आचार संहित समाप्त होते ही लखनऊ में आयोजित की जायेगी आरक्षण समर्थक महारैली

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  • वीरांगना ऊदा देवी के शहीदी दिवस पर उन्हें याद करते हुए आरक्षण समर्थकों ने फिर भरी हुंकार कहा आचार संहित समाप्त होते ही लखनऊ में आयोजित की जायेगी आरक्षण समर्थक महारैली।
  • केन्द्र की मोदी सरकार से आरक्षण समर्थकों ने पुनः अपनी मांग दोहरायी कहा पदोन्नति बिल पास करके केन्द्र सरकार दलितों को दिलाये उनका संवैधानिक हक।
लखनऊ 16 नवंबर। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र संयोजक मण्डल द्वारा आज वीरांगना ऊदा देवी के शहीदी दिवस के अवसर पर उन्हें याद करते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी बहादुरी की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारे समाज के लिये गौरव की बात है कि वीरांगना ऊदा देवी हमारे समाज में जन्म लेकर जिस साहस व बहादुरी से अंग्रेजों को सबक सिखाया वह आज भी इतिहास के पन्ने में दर्ज है।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजक मण्डल ने वीरांगनी ऊदा देवी के शहीदी दिवस पर एक बार फिर हुंकार भरते हुए कहा कि आचार संहिता समाप्त होते ही पदोन्नतियों में आरक्षण को लेकर एक नई जंग की शुरूआत की जायेगी और लखनऊ में आरक्षण समर्थकों का एक बड़ा जमावड़ा करके केन्द्र सरकार पर पदोन्नति बिल पास करने का दबाव बनाया जायेगा। संघर्ष समिति हमेशा नवम्बर माह में आरक्षण समर्थकों की महारैली करती रही है। इस बार आचार संहिता लागू होने की वजह से महारैली का आयोजन नहीं हो पाया।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, डा. राम शब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, रीना रजक, लेखराम, अशोक सोनकर, बनी सिंह, पीपी सिंह, प्रेमचन्द्र, जितेन्द्र कुमार, अनीता, रेनू, राजेश पासवान, प्रभू शंकर राव, अमित कुमार, श्रीनिवास राव, अखिलेश चन्द्र गौतम व विवके कुमार ने कहा कि अब समय आ गया है सभी आरक्षण समर्थकों को एक जुट होकर केन्द्र सरकार के ऊपर एकबार फिर पदोन्नति बिल पास कराने को लेकर दबाव बनाना है और यह पुरजोर तरीके से मांग उठानी है कि लोकसभा में लम्बित पदोन्नति बिल पर पिछले 3 वर्षों से ज्यादा व्यतीत हो जाने के बाद जिस प्रकार कुठाराघात किया जा रहा है, उसे देश का दलित समाज कभी माफ करने वाला नहीं है। पूरे देश में आरक्षण को लेकर जहां अपने-अपने तरीके से तर्क गढ़े जा रहे हैं, वहीं केन्द्र की मोदी सरकार को बाबा साहब के संवैधानिक हक को समाज को वापस दिलाने के लिये पदोन्नति बिल पास करना चाहिए। अन्यथा देश का दलित समाज समय आने पर अपना हिसाब बराबर करेगा।

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