।

बता दें कि पंजशीर घाटी राजधानी काबुल के उत्तर में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक लगभग 75 मील यानिकि 120 किलोमीटर तक के क्षेत्र में फैली हुई है। लंम्बी, गहरी एवं धूल से भरी यह घाटी राजधानी काबुल के उत्तर में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक लगभग 9,800 फ़ीट ऊंची-ऊंची पहाड़ी चोटियों से घिरा हुआ हैं। यह पहाड़ वहां के निवासियों के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच जैसा काम करता है। इस घाटी से निकलने वाला एक मात्र सकरा रास्ता है जो बड़े-बड़े घुमावदार चट्टानों से निकल कर पंजशीर नदी के बीच से रास्ता बनाकर निकलता है। यह केवल एक घाटी ही नहीं है बल्कि यदि कोई जब इसमें प्रवेश करता हैं तो यहां कम से कम और 21 उप-घाटियां आपस में एक-दूसरे से जुड़ी मिलती हैं।

एक अनुमान के अनुसार पंजशीर घाटी में लगभग 1.5 से 2 लाख लोग रहते हैं। यहां के ज्यादातर लोग ‘दारी’ भाषा बोलते हैं। यह भाषा ताजिक मूल की अफ़ग़ानिस्तान की मुख्य भाषाओं में से एक है। पंजशीरी अफ़ग़ानिस्तान के उत्तरी हिस्से में बसे पड़ोसियों में से एक ताजिकिस्तान है। इतिहास में पंजशीर घाटी को अर्ध-क़ीमती रत्नों के लिए भी जाना जाता है।

आज पंजशीर घाटी में जलविद्युत के बांध और एक पवन ऊर्जा भी है। अमेरिका ने यहां की सड़कों के साथ काबुल से सिग्नल प्राप्त करने वाले एक रेडियो टावर इनके सहयोग से यहां निर्माण कराया था।

ताज़ा गतिरोध में ऐसा माना जा रहा है कि इस घाटी में हथियारों का एक बड़ा भंडार मौजूद है। आज से 20 वर्षो पूर्व तालिबान के हटने के बाद यहां के लड़ाकों ने अपने दल को भंग कर दिया था और उन लोगों ने अपने हथियारों को सरकार को सौंप दिये थे। लेकिन इसके बावजूद आज भी यहाँ हथियारों का भंडार सुरक्षित है। पंजशीर घाटी में तालिबानो का विरोधी सेना का नेतृत्व करने वाला मात्र 32 वर्ष के अहमद मसूद हैं। वे वर्ष1980 और 90 दशकों के एक सम्मानित विद्रोही नेता अहमद शाह मसूद के पुत्र हैं।

  • प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती 

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