- चुनावी शोरगुल में 30 नवम्बर व 1 दिसम्बर को पावर कारपोरेशन द्वारा आयोग पर दबाव डाल कर बिजली दरों में बढोत्तरी कराने पर मचा हंगामा
- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से की मुलाकात और सौंपा जनहित प्रत्यावेदन
- चुनावी शोरगुल में आचार संहिता के अन्तर्गत बिजली दर न जारी करने की उठायी मांग
- उपभोक्ता परिषद का बडा आरोप कहा ग्रामीण दरों में पावर कारपोरेशन की प्रस्तावित 350 प्रतिशत वृद्धि से हर घर बिजली देने का सपना होगा चकनाचूर जनता को लालटेन युग में ले जाने के लिये किया जा रहा है विवश
लखनऊ 28 नवंबर। मल्टी ईयर टैरिफ के तहत वर्ष 2017-18 के लिये प्रस्तावित व्यापक बिजली दर बढोत्तरी प्रस्ताव को पावर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा नगर निगम चुनाव शोरगुल में आचार संहिता लागू रहते हुए दिनांक 30 नवम्बर व 1 दिसम्बर को आयोग से बिजली दर घोषित कराने का मामला तूल पकडता जा रहा है और हंगामा मचा है। आज पूरे मामले पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात कर एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपते हुए बिना पावर कारपोरेशन के दबाव के निष्पक्ष होकर आयोग से टैरिफ निर्धारण कर उसे घोषित करने की मांग उठायी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा नियामक आयोग अध्यक्ष को यह अवगत कराया गया कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली का मुददा एक लोक महत्व का विषय है। उसे किसी षडयन्त्र के तहत चुनावी शोरगुल में दबाया जाना प्रदेश की जनता के साथ बडा विश्वासघात होगा। नियामक आयोग एक अर्धन्यायिक संस्था है उसे स्वतंत्र रूप से बिजली दर सुनवाई में उपभोक्ता परिषद व उपभोक्ताओं द्वारा दाखिल आपत्तियों पर पावर कारपोरेशन से सही जवाब लेने के उपरान्त ही नयी बिजली दर पर कोई निर्णय लेना चाहिये। अभी भी नियामक आयोग के पास 4 जनवरी 2018 तक बिजली दर को घोषित करने का समय है। उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि ग्रामीण बिजली दरों में लगभग 350 प्रतिशत की प्रस्तावित वृद्धि आम जनता केा लालटेन युग की तरफ ले जाने के लिये विवश कर रही हैं।
नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल ने उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल जनहित प्रत्यावेदन पर गंभीरता पूर्वक निष्पक्ष निर्णय किये जाने का उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को भरोसा दिया गया और यह भी कहा गया कि आयोग बिना किसी दबाव के स्वतंत्र निर्णय लेगा। चुनवा आचार संहिता पर भी आयोग गंभीर है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वास्तव में यदि बिजली कम्पनियाॅं अपने बिजली दर बढोत्तरी प्रस्ताव पर सही है तो इस लोक महत्व के विषय पर चोर दरवाजे की राजनीति क्यों कर हरी हैं? आम जनता को भ्रमित करने के लिये बिजली कम्पनियों को चुनावी शोरगुल का सहारा नही लेना चाहिये। यह बडा प्रश्न है कि प्रदेश की ग्रामीण जनता को केवल ज्यादा बिजली देने के नाम पर उसकी दरों में लगभग 350 प्रतिशत वृद्धि प्रस्ताव देना टैरिफ शाक की श्रेणी में आता है। जो अब तक के ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में कभी नही हुआ।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा जहाॅं पावर कारपोरेशन प्रबन्धन पावर फार आल के तहत हर घर को बिजली देने की बात कर रहा हे यदि पावर कारपोरेशन की चली और बिजली दरों में व्यापक वृद्धि हुयी तो नया कनेक्शन लेने की बात तो दूर गरीब जनता अपना जो बिजली का कनेक्शन लिया है वही सरेन्डर कर देगी। और लालटेन युग में जाने से उसे कोई नही रोक पायेगा।







