गाँधी की राह पर भागीदारी संकल्प मोर्चाः आईपी कुशवाहा

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जनअधिकार पार्टी के वरिष्ठ नेता आईपी कुशवाहा व लखनऊ में आईपी कुशवाहा के नेतृत्व में भागीदारी संकल्प मोर्चा के घटक जाप के पदाधिकारियों ने काली पट्टी बाँधकर दर्ज कराया ऑनलाईन विरोध 
  • 1 जून से 7 जून तक काली पट्टी बाँधकर करेंगे प्रतीकात्मक विरोध
  • उत्तर प्रदेश में पिछड़ों व दलितों के खिलाफ बढ़ रहे हैं अत्याचार
  • ऑनलाईन विरोध-प्रदर्शन से उठायेंगे मजलूमों की आवाज

लखनऊ, 02 जून, 2020: उत्तर प्रदेश के समस्त जिलों में भागीदारी संकल्प मोर्चा ने 1 जून से 7 जून तक काली पट्टी बाँधकर प्रतीकात्मक विरोध-प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। ऑनलाईन माध्यम से मजलूमों की आवाज उठाना, समय की माँग है। क्योंकि कोरोना के संक्रमण के चलते सड़क पर विरोध-प्रदर्शन कहीं से सही नहीं है लेकिन जुल्म और शोषण पर शांत होकर बैठना भी न्याय नहीं है। अतः भागीदारी संकल्प मोर्चा के शीर्ष नेताओं बाबूसिंह कुशवाहा व ओमप्रकाश राजभर ने अपने पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से सरकारी सभी नियमों का पालन करते हुए ऑनलाईन धरना-प्रदर्शन की बात कही है। इस दुःखद काल में दीन-दुखियों व मजबूरों की मदद के लिये भी अपने पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है। भागीदारी संकल्प मोर्चा के वरिष्ठ नेता आईपी कुशवाहा समेत मोर्चा के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता सोशल डिस्टेंसिंग व अन्य नियमों का पालन करते हुए ऑनलाईन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बीएसएम के वरिष्ठ नेता आईपी कुशवाहा ने हमारे सीनियर कॉपी एडीटर राहुल कुमार गुप्ता से इस दुःखद दौर में मोर्चा की माँगों व सरकार के कामों के प्रति बहुत सी चर्चाएं की। उन्होंने कहा कि-

अब न चुप रहा जा रहा, कुछ तो बोलना ही पड़ेगा।
मुर्दे नहीं हैं हम जो धारा के साथ ही बहना पड़ेगा।।

जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, अंग्रेजों का अत्याचार चहुँओर था। तब गाँधी ने अंहिसा का कठिन मार्ग अपनाकर देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया। आज वर्तमान में देश का शासन गुलाम भारत की तस्वीर की ही तस्दीक कर रहा है। भाजपा के सत्ता में आते ही पूँजीवादी ताकतें अपनी सुविधा अनुसार सरकार से अपने मनमाफिक नियम पारित करा लेती हैं तथा आमजन का शोषण बढ़ जाता है। देश में छह सालों से कथित राष्ट्रवाद का एक ऐसा पर्यावरण बना दिया गया है जिसमें आप कितने भी गलत क्यों न हों, भगवाधारी हैं तो ही आप राष्ट्रवादी हैं या फिर आप पूरी तरह से सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा करते न अघायें तब भी आपको राष्ट्रवादी होने का तमगा मिल जायेगा। अन्यथा नहीं। देश में ईर्ष्या व नफ़रत की राजनीति अपने परवान पर है। देश को दो धूरिओं पर बाँट लिया गया है।

उन्होंने कहा कि बार-बार सरकार के समर्थकों द्वारा यह चेताया जाता है कि मुस्लिम और सेक्यूलर हिंदू, सरकार के खिलाफ व उसकी किसी भी नीति के खिलाफ कुछ मत बोलें। दलितों, आदिवासियों, अतिपिछड़े भी डरे-सहमें से हैं। सोशल मीडिया के जरिये एक जंग सी छिड़ी है। सवर्ण बनाम् आदि, हिंदू बनाम् मुस्लिम। ऐसा माहौल अब जम़ीन पर भी दिखने लगा है। आये दिन भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में दलितों, अतिपिछड़ों, पिछड़ों, आदिवासियों व अल्पसंख्यकों के खिलाफ सामंतवादी ताकतों के द्वारा जुल्म किये जा रहे हैं। सरकार के कान के नीचे यह सब हो रहा है फिर भी सरकार खामोश है। सरकार को पूर्ण बहुमत में लाने का श्रेय इन शोषित हो रहे लोगों का भी है। फिर इस सरकार में सामंतशाही क्यों बढ़ रही है?

उन्होंने कहा कि कोरोना काल सामंतवादियों के लिये अवसर बनकर उभर रहा है। वजह मजबूर मजदूरों का सबकुछ छिन चुका है। मदद के नाम पर कर्ज दिया जा रहा है। सरकार साहूकारी कर रही है। नोटबंदी के समय पर बैंकों की मनमानी सब को याद है। आज भी बैंकों पर आमजन को लोन लेने में बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं इसके बावजूद भी उन्हें लोन नहीं मिल पाता। दूसरी तरफ पूँजीपतियों को अधिकारी उनके घर जाकर करोड़ों को लोन बाँट आते हैं। केंद्र सरकार के मंत्री कैसे-कैसे आंकड़े पेश करते हैं कि लोगों को हँसी भी आती है और गुस्सा भी। इससे भी जनता का विश्वास सरकार पर से उठने लगता है। पर सरकार निष्फिकर है क्योंकि उनके पास मीडिया है, उनकी हाँ में हाँ मिलाने वालों का बाहुल्य भी है।

उत्तर प्रदेश में सियासत के गलियारों में एक बड़ी उथल-पुथल है जिसे मीडिया अपने कुतर्कों की चादर से बाखूबी ढाक रही है। मजदूर अपने घरों व गाँवों की ओर आ रहे हैं इनमें सर्वाधिक संख्या दलितों, अतिपिछड़ों व अल्पसंख्यकों की ही है। यूपी के लगभग हर जिलों में इनके खिलाफ अत्याचार बढ़ रहे हैं। सामंती ताकतों को इनका अपने गांव व घर आना रास नहीं आ रहा। पंचायत चुनाव नजदीक हैं और इनकी संख्या गाँवों में बहुत बढ़ चुकी है। आप समझ सकते हैं, पिछड़ों व वंचितों को कैसे दबाया जा रहा है। यह सब पीड़ित व वंचित लोग अब अकेले नहीं हैं, भागीदारी संकल्प मोर्चा इनकी आवाज पुरजोर से उठा रहा है और उठाता रहेगा। उत्तर प्रदेश में भागीदारी संकल्प मोर्चा सरकार से अनुरोध करता है कि वो प्रदेश में हो रहीं पिछड़े, दलितों, अल्पसंख्यकों की हत्याओं और उत्पीड़न को रोकने में तत्परता दिखायें तथा उनकी रिपोर्ट लिखकर कार्रवाई करें। किसानों को उनके सभी उत्पादों पर समर्थन मूल्य दिया जाये और किसानों का कर्ज माफ किया जाये।

निम्न मध्यम वर्ग, श्रमिकों व मजदूरों की जीविका के लिये एक मुश्त 15000 रूपये दिये जायें और प्रति माह 7500 रूपये दिये जायें। बेरोजगारों को रोजगार दिया जाये। छोटे व मझोले किसानों का बिजली का बिल माफ किया जाये। जिससे आमजन पर राहत की बरसात हो सकती है और वो भी पुनः सामान्य जिंदगी जी सकें।

इस महामारी काल में सभी नियमों का पालन करते हुए आमजन की, मजबूर जन की आवाज हम दबने नहीं देंगे। भागीदारी संकल्प मोर्चा 1 जून से 7 जून तक ऑनलाईन विरोध प्रदर्शित करेगा। घरों में रहकर, हाथों में काली पट्टी बांधकर हम सरकार का ध्यान आकृष्ट करायेंगे। हमारे नेता बाबूसिंह कुशवाहा व ओमप्रकाश राजभर ने मोर्चा के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर मोर्चा के सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से ऑनलाईन विरोध प्रदर्शन का आग्रह किया है। तथा इस दुःखद वक्त में दीन-दुःखी व पीड़ित लोगों के लिये हर संभव मदद के लिये भी आग्रह किया है।

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