अब नहीं गूंजती यहां तोतो की मिठास, चैचहाहट
विकास के नाम पर विलुप्प्त होते पंछी: यह तस्वीर लखनऊ के आदर्श शिल्प ग्राम के पास बने फ्लाई ओवर की है जहां पहले काफी घने जंगल और पेड़ -पौधे और तमाम तरह की वनस्पति और जीव जंतु हुआ करते थे। लेकिन धीरे -धीरे सब विकास की भेंट चढ़ गया। बहुत से पंछियों ने यहां से पलायन कर लिया और जो कुछ बचे यही आस-पास बचे खुचे पेड़ों पर अपना ठिकाना बना लिया, नहीं तो फ्लाई ओवर की मोटी- मोटी पत्थरनुमा दीवारों में घरौंदा बना लिया।

यहां काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि यहां तोते बहुत ज्यादा थे और इन्ही पेड़ पौधों और फ्लाई ओवर कि दीवार में रहते थे उन्होंने बताया कि लोगों कि नज़र इन तोतो पर थी लोग इनका शिकार करने लगे, रातों रात या तड़के सुबह लोग इनके अंडे और बच्चे उतार ले गए। कुछ को तो बहेलिये ने इन्हे पकड़ कर बेच खाया और सूना कर गए इनका यह भी आशियाना ! इसके बाद ख़त्म हो गयी इन तोतो की चैचहाहट भी।

रविवार को एक कार्यक्रम से लौटते वक़्त जब इन तोतो की आवाज मुझे सुनने का मन हुआ तो मै इन्हे देखने के लिए इधर आया तो पता चला सब ख़त्म हो गया। इंसानो के लालची स्वाभाव ने उनके घरौदों को नस्ट कर दिया। उनकी जगह अब सिर्फ तिलोरी चिड़िया और कौव्वे ही वहां रहते हैं। तोते वहां अब एक भी नहीं बचे हैं। क्या वास्तव में यही विकास का सच है?
-सुशील कुमार







