देश का उत्पादन क्षेत्र पूरी तरह निजी घरानों के मकड़जाल में ऐसे में भविष्य में उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध होना मुश्किल
उपभोक्ता परिषद का बड़ा खुलासा वर्तमान में पूरे देश में बिजली उत्पादन पर 43.9 प्रतिशत निजी क्षेत्र का कब्जा ऐसे में सबकों बिजली मिलेगी तो लेकिन वह होगी मॅहगी जो उपभोक्ताओं के वहन करने के योग्य नहीं
पूरे देश में निजी घराने मनमाने तरीके से अपने लाभ के लिये बनवाते है पीपीए और जब उन पर होती है कार्यवाही तो वह इसका उठा लेते है लाभ
लखनऊ 12 नवंबर। जब पूरे देश में पावर फार आल के तहत सबको 24 घंटे बिजली देने के लिये केन्द्र और राज्य सरकार पूरी तरह प्रयासरत है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सबको बिजली मिले यह अच्छी बात, लेकिन यह भी देखना जरूरी होगा कि बिजली की कीमत उपभोक्ताओं के वहन करने योग्य भी हो। जिस प्रकार से पूरे देश व राज्यों में उत्पादन के क्षेत्र में निजी घरानों का अपना साम्राज्य स्थापित होते जा रहा है, अब यह कहना गलत नहीं होगा कि देश का उत्पादन क्षेत्र का आधा निजीकरण हो गया है। ऐसे में आने वाले समय में निजी घराने मनमाने तरीके से अपनी मंहगी बिजली को न चाहकर भी प्रदेश के उपभोक्ताओं पर थोपेगें।
वर्तमान में पूरे देश में जो कुल संस्था िपत क्षमता अगस्त 2017 तक देश में है वह लगभग 3 लाख 29 हजार 226 मेेगावाट है, जिसमें पूरे देश में निजी क्षेत्र का अंश बेहद चैकाने वाला है यह कहना गलत न होगा निजी क्षेत्र का प्रतिशत प्रत्येक वर्ष बढ़ता जा रहा है। समय रहते केन्द्र व राज्य सरकार को सबकों बिजली देने के साथ उत्पादन को सार्वजनिक क्षेत्र में बढ़ावा देने पर भी विचार करना होगा। जब भी निजी घरानों के उत्पादन गृहों के कैपिटल कास्ट की सीएजी आडिट से जाॅच कराने की माॅग उठती है तो पूरे देश में निजी घराने हंगामा मचा देते है। उपभोक्ता परिषद केन्द्र व राज्य सरकारों से माॅग करती है कि सभी निजी घरानों की सी0ए0जी0 आडिट से जाॅच कराई जाय।
क्षेत्र देश में कुल मेगावाट क्षमता प्रतिशत
राज्य क्षेत्र 81652 24.8
केन्द्रीय क्षेत्र 102933 31.3
निजी क्षेत्र 144641 43.9
कुल 329226 100
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कल मा. मुख्यमंत्री महोदय श्री आदित्य नाथ योगी जी द्वारा सोनभद्र में उत्पादन इकाईयोें का दौरा करते हुये यह वक्तव्य दिया गया कि राज्य सरकार प्रदेश के उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना चाहती है निश्चित यह सराहनीय पहल है लेकिन यह तभी सम्भव है जब सार्वजनिक क्षेत्र में उत्पादन गृहों का निर्माण सरकार करायेगी।

जिस तरह से प्रदेश में निजी क्षेत्र में उत्पादन गृह चाहे वह थर्मल के क्षेत्र में हो या सोलर के क्षेत्र में उनकी दरें काफी अधिक है, उससे आने वाले समय में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध हो पाना बहुत मुश्किल है। पहले निजी घराने कुल बिजली क्षेत्र के उच्च अधिकारियों से साॅठ गाॅठ कर अपने मन मुताबिक पावर परचेज एग्रीमेन्ट(पीपीए) का मसौदा तैयार कराती हैं और जब मॅहगी बिजली के चलते उनके खिलाफ उनके अनुबन्ध को समाप्त करने की पहल होती है तो वह पी0पी0ए0 के हवाला देकर पुनः लाभ लेने की जुगत में लग जाते है, इन सभी उपभोक्ता विरोधी कार्यवाहियों पर अंकुश तभी लग सकता है जब राज्य के नियामक आयोगों की भूमिका पारदर्शी हो।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा वर्तमान में पूरे देश के उपभोक्ताओं की बिजली की अधिकतम माॅग पर गौर करें तो अक्टूबर 2017 में सभी राज्यों के उपभोक्ताओं की अधिकतम माॅग 161967 मेगावाट थी वहीं उपलब्धता 157394 मेगावाट थी। अभी भी देश में हजारों मेगावाट के पावर हाउस इसलिये बन्द पड़े है क्योंकि वह मॅहगी बिजली पैदा करते है, आने वाले समय में पूरे देश में जब सबको 24 घंटे बिजली देने का अभियान चलेगा तो यह सभी मॅहगी बिजली पैदा करने वाले निजी घरानों की लाटरी लग जायेगी और न चाहकर भी राज्यों के उपभोक्ताओं को इस मॅहगी बिजली का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।







