- कल से जहाँ प्रदेश के विद्युत उपभोक्ता की दरों में हो जायेगी बढ़ोत्तरी वहीं आज पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन मध्य प्रदेश में कर रहा है थर्ड पार्टी आधा निजीकरण प्रक्रिया का अध्ययन
- उभोक्ता परिषद ने कहा सरकार चुप आयोग अध्यक्ष विदेश में कार्पोरेशन प्रबन्धन निजीकरण की तलाश में मध्य प्रदेश में और प्रदेश का उपभोक्ता बेहाल अपने प्रदेश में
- पूरे प्रदेश में किसान ग्रामीण, दुकानदार आन्दोलित और सरकार की चुप्पी से लगातार बढ़ रहा आन्दोलन
- बिजली दरों में बढ़ोत्तरी के तुरन्त बाद निजीकरण प्रक्रिया पर अध्ययन बडी साजिश
लखनऊ 08 दिसम्बर। सरकार की लगातार चुप्पी के बाद अन्ततः उप्र पावर कार्पोरेशन के दबाव में नियामक आयोग द्वारा बढ़ाई गयी बिजली दर कल 09 दिसम्बर, 2017 से सभी बिजली कम्पनियों के उपभोक्ताओं पर लागू हो जायेगी। यह दुर्भाग्य की बात है कि बिजली दर बढ़ोत्तरी के तुरन्त बाद उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल पुर्नविचार याचिका पर केवल कार्यवाही इसलिये नहीं हो पायी क्योंकि नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल टैरिफ जारी कर दूसरे ही दिन विदेश चले गये। और कल जब उनका हवाई जहाज भारत में उतरेगा तो प्रदेश के ग्रामीण व किसानों पर 67 से लगभग 150 प्रतिशत बढ़ी बिजली दर लागू हो चुकी होगी। निश्चित तौर पर इसके पीछे पावर कार्पोरेशन का दबाव रहा है जो ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जायेगा।
जहाँ कल से उप्र में बिजली दरें बढ़कर लागू होंगी वहीं आज एक दिन पहले पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन भोपाल में आधा निजीकरण थर्ड पार्टी प्रक्रिया का अध्ययन करने में जुटा है वहीं बिजली कम्पनियों के कार्मिक नेता जो निजीकरण की खुलकर खिलाफत करते हैं उन्हें पता भी नहीं है कि निजीकरण नक्शा प्रदेश के बाहर तैयार होना शुरू हो गया है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जिस प्रकार से बिजली दर में व्यापक बढ़ोत्तरी करायी गयी है उसके पीछे निजी घरानों का बड़ा हाँथ है जिस प्रकार से टोरेन्ट पावर उपभोक्ताओं से लम्बा फायदा कमाकर अपनी जेब भर रहा है उसी तरह निश्चित तौर पर भविष्य में पावर कार्पोरेशन अन्य निजी घरानों को भी ऊर्जा सेक्टर में प्रवेश करायेगा। उपभोक्ता परिषद के सज्ञान में आया है कि पूरा कार्पोरेशन प्रबन्धन व बिजली कम्पनियों के उच्चाधिकारी आज मध्य प्रदेश भोपाल में थर्ड पार्टी मेनेजमेन्ट आपरेशन सिस्टम का अध्ययन करने गया है जिसके तहत कुछ निजी घराने जो बिलिंग व कलेक्शन का काम मध्य प्रदेश में थर्ड पार्टी के रूप में कर रही है, और मेन्टीनेन्स का काम मध्य प्रदेश बिजली निगम के पास है, यह मेनेजमेन्ट आपरेशन (एमओ माडल) एक तरह से आधा निजीकरण है इस माडल में केवल मेन्टीनेन्स का पार्ट बिजली कम्पनियों के पास रहता है। बिजली दर वृद्धि के तुरन्त बाद इस दिशा में काम किया जाना यह सिद्ध करता है कि भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र निजीकरण की तरफ बढ़ेगा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पूरे प्रदेश में ग्रामीण किसान दुकानदार घरेलू उपभोक्ता सभी आन्दोलित हैं और उप्र सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है। यह कितने दुर्भाग्य की बात है प्रदेश के विभिन्न श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं की जो बिजली दर बढ़ी है उससे वर्ष 2017-18 यानि की इस वित्तीय वर्ष के बचे 04 माह में बिजलीकम्पनियां प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं से कुल अतिरिक्त 2112 करोड़ राजस्व वसूलेगें जिसमें से केवल घरेलू व किसानों से ही 1335 करोड़ वसूला जायेगा यानि की कुल अतिरिक्त राजस्व का लगभग 63 प्रतिशत वसूली केवल घरेलू व कृषि क्षेत्र के विद्युत उपभोगताओं से की जायेगी वहीं दूसरी ओर प्रदेश के उद्योगों पर कोई भी भार नहीं डाला गया है। यह पहली ऐसी सरकार है जिसके कार्यकाल में सबसे ज्यादा ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में बढ़ोत्तरी करायी गयी।







