मार्केटिंग ने बदल दिया ‘धनतेरस’ का अर्थ

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धनतेरस के बारे में कहा जाता है कि यह देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के जनक कहे जाने वाले धन्वंतरि के जन्म से जुड़ा हुआ दिन है। यानि एक तरह से अपने स्वास्थ्य, आरोग्य और आयुष्य के लिए स्वस्थ जीवनशैली के संकल्प और प्रयास का दिन। लेकिन आधुनिक मार्केटिंग के इस युग में बाज़ारवाद ने इसे सोने-चांदी के सिक्कों, गहनों और बर्तनों की खरीदारी तक सीमित कर दिया है। बता दें कि बाजार की गहमागहमी के बीच लक्ष्मी, कुबेर को प्रसन्न करने की बात तो खूब होती है लेकिन स्वास्थ्य की चर्चा भी नहीं होती, जबकि पहला सुख निरोगी काया को कहा गया है।

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