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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    अब रूकेगी शवों पर राजनीति

    ShagunBy ShagunDecember 7, 2025 Current Issues No Comments4 Mins Read
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    विपक्ष में किया था विरोध,अब भाजपा सरकार ने खुद लागू किया एक अच्छा कानून

    ओम माथुर

    राजनीतिक दल विपक्ष में रहते हुए जिन मुद्दों या कानूनों का विरोध करते हैं, उन्हीं मुद्दों और कानून को वह सत्ता में आने के बाद अपना लेते हैं न। यह इस बात का सबूत होता है कि विरोध करना राजनीतिक विचारधारा की मजबूरी होती है या फिर सत्ता का विरोध करना राजनीतिक मजबूरी। राजस्थान में कल से लागू हुआ राजस्थान मृत शरीर के सम्मान अधिनियम भी इसी का सबूत है।

    जब अशोक गहलोत सरकार 2023 में अपने कार्यकाल के अंतिम महीनों में ये कानून लेकर आई थी, तब भाजपा ने विधानसभा में इसका जोरदार विरोध किया था। तब प्रतिपक्ष के नेता राजेद्र सिंह राठौड़ ने तो यहां तक कहा था कि शव के साथ प्रदर्शन पर सजा का प्रावधान करके कांग्रेस ने आपातकाल के मीसा जैसे कानून की याद दिला दी है। यह जनता की आवाज दबाने वाला है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन इसी भाजपा ने सरकार बनने के बाद बिना किसी संशोधन के इस कानून के नियमों का नोटिफिकेशन जारी कर इसे लागू कर दिया। गहलोत सरकार जहां जल्दबाजी के कारण नियम नहीं बन पाई थी, वहीं भाजपा सरकार ने नियम बनाने में ढाई साल लगा दिए। इस दरमियान राजस्थान में शव को रखकर कई प्रदर्शन हुए। लेकिन नियमों के अभाव में पुलिस कार्रवाई नहीं कर सकी। एक रोचक तथ्य ये भी है कि जिन भजनलाल के मुख्यमंत्री काल में यह कानून लागू किया गया है न,जो कानून पास होने के समय विधायक भी नहीं थे। और अब जब कानून लागू हुआ है,तब विपक्ष के नेता रहे राठौड़ विधायक नहीं हैं।

    पिछले कुछ समय से प्रदेश में आंदोलनों का यह नया स्वरूप सामने आया था कि लोग शव रखकर सड़कों पर प्रदर्शन करने लगे थे। इससे कई -कई दिन तक शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाता था। इसमें राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन दोनों ही शामिल थे। अधिकांश मामलों में मुआवजा या सरकार से नौकरी हासिल करने के लिए इस तरह के आंदोलन होते हैं, तो कुछ आंदोलन अपराधियों को पकड़ने के लिए हुए। इनमें कई आंदोलन का मकसद कुछ नेताओं का शव की बेकद्री की कीमत पर अपनी राजनीति चमकाना होता था। लेकिन इसका असर आम लोगों पर ही होता था। कई बार मुख्य मार्गों पर इस तरह के प्रदर्शन से यातायात की समस्या आती थी और संबंधित क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर भी आंच आती थी। कई बार अस्पतालों के बाहर भी ऐसी स्थिति आ जाती है। अब नियमों के नोटिफिकेशन के बाद ऐसा करने वालों को 1 साल से 5 साल तक की सजा और जुर्माना दोनों हो सकेंगे। ऐसे परिजन भी नहीं बख्शे जाएंगे, जो शव लेते नहीं है। बल्कि विरोध प्रदर्शनों के लिए शव लेकर खुद उसका हिस्सा बन जाते हैं‌। यानी अब कानून के दायरे में परिजन, सामाजिक संगठन के कर्ताधर्ता और नेता भी आएंगे। ढाई साल बाद कानून के प्रभावी होने का कारण यह रहा इसके नियम नहीं बने थे। इस कारण कानून का इस्तेमाल नहीं हो पाया था। कई बार राजनीतिक मकसद साधने के लिए ऐसे आंदोलन किए गए हैं। जबकि हिंदू संस्कृति में मृत्यु के तुरंत बाद अंतिम संस्कार से ही मृतक की सद्गति मानी जाती है।

    कानून का यह प्रावधान भी महत्वपूर्ण है कि कोई भी अस्पताल प्रशासन बकाया बिल का भुगतान नहीं करने के आधार पर शव नहीं रख सकेगा् अस्पतालों को परिवार या सार्वजनिक प्राधिकरण को सम्मानित तरीके से शव सौंपना होगा। राजस्थान ही नहीं देश में से कई मामले सामने आ चुके हैं,जिसमें बकाया बिल होने पर अस्पताल प्रशासन परिजनों को शव देने से इनकार कर देते हैं। निजी हॉस्पिटल वैसे ही मरीजों को लूटने के लिए बदनाम हैं। ऐसे में पहले इलाज के दौरान मंहगे इलाज से परेशान परिजन बाद में बकाया बिल के कारण शव लेने के लिए तरस जाते हैं। यह कानून मृत लोगों के साथ खिलवाड़ को रोकेगा तथा नेताओं को अपनी मांगे मनवाने के लिए इस निकृष्ट कदम से बचाएगा। राजस्थान देश में ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने ये कानून बनाया है। संभव है देश के अन्य राज्य भी जल्द ही राजस्थान के इस कानून को अपनाकर अपने यहां भी लागू करें, क्योंकि शव के साथ धरना प्रदर्शन धरना पूरे देश में होते हैं।

    Shagun

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