गांव की ऐसी मस्ती और कहाँ: बच्चो ने झूला डाला और खूब मस्ती से झूल रहे हैं.. घटती मिटती परंपराओं के बीच सावन में झूले का जिंदा चलन देख कर हृदय को बहुत सुकून मिला।
वास्तव में शहर की भगति दौड़ती ज़िंदगी में हमारे पास उतना समय नहीं मिला, फिर भी आज यह दृश्य देखने को मिला और फिर फोटो तो बनती ही थी, उनके बीच पहुँच गये और हम भी उस माटी के रस में घुल मिल गये। समय मिले तो एक बार आप भी जरूर झूलें, बचपन याद आ जायेगा!
- अरुण कुमार तिवारी







