टैरिफ व ARR में निकाली गयी कमियों पर UPPCL ने अभी तक नहीं दिया कोई जवाब?

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  • उल्टे बिजली दर प्रस्ताव स्वीकार कराने के लिये बनाया जा रहा है दबाव
  • उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने नियामक आयोग सदस्य श्री एस के अग्रवाल से की मुलाकात और दर्ज कराया अपना विरोध कहा दबाव में हुयी कार्यवाही तो नहीं बैठेंगे चुप
  • उपभोता परिषद का बडा खुलासा कहा ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में 260 से 350 प्रतिशत वृद्धि के पीछे सरकार द्वारा कम सब्सिडी दिये जाने का तर्क
लखनऊ, प्रदेश के ग्रामीण विद्युत  उपभोक्तओं के बिजली दरों में पावर कार्पोरेशन द्वारा बेतहासा प्रस्तावित वृद्धि के सम्बन्ध में नियामक आयोग में सौंपे गये ARR (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) एवं बिजली दर प्रस्ताव पर अभी आयोग द्वारा निकाली गयी कमियों पर जवाब आयोग को नहीं सौंपा वहीं दूसरी ओर पावर कारपोरेशन व राज्य सरकार की तरफ से ARR व बिजली दर प्रस्ताव को स्वीकार कराने हेतु लगातार दबाव बनाया जा रहा है। जिसके विरोध में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग सदस्य श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात कर उनसे अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि हमेशा से यह चला आ रहा है कि पावर कारपोरेशन द्वारा ARR में निकाली गयी कमियों पर सही जवाब प्राप्त नहीं होता और आयोग प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है जो पूरी तरह असंवैधानिक हैं।
नियामक आयोग द्वारा 100 से ज्यादा कमियाॅं ARR में निकाली गयी थीं जिसका अभी तक आयोग में सही उत्तर प्राप्त नही हुआ वहीं दूसरी ओर ARR व बिजली दर प्रस्ताव को स्वीकार कराने हेतु दबाब बनाया जाने लगा। सबसे बडा चैंकाने वाला मामला यह है कि विगत दिनों पावर कारपोरेशन द्वारा श्रेणीवार विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में जो बेतहासा वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया अभी तक उस पर आयोग द्वारा जो कमियां निकाली गयी वह पावर कारपोरेशन को भेजी ही नही गयीं । ऐसे में नियामक आयोग को असंवैधाकि कार्यवाही करने से बचना चाहिये। अन्यथा की स्थिति में उपभोक्ता परिषद प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हित में चुप नही बैठेगा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कारपोरेशन द्वारा मंहगी दरों पर खरीदी जाने वाली बिजली के पीपीए को खारिज किये जाने के बाद ARR में संशोधन होना है और उसमें किन श्रोतों से खारिज किये गये पीपीए के एवज में पावर कारपोरेशन बिजली पुनः खरीदेगा पर भी विस्तृत जवाब तलब किया गया है। ऐसे में जब तक पावर कारपोरेशन द्वारा बिजली खरीद पर अपना संशोधित प्रस्ताव आयोग को नहीं सौंपा जाता प्रस्ताव स्वीकार करना गलत है। विगत दिनों बजाज सहित अनेकों श्रोतों से खरीदी जाने वाली मंहगी बिजली के पीपीए को पावर कारपोरेशन द्वारा समाप्त किया गया था। ऐसे में पावर कारपोरेशन को अब आयोग को बताना होगा व लिखित प्रस्ताव सौंपना होगा कि अब किन श्रोतों से सस्ती बिजली खरीदी जायेगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि बडे दुर्भाग्य की बात है कि पावर कारपोरेशन द्वारा घरेलू ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में 260 से 350 प्रतिशत वृद्धि इसलिये की गयी है कि कारपोरेशन का कहना है कि अभी तक इन दोनो श्रेणी में सरकार से केवल 5440 करोड सब्सिडी मिल रही है अगर इस कैटेगिरी में कोई भी वृद्धि न की जाये तो सरकार को अतिरिक लगभग 8590 करोड और देना होगा। इसका मतलब यह है कि पावर कारपोरेशन द्वारा अभी तक अन्य सरकारों के कार्यकाल में यह बात क्यों नही कही गयी अब योगी सरकार के कार्यकाल में अतिरिक्त सब्सिडी की बात की जा रही है? इसका मतलब यह है कि या तो सरकार के इशारे पर यह सब हो रहा है या तो उप्र सरकार की छबि धुमिल करने के लिये पावर कारपोरेशन द्वारा इस प्रकार की कार्यवाही की जा रही है जो पूरी तरह आम जनता विरोधी कार्यवाही को दर्शाता है।