महंगी बिजली के खिलाफ विधिक लड़ाई के साथ सड़क पर भी होगा प्रदर्शन: उपभोक्ता परिषद

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विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 67 से 150% की बढोत्तरी हुयी


  • उपभोक्ता परिषद का ऐलान प्रथम चरण में कल यानि 1 दिसम्बर को 12ः00 बजे आयोग में दाखिल की जायेगी बिजली दर बढोत्तरी पर पुनर्विचार याचिका इसके बाद राजनैतिक विपक्षी पार्टियों से भी मांगेगे विद्यान सभा में लडाई हेतु सहयोग
  • नियामक आयोग अध्यक्ष का असंवैधानिक कृत्य, उन्होने चुनाव आयोग को अनुमति वाले पत्र में लिखा पावर कारपोरेशन के कहने पर आयेाग जारी कर रहा है आज दर, जो विद्युत अधिनियम 2003 का खुला उलंघन।

लखनऊ 30 नवंबर। पावर कारपोरेशन व सरकार के दबाव में आज उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 67 से 150 प्रतिशत की बढोत्तरी कर दी गयी है। गाॅंव का उपभोक्ता यदि मीटर्ड होता था तो पहले उसे रू0 2.20 प्रति यूनिट स्लैब के तहत अदा करना होता था अब गाॅंव के उपभोक्ताओं में भी 5 स्लैब बना दिया गया है और अधिकतम स्लैब वाले को रू0 5.50 प्रति यूनिट देना पडेगा अर्थात लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि। जहाॅं पहले गाॅंव का उपभोक्ता 1 किलोवाट का विद्युत उपभोक्ता रू0 180 प्रति किलोवाट प्रति माह देता था अब उसे रू0 300 प्रति किलोवाट प्रति माह और अप्रैल 2018 के बाद रू0 400 प्रति किलोवाट प्रति माह देना पडेगा जो अपने आप में निन्दनीय है।
शहरी लाइफ लाइन उपभोक्ता पहले 1 किलोवाट 150 यूनिट पर रू0 540 देता था अब यदि वह 1 किलोवाट पर 150 यूनिट खर्च करेगा तो उसे रू0 835 देना पडेगा अर्थात उसकी दरों में भी लगभग 65 प्रतिशत की वृद्धि। क्योंकि लाइफ लाइन उपभोक्ताओं का स्लैब 100 यूनिट पर सीमित कर दिया गया है। उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा जहाॅं उद्योगों की बिजली दरों में कोई बढोत्तरी नही की गयी है वहीं वाणिज्यक विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 17 प्रतिशत अनमीटर्ड वाणिज्यक उपभेाक्ताओं की दरों में लगभग 70 प्रतिशत टम्पोरेरी सप्लाई लगभग 36 प्रतिशत सहित अन्य उपभोक्ताओं की दरों में भी व्यापक बढोत्तरी की गयी है। शहरी घरेलू विद्युत उपभेाक्ताओं की दरों में लगभग 12 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए फिक्सड चार्ज 90 रू0 प्रति किलोवाट को 100 रू0 प्रति किलोवाट किया जाना पूरी तरह गलत है जिसका हर स्तर पर विरोध किया जायेगा। भाजपा सरकार ने ग्रामीण व किसानों की दरों में बढोत्तरी कराकर यह साबित कर दिया कि भाजपा किसान व ग्रामीण विरोधी है। पूरे मामले पर उपभेाक्ता परिषद अध्यक्ष ने नियामक आयोग अध्यक्ष से मिलकर अपना विरोध जता दिया है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा नयी बिजली दर पर उपभोक्ता परिषद आज पूरा अध्ययन कर लेगा कल 1 दिसम्बर 2017 को 12ः00 बजे नियामक आयोग में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी जायेगी। उप्र विद्युत नियामक आयेाग द्वारा इतिहास में पहली बार नियामक आयेाग जैसी अर्धन्यायिक स्वतंत्र संस्था का अपमान किया गया है। नियामक आयोग अध्यक्ष की तरफ से कल निर्वाचन आयेाग को जो पत्र लिखा गया था उसमें यह कहा गया है कि आज यानि 30 नवम्बर 2017 को पावर कारपोरेशन के अनुरोध पर बिजली दर जारी की जा रही है। आयेाग के अध्यक्ष को इस बात का ज्ञान होना चाहिये कि विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत आयेाग को अधिकतम 120 दिन में टैरिफ जारी करना होता है ऐसे में उनका पत्र यह दर्शाता है कि नियामक आयेाग पावर कारपोरेशन के अधीन काम कर रहा है।
पहली बार ऐसा हुआ है कि वर्ष 2017-18 की टैरिफ दर की सुनवाई हुयी ऐसे में 1 साल का बिजली दर घोषित हो रहा है लेकिन ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में यह लिखना कि 1 अप्रैल 2018 के बाद उसे रू0 300 की जगह रू0 400 प्रति किलोवाट देना पडेगा यह पूरी तरह असंवैधानिक है। वर्ष 2018-19 का टैरिफ किस आधार पर आयोग ने तय कर दिया। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा उपभोक्ता परिषद विद्यान सभा में इस मुददे की लडाई को और मजबूत करने के लिये विपक्षी राजनैतिक पार्टियों से भी मांगेगा सहयोग।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा नियामक आयेाग द्वारा पहली बार ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में बिजली कम्पनियों को रिटर्न आफ इक्यूटी यानि कि फायदा के मद में रू0 1527 करोड अनुमोदित किया गया है जो उपभेाक्ताओं के टैरिफ पर अतिरिक्त भार है। यानि कि 80 हजार करोड के घाटे में चल रही बिजली कम्पनियांे को फायदा जो अपने आप में पूरी तरह गलत है। आज तक बिजली कम्पनियों ने किसी भी उपभोक्ता को स्टैण्डर्ड आफ परफारमेन्स के तहत कोई मुआवजा नही दिया गया है। ऐसे में यह फायदा इस सरकार मंे पहली बार आयेाग द्वारा क्यों दिया गया।
 उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा उपभोक्ता परिषद जहाॅं विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत विधिक प्रक्रिया के तहत पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा वहीं दूसरी ओर कल प्रदेश के किसान यूनियन, ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं से विचार विमर्श कर सडक पर भी अपना विरोध प्रदर्शन करेगा। आयेाग के इस असंवैधानिक प्रक्रिया का हर स्तर पर विरोध हेागा।

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