जांच समिति की बैठक में हुआ खुलासा बिलिंग एजेन्सियों का खेल
- एलएमवी-5 अनमीटर्ड किसानों की गलत बिलिंग हेतु नियामक आयोग द्वारा गठित उच्च स्तरीय 4 सदस्यीय जांच समिति की पहली बैठक नियामक आयोग में सम्पन्न।
- नियामक आयोग की जांच समिति की बैठक में हुआ खुलासा कि बिलिंग एजेन्सियों द्वारा किसानों के विद्युत बिलों को मनमाने तरीके से बनाकर जारी किये गये थे अधिक बिल।
- जांच समिति का निर्देश अविलम्ब गलत बिल कम्पनियां करें संशोधित जिनसे की गयी है अधिक वसूली उनके अधिक बिलों को आगामी बिल में किया जाये समायोजित।
- जांच समिति का फैसला 15 दिन के अन्दर पावर कार्पोरेशन आरएयू विंग पूरे प्रदेश के गलत बिलों को संकलित कर जांच समिति के सामने करे पेश।
- जांच समिति 15 नवम्बर को एचसीएल व फ्लूएण्ट ग्रिड बिलिंग एजेन्सी के दफ्तर में बिलिंग प्रक्रिया का करेगी निरीक्षण।
लखनऊ 7 नवंबर। प्रदेश के एलएमवी-5 श्रेणी के अन्तर्गत आने वाले अनमीटर्ड किसानों के टयूबवेलों पर जारी होने वाले बिजली बिलों को विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय टैरिफ से भिन्न मनमाने तरीके बिलिंग एजेन्सियों द्वारा बनाये जाने को लेकर आज उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनायी गयी उच्चस्तरीय 4 सदस्यीय जांच समिति की पहली बैठक नियामक आयोग सभागार में सम्पन्न हुई, जिसमें जांच समिति के चारों सदस्यों डा. अमित भार्गव, निदेशक टैरिफ नियामक आयोग, श्री नीरज अग्रवाल मुख्य अभियन्ता आरएयू (रेगुलेटरी अफेयर्स यूनिट) पावर कार्पोरेशन, श्री अशोक कुमार मुख्य अभियन्ता वाणिज्य मध्यांचल व प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा मौजूद रहे।
जांच समिति की बैठक शुरू होते ही मध्यांचल विद्युत वितरण निगम प्रतिनिधि द्वारा यह माना गया कि अनमीटर्ड किसानों के बिजली बिलों में गड़बड़ियां हुई थी उसी सुधारने का निर्देश दे दिया गया है। जिस पर जांच समिति ने मुख्य अभियन्ता आरएयू पावर कार्पोरेशन को यह निर्देश दिये गये कि पूरे प्रदेश में जिन भी एलएमवी-5 अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं का बिल नियामक आयोग द्वारा तय टैरिफ से भिन्न मनमाने यूनिट के आधार पर बिलिंग एजेन्सियों द्वारा बनाया गया है, उसकी पूरी सूचना 15 दिन के अन्दर जांच समिति के सामने प्रस्तुत किया जाये और साथ ही मुख्य अभियन्ता आरएयू यह भी सुनिश्चित करायें कि पूरे प्रदेश में जिन भी विद्युत उपभोक्ताओं का बिल गलत तरीके से बनाया गया है। अविलम्ब उनके बिल को सही कर दिया जाये और रिवीजन के पश्चात् जो अतिरिक्त धनराशि वसूल की गयी है उसे उपभोक्ताओं के बिल में समायोजित कर दिया जाये।
जांच समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि 15 नवम्बर को एचसीएल व फ्लूएण्ट ग्रिड बिलिंग एजेन्सी जो पूरे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के बिलिंग का काम कर रही है, जांच समिति 12 बजे उनके दफ्तर में पहुंचकर बिलिंग प्रक्रिया का निरीक्षण भी करेगी। वहीं दूसरी ओर जांच समिति ने मुख्य अभियन्ता आरएयू को यह निर्देश दिया है कि 15 दिन के अन्दर बिलिंग प्रक्रिया से सम्बन्धित सभी एग्रीमेन्ट व सेवा शर्तों की एक प्रति संकलित कर जांच समिति के सामने प्रस्तुत किया जाये और साथ ही यह भी सुनिश्चित कराया जाये कि भविष्य में कोई भी विसंगति न हो इसलिये पावर कार्पोरेशन की रेगुलेटरी अफेयर्स यूनिट बिलिंग से सम्बन्धित सभी साफ्टवेयर का परीक्षण कर लें।
जांच समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रस्ताव रखा कि आगे बिलों में कोई विसंगति उपभोक्ताओं के बिलों में न हो इसके लिये बिजली कम्पनियां व पावर कार्पोरेशन जब भी अपने बिलिंग साफ्टवेयर में कोई बदलाव करें तो उस पर पावर कार्पोरेशन की आरएयू विंग (रेगुलेटरी अफेयर्स यूनिट) से अभिमत जरूर ले।






