लखनऊ, 11 अक्टूबर । पंचायती राज विभाग ने मातृभूमि योजना की अनूठी पहल शुरु की है। इसके तहत कोई व्यक्ति अपने गांव के विकास के लिए अंशदान कर सकता है। इसके तहत 60 प्रतिशत व्यक्ति अथवा संस्था को देना होता है और 40 प्रतिशत सरकार लगाती है। पंचायती राजमंत्री ने बताया कि अब तक 12 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
पंचायती राज विभाग द्वारा शुरू की गई ‘मातृभूमि योजना’ ग्रामीण विकास का एक अनूठा उदाहरण बन चुकी है। लोग अब अपने गाँवों में सरकारी सहयोग से स्कूल, कला अकादमी, खेल परिसर, सीसी रोड, हाईमास्ट लाइट जैसी सार्वजनिक मूलभूत सुविधाएं विकसित करवा रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत व्यक्ति या संस्था को परियोजना की कुल लागत का 60 प्रतिशत योगदान स्वयं करना होता है, जबकि 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाती है।

प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि यह योजना जनसहभागिता से विकास की दिशा में एक नई पहल है, जो समाज और शासन को एक सूत्र में बाँधती है। पंचायती राज विभाग इस योजना के संचालन, पारदर्शी ऑनलाइन पंजीकरण और प्रगति की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
कुछ प्रमुख कार्यों में बागपत में सीसी रोड निर्माण, गोरखपुर की ग्राम पंचायतों जंगल रानी सुहास कुंवारी और नारायणपुर में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना, हरदोई में सरदार पटेल स्मारक हेतु टीन शेड, लखनऊ की ग्राम पंचायत खुशहालगंज में सोलर लाइटें, इटावा की जेतपुर जमनापार और पुरा मोरंग में स्ट्रीट लाइटें तथा देवरिया की मटियारा जगदीश पंचायत में 11 सोलर लाइटें स्थापित की गई है। प्रदेश सरकार की यह योजना न केवल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि प्रवासी नागरिकों को अपने गाँवों से भावनात्मक रूप से भी जोड़ रही है। हर पूर्ण परियोजना पर लगाए गए शिलापट्ट पर दानकर्ता का नाम अंकित किया जाता है, जिससे यह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है।







