- आचार संहिता के बीच टैरिफ जारी करने की आयोग की कार्य प्रणाली पर उपभोक्ता परिषद ने उठाया सवाल कहा आचार संहिता के बीच टैरिफ जारी करना बडा संवैधानिक संकट, महामहिम श्री राज्यपाल जी से हस्तक्षेप की मांग
- 4 जनवरी 2018 तक आयेाग के पास टैरिफ जारी करने का समय ऐसे में नियामक आयोग जैसी अर्ध न्ययायिक संस्था क्यों उडा रहा है चुनाव आचार संहिता की धज्जियाॅं इसकी हो उच्च स्तरीय जाॅंच
लखनऊ 29 नवंबर। उप्र पावर कारपोरेशन के दबाव में कल दिनांक 30 नवम्बर को उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा आचार संहिता लागू रहते प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में व्यापक बढोत्तरी करने की तैयारी है। सबसे बडा सवाल यह उठता है कि चुनाव आचार संहिता 2 दिन बाद खत्म हो रही है। विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत आयोग के पास 4 जनवरी 2018 तक का समय है। ऐसे में क्या हड़बड़ी है जो चुनाव आचार संहिता में बिजली दर बढोत्तरी करायी जा रही है।
नियामक आयोग भली भाॅंति जानता है कि भारत चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रश्नावली में आचार संहिता की परिधि में उप्र विद्युत नियामक आयोग का स्पष्ट उल्लेख है इसके बावजूद भी एक अर्धन्यायिक संस्था द्वारा आदर्श चुनाव आचार संहिता का उलंघन करने की चेष्टा एक बहुत बडा संवैधानिक संकट है जो उप्र के इतिहास में काले अक्षर से लिखा जायेगा। नियामक आयोग और चुनाव आयोग दोनों एक संवैधानिक संस्था हैं प्रदेश में इस तरह का टकराव भविष्य में संवैधानिक संकट पैदा करने की दिशा में एक बडा कदम है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा चूॅंकि विद्युत नियामक आयोग का संवैधानिक संरक्षक महामहिम श्री राज्यपाल जी हैं। ऐसे में उपभोक्ता परिषद प्रदेश के महामहिम जी से इस संवैधानिक संकट को रोकने की मांग करता है। 2 दिन बाद चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद प्रदेश की बिजली दर यदि जारी होती तो क्या संकट खडा हो जाता? इस बार विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रदेश की ग्रामीण जनता की दरों में कई गुना बढोत्तरी की साजिश की जा रही है जो कहीं न कहीं उप्र सरकार के लिये आम जनता के साथ विश्वासघात की श्रेणी में आता है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर कारपोरेशन जिस आर्थिक संकट का रोना रोकर प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री जी को भी शीघ्र बिजली दर घोषित करने हेतु गुमराह कर रहा है अपने आप में बडा सवाल ह। 2 दिन में क्या आर्थिक संकट आ जायेगा प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री जी को भी पूरे मामले पर हस्तक्षेप करते हुए पावर कारपोरेशन प्रबन्धन के खिलाफ कठोर कदम उठाना चाहिये।
प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री जो इस समय गुजरात चुनावी दौरे पर हैं ऐसे में जल्दबाजी में टैरिफ जारी कराने के पीछे प्रदेश के कुछ बडे नौकरशाहों का बडा षडयन्त्र है जिससे उप्र सरकार की छबि धुमिल होना स्वाभाविक है। मा. मुख्यमंत्री जी को ऐसे नौकरशाहों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहियैं







