मंहगी बिजली के विरुद्ध उपभोक्ता परिषद ने दाखिल किया लोकमहत्व पुनर्विचार याचिका

0
709
  • ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं व किसानों सहित आम जनता की दरों में व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव पर उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में दाखिल किया लोकमहत्व विषयक पुनर्विचार याचिका
  • नियामक आयोग अध्यक्ष ने उपभोक्ता परिषद की याचिका पर आयोग निदेशक टैरिफ दिया को परीक्षण करने का दिया आदेश और बिन्दुवार आख्या आयोग के सामने प्रस्तुत करने का निर्देश
  • उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सामने रखे अनेकों विधिक साक्ष्य बिजली दर बढ़ोत्तरी पर उठाये सवाल पूरी प्रक्रिया को बताया असंवैधानिक और पुनर्विचार करने की उठाई मांग
  • उपभोक्ता परिषद ने माननीय मुख्य मंत्री जी से भी पूरे मामले की हस्ताक्षेप की उठाई मांग
  • उपभोक्ता परिषद पूरे प्रदेश में किसान नेताओं ग्रामीण उपभोक्ता से सम्पर्क में जल्द ही शुरू होगा प्रदेश में व्यापक आनदोलन
लखनऊ 01 दिसम्बर। उप्र पावर कार्पोरेशन के दबाव में उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा कल अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 67 से 150 प्रतिशत की वृद्धि किसानों की दरों में 50 प्रतिशत वृद्धि व आम घरेलू उपभोक्तओं की दरों में 12 से 15 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में जहां पूरे प्रदेश में किसान व आम जनमानस आनदोलित है आज पूरे प्रदेश जिसको लेकर अनेकों जगह प्रदर्शन भी हुये। यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि ग्रामीण व किसान दोनो एक ही परिवार है और उनकी कृषि क्षेत्र व घर की बिजली मंहगी कर उन पर दोहरी मार डाली गयी है जिस पर उपभोक्ता परिषद प्रदेश के मुख्य मंत्री से हस्तक्षेप करते हुये बढ़ोत्तरी वापस कराने की मांग की है।
वही दूसरी ओर बिजली दर याचिका में मुख्य आपत्तिकर्ता उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज उप्र विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल से मिलकर आयोग के सामने बिजली दर बढ़ोत्तरी पर विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 94 (एफ) के तहत एक पुनर्विचार प्रत्यावेदन सम्बन्धी लोकमहत्व विषयक याचिका दाखिल करते हुये अभिलम्ब ग्रामीण व किसानों की दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी को वापस लेने की मांग उठाई। उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सामने अनेकों साक्ष्य रखते हुये अभिलम्ब आयोग से पूरी बिजली दर प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग की ।
उपभोक्ता परिषद ने आयोग के समाने यह विधिक तथ्य व अनेकों नजीर पेश की कि मल्टी ईयर टैरिफ के तहत केवल वर्ष 2017-18 का टैरिफ प्रस्ताव पर प्रदेश में सुनवाई हुई ऐसे में आयोग द्वारा असंवैधानिक तरीके से किस प्रकार ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में एक अप्रैल 2018 के बाद रू0 400 प्रति किलो वाट आदेश निर्गत किया गया यह वर्ष 2018-19 टैरिफ प्रस्ताव से सम्बन्धित था। वणिज्यिक विद्युत उपभोक्ताओं के मिनिमम गारेन्टी जार्च को समाप्त करने का भी मुद्दा उठाया गया।
नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल ने उपभोक्ता परिषद की पुनर्विचार प्रत्यावेदन सम्बन्धी लोकमहत्व विषयक याचिका पर पुनर्विचार का आश्वासन देते हुये निदेशक (टैरिफ) नियामक आयोग को पूरे मामले पर परीक्षण करने का लिखित आदेश पारित करते हुये बिन्दु वार आख्या आयोग के सामने रखने का आदेश दिया है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने अपने पुनर्विचार प्रत्यावेदन वाली याचिका में यह मुद्दा उठाया कि विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों तहत जब तक उपभोक्ताओं द्वारा उठाई गयी सभी आपत्तियों का जवाब आयोग को न प्राप्त हो जाय टैरिफ का निर्धारण नहीं हो सकता 13 नवम्बर को आयोग ने बिजली दर सुनवाई में  उपभोक्ताओं द्वारा उठाई गयी एक गम्भीर शिकायत पर एक चार सदस्यी कमेटी बनायी गयी थी बिजली कम्पनियों के उदासीनता के चलते अभी तक मामला लम्बित है ऐसे में दरें तय करना गलत था। उपभोक्ता परिषद द्वारा अपने अन्य मुद्दों में लाईफ लाइन विद्युत उपभोक्ताओं की स्लैब को कम करने, का मुद्दा उठाते हुये कहा पहले गरीब शहरी उपभोक्ता 1 किलो 150 यूनिट पर रू0 540 देता था अब उसे 150 यूनिट खर्च करने पर रू0 835 देना पड़ेगा जो गलत है। घरेलू शहरी विद्युत उपभोक्ता के फिक्स चार्ज का समाप्त करने सहित रेगूलेटरी सरचार्ज  4.28 को भी समाप्त करने का मुद्दा उठाया।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा आगे यह भी मुद्दा उठाया गया कि पीएफसी रेटिंग सी0ग्रेड बिजली कम्पनियां जिन्होंने कभी भी स्टैण्डर आफ परफार्मेन्श के तहत उपभोक्ताओं को मानक के अन्तर्गत सेवा न देने के लिये आज तक कोई मुवाअजा नहीं दिया ऐसे में रिर्टन आफ इक्यूटी के तहत रू0 1527 करोड़ का फायदा देकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालने को असैवांधानिक करार दिया गया। उपभोक्ता परिषद द्वारा बिजली कम्पनियों के कुल ग्रास ओएण्डएम खर्च 6825 करोड़ को अधिक बताते हुये उसमें भी लगभग 1000 करोड़ की कटौती कर उसका लाभ घरेलू ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को देने की शिफारिश की।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने अपने लोकमहत्व विषयक याचिका में यह भी मुद्दा उठाया कि विद्युत नियमाक आयोग जो एक अर्द्धन्यायिक संस्था है उसके द्वारा राज्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे गये पत्र में पावर कार्पोरेशन के अनुरोध पर 30 नवम्बर, 2017 को टैरिफ जारी करने का जिक्र किया गया जो यह सिद्ध करता है कि पावर कार्पोरेशन के दबाव में आयोग काम कर रहा है जो पूरी तरह टैरिफ प्रक्रिया की पार्दशिता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। उपभोक्ता परिषद पूरे मामले पर आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिये आज किसान नेता श्री राकेश टिकैत सहित अनेकों व्यापारी नेताओं व ग्रामीण उपभोक्ताओं के हित में काम करने वाले नेताओं से बात की है जल्द ही व्यापक आनदोलन प्रदेश में चलेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here