सफलता के लिए संयम है जरूरी

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एक मित्र हैं. अनुभवी हैं, लेकिन अक्सर इस बात को लेकर दुखी रहते हैं कि उनके अनुभव का लाभ उनके बॉस नहीं लेना चाहते. उन्हें इस बात की भी शिकायत रहती है कि अपनी क्षमता दिखाने का उन्हें अवसर नहीं दिया जाता. एक बार बॉस ने सोचा कि उन्हें भी आजमाया लिया जाये. उन्हें अवसर दिया गया, लेकिन वे खुद की सफलता साबित नहीं कर सके. वे और भी अवसाद से ग्रसित हो गये. उन्हें इसका कारण समझ नहीं आ रहा था.

वे अपने एक पुराने शिक्षक के पास गये. उन्हें अपनी पीड़ा सुनायी. तब शिक्षक ने बड़े प्रेम से उन्हें बताया कि महाभारत में एक प्रसंग आता है, जिसमें सफलता पाने और प्राप्त सफलता को लंबे समय तक बनाये रखने के सूत्र बताये गये हैं. ये हैं – उद्यम, संयम, दक्षता, धैर्य, सावधानी, स्मृति और सोच-विचार. सफलता पाने की जल्दबाजी या बेचैनी में कई लोग आसान और छोटे रास्ते या तरीकों को चुन तो लेते हैं, लेकिन इससे मनचाही और स्थायी सफलता नहीं पायी जा सकती. इससे व्यक्ति निराशा के दौर में पहुंच जाता है.

दरअसल, वास्तविक सफलता पाने के लिए परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है और जब सफलता मिले, तो अपने मन, विचार और व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए. उतावलापन में व्यक्ति कई बार जो कुछ भी सफलता प्राप्त करता है, उसे और विस्तार देने की बजाय जल्द ही खो देता है. इसलिए हर परिस्थिति में संयम बनाये रखना चाहिए. दक्षता का कोई अंतिम पड़ाव नहीं होता. इसलिए खुद को हमेशा सीखने की प्रक्रिया में रखें. धैर्य और सावधानी सफलता की बड़ी कसौटी हैं. इसमें आप जितने दक्ष होंगे, सफलता की संभावनाएं उतनी ही प्रबल होंगी. न तो किसी से सीखी गयी बात भूलनी चाहिए, न ही किसी व्यक्ति के सहयोग और उपकार को. ये बातें पुरातन जरूर हैं, लेकिन इनमें अनुभव का सार है. मित्र को नयी दृष्टि मिली और उनका अवसाद जाता रहा.

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