चुनावी जीत के बाद ही बिजली कम्पनियों ने मंहगी दरें लागू करने का बनाया दबाव

0
385

UPPCL प्रबन्धन चुनावी शोरगुल में उसे नगर निगम चुनाव 29 नवम्बर के उपरान्त अविलम्ब जारी कराने के लिए आयोग पर दबाव बनाये हुए है


04 जनवरी, 2018 तक बिजली दर घोषित करने का आयोग के पास है समय, ऐसे में विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दर की आपत्तियों का बिना सही जवाब लिए क्यों बिजली दर दबाव में घोषित कराने की हो रही है साजिश?


लखनऊ 25 नवंबर। मल्टी ईयर टैरिफ प्रस्ताव के तहत वर्ष 2017-18 हेतु पावर कार्पोरशन व बिजली कम्पनियों द्वारा उप्र विद्युत नियामक आयोग में दाखिल बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव, जिसकी सार्वजनिक सुनवाई पूर्ण हो चुकी है और विचाराधीन है, पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन चुनावी शोरगुल में उसे अन्तिम नगर निगम चुनाव 29 नवम्बर के उपरान्त अविलम्ब जारी कराने के लिए आयोग पर दबाव बनाये हुए है।
उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री से यह माँग की है कि लोक महत्व के विषय पर हस्तक्षेप करें। बिजली दर बढ़ोत्तरी या घटोत्तरी विद्युत अधिनियम, 2003 के प्राविधानों के तहत सभी प्रदेशों में होता है, लेकिन बिजली कम्पनियों द्वारा ऐसे समय में बिजली दर घोषित कराने की कोशिश, जब चुनावी शोरगुल के पश्चात् जनता अपने नगर निगम प्रतिनिधि को जीत की बधाई दे रही होगी, उस समय यदि उसकी खुशी में व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी का ग्रहण लग जाये तो निश्चित तौर पर जनता अपने को ठगा महसूस करेगी।
कहीं इस प्रकार का दबावी प्रयास प्रदेश सरकार की छवि धूमिल करने का एक षड़यंत्र तो नहीं? गौरतलब है कि पावर कार्पोरेशन व बिजली कम्पनियों द्वारा ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 350 प्रतिशत, किसानों की दरों में 80 प्रतिशत व आम घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 12 से 15 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन उद्योग घरानों की दरों में किसी भी वृद्धि का प्रस्ताव नहीं है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने अपने बयान में कहा कि नियामक आयोग के पास विद्युत अधिनियम, 2003 के प्राविधानों के अनुसार 4 जनवरी तक बिजली दर घोषित करने का समय है, ऐसे में विद्युत नियामक आयोग को स्वतंत्र होकर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा दाखिल बिजली दर की आपत्तियों का सही जवाब पावर कार्पोरेशन से मंगाने के उपरान्त ही बिना किसी दबाव के बिजली दर घोषित करने पर सोचना चाहिए।
इससे पहले भी दीपावली के 2 दिन पहले उपभोक्ता परिषद सहित ज्यादातर विद्युत उपभोक्ताओं की आपत्तियों का गोलमोल जवाब लेकर पावर कार्पोरेशन द्वारा बिजली दर बढ़ोत्तरी की घोषणा कराने की कोशिश की गयी थी, जिस पर प्रदेश के मा0 ऊर्जा मंत्री जी के हस्तक्षेप के बाद पावर कार्पोरेशन चुप हुआ था, लेकिन एक बार फिर पावर कार्पोरेशन के उच्चाधिकारी इस जुगत में लगे हैं कि 29 नवम्बर के बाद तुरन्त बिजली दर बढ़ोत्तरी की घोषणा आयोग से करा दी जाये, और इसी बीच प्रदेश में चुनाव का रिजल्ट आ रहा होगा, उसी में बढ़ोत्तरी का मामला दब जायेगा और जनता एक बार फिर अपने आपको ठगा महसूस करेगी, जो पूरी तरह गलत है, जिससे सरकार के प्रति आम जनमानस में एक गलत संदेश भी जायेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here