जब मैं विदा हुआ तो कोई दो कदम साथ भी न आया?

0
2633

लखनऊ, 18 अप्रैल 2019: एक समय था जब फ्रिज के घर पर आने की खुशी में मिठाईयां बांटी जाती थी। पूजा- अर्चना की जाती थी घर के सदस्य उसके आने के स्वागत के लिए तैयार रहते थे। पुराने जमाने के घड़े को त्याग कर लोग फ्रिज का ठंडा पानी पीने का इंतजार करते थे। लोग उसे वीआईपी का दर्जा मानकर स्पेशल समझते थे। खाने को ताजा रखना हो या सब्जी को फ्रेश सब काम के लिए फ्रिज ही होता था। बस यूं समझिये घर में ख़ुशी- ही ख़ुशी होती थी।

घर की महिलाये फ्रिज आने के बाद उसे घर के किसी कोने में सुंदरता के साथ रखने का इंतजाम भी करते थी। कभी कभी तो उसमें पड़ोसियों का भी कोई फ्रीजर से सम्बंधित सामान रख जाते थे।

आधुनिकता के दौर में जब धीरे-धीरे बदलाव होता गया। फिर फ्रिज की वैल्यू धीरे-धीरे कम होने लगी, वजह हर घर में फ्रिज उपलब्धता। हालात यह हो गए हैं कि फ्रिज बनाने वालों की दुकानों पर कूड़े के भाव पड़े हैं फ्रिज!

एक ऐसा ही नज़ारा हमारे फोटोग्राफर ने भी कैद किया जिसमे उसने यह दिखाने की कोशिश की है कि जब किसी के घर में पहली बार फ्रिज आया तो उसका बहू की तरह स्वागत किया गया, लेकिन जब उसके मरणासन अवस्था में विदाई हुई तो कोई दो कदम साथ भी ना चलकर आया। हाल देखिए फोटो में क्योकि तस्वीर भी कुछ बोलती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here