अँखियां
ये नयना ये अँखियां दिखाती हैं दुनिया।
मुझको मोहब्बत पढ़ाती ये अँखियां।।
नहीं कूप मंडूक बनाती मुझे।
ये सीख देतीं बनूं मैं तो दरिया।।
ये नयना ये अँखियाँ दिखाती हैं दुनिया।
बड़ी दूर से भी ये रखती नजरिया।।
गलत राह से बचाती ये अँखियां।
मुझे सही राह पे लातीं ये अँखियां।।
मेरी जिंदगी की आँखें ये अँखियां।
ये नयना ये अँखियाँ खुशियों की दुनिया।।
ये नयना ये अँखियां दिखाती हैं दुनिया।
सत्यम् शिवम् सुंदरम् ये बताती हैं अँखियां।।
ये नयना ये अँखियां….
2
प्यार
तुमसे, तुम्हारे प्यार से।
साँसें मेरे जहान की।।
धड़कन है मेरे दिल की।
तुमसे, तुम्हारे प्यार से।।
गुम हूँ कहीं मैं तुममें।
खोया वजूद प्यार में।।
खुश हूँ मैं बेइंतहा।
रब को पाया है तुममें।।
तुमसे, तुम्हारे प्यार से।
हर बातें मेरे जहान की।।
तुमसे, तुम्हारे प्यार से।
नाता युगों-युगों का।।
हर रात एक ख्वाब में।
हर दिन इंतजार में।।
इबादत तो हो रही है।
अब बस तेरे दीदार की।।
तुमसे, तुम्हारे प्यार में..
3
आईने से दूरियां बना लूंगा मैं
दूरियाँ इस कदर खुद से भी बढ़ा लूँगा मैं।
तुम तो क्या आईने में खुद को देख न पाऊंगा मैं।।
कहीं दिख न जाये मेरी आँखों में सूरत तेरी।
आईने से भी दूरियाँ अब बना लूँगा मैं।।
अब यह एहतराम हो गया तू उड़ सकता आसमाँ में।
टूटे हुए आशियाने में चैन से लौट आऊँगा मैं।
पाओगे नहीं कहीं नामोनिशाँ हमारा।
तेरे जहाँ से खुद को इस तरह मिटा लूँगा मैं।
खुश रहना अब सदा ही सदा।
आँसू पोंछने अब आ न पाऊंगा मैं।।
भूल जाओ भले तुम मुझको जाकर नये जहाँ में।
मेरी इबादत हर मोड़ पे याद आयेगी तुम्हें।।
बस आँखों में अब नमी मत आने देना।
वरना फिर से हर बार की तरह तड़प जाऊँगा मैं।।
राहुल कुमार गुप्त








