लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के साप्ताहिक वेबीनार में सैकड़ों उपभोक्ताओं ने अपनी पीड़ा बयां की। उपभोक्ताओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे का बिजली रोस्टर केवल कागजों तक सीमित है, जबकि वास्तव में 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। लगातार लोकल ब्रेकडाउन और ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि अभियंता ट्रांसफार्मर जलने की घटनाओं को कार्रवाई के डर से छुपा रहे हैं, जबकि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन वाहवाही लूटने में व्यस्त है।
उपभोक्ताओं ने बताया कि मई, जून और जुलाई की भीषण गर्मी में बिजली की जरूरत सबसे ज्यादा है, लेकिन आपूर्ति बेहद कमजोर है। RDSS (रिवाइज्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) के तहत लगाए गए एरियल बंच कंडक्टर (ABC) की गुणवत्ता घटिया होने के कारण वे बार-बार जल रहे हैं। ओवरलोडिंग के चलते ट्रांसफार्मर भी लगातार खराब हो रहे हैं। इसके अलावा, समय पर ब्रेकडाउन ठीक न होने का एक बड़ा कारण संविदा कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी है। गर्मी शुरू होने से पहले पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के निर्देश पर लाइनमैन और अन्य कर्मचारियों की छटनी की गई, जिसके चलते मैनपावर की कमी ने उपभोक्ताओं को और परेशान किया है।
उपभोक्ताओं ने बिजली शिकायत हेल्पलाइन 1912 पर भी गुस्सा जाहिर किया। उनका कहना है कि शिकायतों को बिना समाधान के ही फर्जी रिपोर्ट बनाकर बंद कर दिया जाता है, ताकि उपभोक्ता मुआवजे की मांग न कर सकें। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा, “पिछले साल की तुलना में इस बार बिजली आपूर्ति की स्थिति और खराब है। RDSS योजना में करोड़ों-अरबों रुपये खर्च हुए, लेकिन सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है। बिजली कंपनियां इस मामले में गंभीर नहीं हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि उपभोक्ता परिषद जल्द ही इस मुद्दे को विद्युत नियामक आयोग के सामने उठाएगा और बिजली कंपनियों की सुनवाई में भी इसे जोर-शोर से रखेगा।
वेबीनार में नोएडा, गाजियाबाद, जौनपुर, मऊ, फर्रुखाबाद, बलिया, गाजीपुर, लखीमपुर खीरी, देवरिया, प्रतापगढ़, महोबा, पलिया, केस्को कानपुर, लखनऊ, झांसी, हिडन क्षेत्र, सहारनपुर, एटा, मैनपुरी सहित कई जिलों के उपभोक्ताओं ने अपनी समस्याएं साझा कीं। उपभोक्ताओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी के कारण लोग गर्मी में त्रस्त हैं।
उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि बिजली आपूर्ति को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, ट्रांसफार्मर और कंडक्टर की गुणवत्ता सुधारी जाए, और छंटनी किए गए कर्मचारियों को बहाल कर मैनपावर की कमी को दूर किया जाए।







