मंहगी बिजली पर आन्दोलन हुआ तेज, ग्रामीण दुकानदार भी हुए आक्रोशित

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उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने नियामक आयोग पर बोला हमला कहा रेगूलेटरी सरचार्ज के मामले में नियामक आयोग ने नहीं लिया पारदर्शी निर्णय पहले जब उपभोक्ता कम थे तब से लग रहा 4.28 प्रतिशत रेगूलेटरी सरचार्ज अब संख्या लाखों में बढ़ने के बाद भी 4.28 प्रतिशत रेगूलेटरी सरचार्ज कैसे?

लखनऊ 04 दिसम्बर। जहां पूरे उप्र में पावर कार्पोरेशन के दबाव में नियामक आयोग द्वारा ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 67 से 150 प्रतिशत व किसानों की दरों में लगभग 50 प्रतिशत बढ़ोत्तरी के खिलाफ किसान आन्दोलित है वहीं उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आज किसानों व ग्रामीणों की वृद्धि के मुद्दे पर किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री राकेश टिकैत से बात की तो उन्होंने कहा कि कल 05 दिसम्बर को पूरे प्रदेश के हर जिले में धरना प्रदर्शन हो रहा है। वहीं अब ग्रामीण क्षेत्र का अनमीटर्ड दुकानदार भी गुस्से में है क्योकि उसकी दरों में 600 रू. प्रतिकिलो वाट प्रतिमाह को रू. 1000 प्रतिकिलो वाट प्रतिमाह किये जाने से लगभग 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बार जहां पावर कार्पोरेशन के निशाने पर छोटे ग्रामीण उपभोक्ता किसान व दुकानदार रहे और उद्योगपतियों को राहत दी गयी उससे पूरे प्रदेश में आमजनमाश में गुस्सा व्याप्त होना स्वाभाविक है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने जहां देश के समाजिक नेताओं व किसान नेताओं से सम्पर्क साधा है वहीं आज उप्र में किसानों की दरों में व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी पर वरिष्ठ समाजसेवी सुश्री मेधा पाटेकर से भी लम्बी बात की है उन्होंने भी पूरा मामला उपभोक्ता परिषद से मांगा है और किसानों की बिजली दर बढ़ोत्तरी को गलत बताया है। उपभोक्ता परिषद ने मुख्य मंत्री से एक बार फिर बिजली दर बढ़ोत्तरी को वापस लेने की मांग दोहराई।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने एक बार फिर नियामक आयोग पर करारा हमला बोलते हुये कहा कि नियामक आयोग ने उपभोक्तओं पर लगने वाले रेगूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत पर पारदर्शी निर्णय नहीं किया जो नियामक आयोग की संवैधानिक परिपाटी पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। जब यह रेगूलेटरी सरचार्ज प्रदेश के उपभोक्तओं पर लागू हुआ उस समय उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 1 करोड़ 78 लाख थी और अब लगभग 2 करोड़ 11 लाख है जो 31 मार्च, 2019 तक 3 करोड़ 21 लाख हो जायेगी ऐसे में रेगूलेटरी सरचार्ज 4.28 स्वतः कम हो जाना चाहिए था क्योंकि पहले उसकी भरपाई जिन उपभोक्ताओं से होती थी उनकी संख्या कम थी और अब संख्या लगातार बढ़ रही है ऐसे में रेगूलेटरी सरचार्ज मे कमी क्यों नहीं की गयी बिजली बढ़ोत्तरी के बाद भी रेगूलेटरी सरचार्ज ज्यादा वसूला जाता है इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। नियमानुसार उदय आने के बाद घाटे की भरपाई सरकार ने कर ली तो पिछले बकाये पर लग रहे इस रेगूलेटरी सरचार्ज को आयोग ने क्यों नहीं खत्म किया।

अध्यक्ष ने कहा इस बार टैरिफ आदेश के साथ वर्ष 2014-15 का ट्रू-अप भी फाइनल हुआ जिसमें लगभग 1142 करोड़ सरप्लस है ऐसे में इसको पुराने रेगूलेटरी सरचार्ज में शामिल कर घाल मेल किया जाना पूरी तरह गलत है। जिस प्रकार से पहले उपभोक्ता 2 रेगूलेटरी सरचार्ज दे चुके हैं उसी प्रकार रू0 1142 करोड़ का रेगूलेटरी लाभ वर्ष 2017-18 की टैरिफ आदेश में लागू किया जाना चाहिए था जो लगभग 4 प्रतिशत के करीब होता।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि सबसे बड़ा चैकाने वाला मामला यह है कि नियामक आयोग लगातार पावर कार्पोरेशन से अब तक रेगूलेटरी सरचार्ज की कितनी रकम वसूल की गयी कि सूचना मांग रहा है लेकिन पावर कार्पोरेशन सही सूचना नहीं दे रहा है। एक पावर कार्पोरेशन ने आयोग को कहा कि लगभग रू0 2351 करोड़ की रेगूलेटरी सरचार्ज की वसूली हो चुकी है। फिर कुछ दिन बाद कहा कि नहीं केवल रू0 1570 करोड़ की वसूली हुई है पावर कार्पोरेशन रेगूलेटरी सरचार्ज के मामले में घालमेल कर प्रदेश की आम जनता को गुमराह कर रहा है और नियामक आयोग द्वारा उसे पूरी छूट दे रखी है। जो पूरी तरह गलत है।

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