अब ग्रामीण फीडर को शहरी फीडर घोषित कर और बढ़ेगें बिजली के दाम !

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  • बिजली दर बढोत्तरी से जहाॅं ग्रामीण व किसान बेहाल व आन्दोलित, बिजली कम्पनियों ने शुरू किया नया कारनामा ज्यादा विद्युत आपूर्ति के नाम पर अब ग्रामीण फीडर को शहरी फीडर घोषित कर उनकी दरों में भविष्य में और इजाफा कराने की तैयारी
  • लखनऊ राजधानी से हुयी शुरूआत 9 ग्रामीण शेडयूल को 2004 से घोषित कर दिया शहरी फीडर
  • ग्रामीण फीडर शहरी घोषित होते ही उसकी दरें भी हो जायेंगी शहरी सरकार चुप क्यों?
  • विद्युत वितरण संहिता 2005 के अनुसार ग्रामीण व शहर का स्टैण्डर्ड आफ परफारमेन्स के तहत सेवा मानक अलग ऐसेे में 2-4 घण्टे सप्लाई बढाकर किस आधार पर गाॅंव को बनाया जा रहा शहरी
  • बिजली कम्पनियाॅं क्या यह भूल गयीं कि पहले उन्हें शहर की पूरी सुविधा ग्रामीण को उपलब्ध कराने के बाद इस तरह की कार्यवाही पर करना था विचार
  • उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से लगायी गुहार कहा सरकार चुप्पी तोड़े वरना ग्रामीण व किसान हो जायेगा तबाह
लखनऊ 06 दिसम्बर। प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं व पावर कारपोरेशन राजस्व बढाने के लिये जो असंवैधानिक काम कर रहा है उससे पूरे प्रदेश की जनता में सरकार के खिलाफ लगातार गुस्सा भडक रहा है। सबसे बडे दुर्भाग्य की बात यह है कि उ0 प्र0 सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है। विगत एक सप्ताह पहले मनमाने तरीके से पावर कारपोरेशन ने नियामक आयोग से प्रदेश के अनमीटर्ड ग्रामीण किसानों व ग्रामीण अनमीटर्ड दुकानदारों की दरों में 67 से 150 प्रतिशत की वृद्धि करायी गयी और इस बात का प्रचार किया गया कि अब शहर की भाॅंति गाॅंव को भी बिजली मिल रही है इसलिये उनकी दरें बढायी गयी है।
पावर कारपोरेशन /बिजली कम्पनियों का मन इससे भी नही भरा तो आजकल बिजली कम्पनियाॅं मनमाने तरीके से अधिक विद्युत आपूर्ति के नाम पर ग्रामीण शेडयूल के फीडरों को अब शहरी पोषक की श्रेणी में घोषित कर रही है। उदाहरण स्वरूप राजधानी लखनऊ के 9 उपकेन्द्रों को मध्याॅंचल कम्पनी द्वारा 4 जनवरी 2004 से ग्रामीण शेडयूल से अधिक आपूर्ति के नाम पर शहरी पोषक घोषित कर दिया गया। निश्चित तौर पर आने वाले समय में जो दरें  बढी हैं और लागू होने वाली हैं अब उससे भी ज्यादा बढोत्तरी शहरी पोषक घोषित होते ही शुरू हो जायेगी। मतलब यह कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की जेब पर पावर कारपोरेशन चारों तरफ से डाका डालने पर आमादा है। इस मंहगाई के दौर में प्रदेश का गरीब ग्रामीण किसान कहाॅ जाये उसको क्या पता था कि इस सरकार में उसका उत्पीडन पावर कारपोरशन द्वारा हर स्तर पर किया जायेगा और सरकार चुपचाप तमाशा देखेगी। उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री महोदय से पुनः यह मांग दोहरायी है कि मुख्यमंत्री जी पावर कारपोरेशन की तानाशाही कार्यवाही से ग्रामीण किसान व आम जनता को राहत दिलाये।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार की चुप्पी के चलते ग्रामीण व किसानों पर आफत आ गयी है। अभी बिजली दर बढोत्तरी की मार से जनता परेशान थी अब एक नयी परिपाटी शुरू हो गयी है कि ग्रामीण शेडयूल से अधिक विद्युत आपूर्ति के दुष्टिगत शहरी पोषक घोषित किये जायें यानि कि ज्यादा विद्युत आपूर्ति के नाम पर शहरी फीडर घोषित करके आने वाले समय में उनकी दरों में व्यापक बढोत्तरी होगी क्योंकि अभी भी ग्रामीण शेडयूल की दरें शहरी शेडयूल की दरों से कम हैं। ग्रामीण फीडर शहरी फीडर घोषित होते ही उसकी दरों में और भी बढोत्तरी हो जायेगी। जब कि विद्युत वितरण संहिता 2005 के स्टैण्डर्ड आफ परफारमेन्स के प्राविधानों में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रे के सेवा मानक अलग अलग हैं चाहे वह ट्रांसफार्मर बदलने का मामला हो, केबिल फाल्ट का मामला हो, ब्रेकडाउन का मामला है इत्यादि फिर केवल 2-4घण्टे ज्यादा सप्लाई देकर उसे शहरी फीडर घोषित करने की जो साजिश चल रही है उससे प्रदेश के उपभोक्ताओं का बडा नुकसान हो रहा है।
पावर कारपोरेशन शायद यह भूल गया कि आज भी ग्रामीण क्षेत्र में ट्रांसफार्मर जल जाने पर उपभोक्ता चन्दा लगाकर उसे स्टोर से लाकर बदलवाते हैं। दसियों किलो मीटर चल कर बिजली का बिल जमा करने जाते हैं , ब्रेक डाउन हो जाने पर 2-2 दिन बिजली नही आती। और बिजली कम्पनियाॅं अपने आफिस में बैठकर एक कार्यालय ज्ञाप कर उसे शहरी का दर्जा देने पर तुली हैं। इस प्रकार की कार्यवाही अंग्रेजी हुकूमत की याद दिला रहा है। सही मायने में बिजली कम्पनियाॅं पारदर्शी हैं तो वह गाॅंव के उपभोक्ताओं को शहरी वाली पूरी सुविधा पहले उपलब्ध करायें फिर इस तरह का कुचक्र करने की साजिश करें। मा0 अपटेल आदेशानुसार कोई भी व्यवस्था पीछे से लागू करना कानून गलत है।

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