- उपभोक्ता परिषद ने बिजली दर बढोत्तरी पर किया बडा खुलासा बिजली कम्पनियों ने अपनी अक्षम्ता को छिपाने के लिये ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में कराया व्यापक बढ़ौत्तरी।
- पावर कारपोरेशन द्वारा करायी गयी बेंच मार्क स्टडी मेें देश के 33 सरकारी बिजली कम्पनियों में केस्को को छोडकर सभी बिजली कम्पनियाॅं फिसडडी आखिरी पायेदान पर
- उपभोक्ता परिषद का बडा आरोप, जब तय हो गया कि देश में प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं फिसडडी तो कम्पनियों की अक्षमता का खामियाजा प्रदेश की जनता पर क्यों?
- उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री जी से उठायी मांग बिजली दर वृद्धि वापस लेकर बिजली कम्पनियों के प्रबन्धन के खिलाफ सरकार करे कठोर कार्यवाही
लखनऊ 12 दिसम्बर। मल्टीईयर टैरिफ के अन्तर्गत वर्ष 2017-18 के लिये जारी ग्रामीणों व किसानों की दरों में लगभग 67 से 150 प्रतिशत वृद्धि को लेकर जहाॅं पूरे प्रदेश में आन्दोलन जारी है वहीं उपभोक्ता परिषद आज जो खुलासा करने जा रहा है वह खुद बिजली कम्पनियों की पोल खोल देगा कि वह कितनी सक्षम व अक्षम हैं। उप्र विद्युत नियामक आयोग के निर्देश पर टैरिफ नियमावली के अन्तर्गत पावर कारपोरेशन द्वारा करायी गयी बंेच मार्क स्टडी में प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं सबसे ज्यादा फिसडडी साबित हुयी हैं। इस स्टडी में सभी पैरामीटर चाहे वह औसत बिजली खरीद की दर हो या एटीसी लास हो या ओएनडम हो या गैप हो या कलेक्शन एफीसेन्सी हो सभी वित्तीय मानक पर एक रैंकिंग सेट की गयी है। अभी तक प्रदेश की जनता बिजली कम्पनियों की अक्षमता का खामियाजा भुगतने की बात कहती थीं तब पावर कारपोरेशन बडी बडी बातें करता था अब स्वतः पावर कारपोरेशन द्वारा करायी गयी स्टडी में वह फेल साबित हो गया। ऐसे मे किस प्रकार से विद्युत नियामक आयोग द्वारा एक तरफा निर्णय लेते हुए बिजली कम्पनियों को रिटनर््ा आफ इक्यूटी के अन्तर्गत लगभग 1527 करोड का लाभ देकर प्रदेश की जनता पर बडा बोझ डाला।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कारपोरेशन द्वारा मल्टी ईयर टैरिफ के लिये करायी गयी बेंच मार्क स्टडी में देश की 33 सरकारी बिजली कम्पनियों में उप्र का हाल स्वतः बिजली कम्पनियों के दावे की पोल खोल रहा है जो सबसे फिसडडी है।
राज्य देश की 33 बिजली कम्पनियों की क्षमता पर रैंकिंग
आन्ध्र प्रदेश (2 डिस्काम) 5 एवं 12
बिहार (2 डिस्काम) 26 एवं 30
गुजरात (4 डिस्काम) 1, 2, 3 एवं 4
हरियाणा (2 डिस्काम) 19 एवं 21
मध्यप्रदेश (3 डिस्काम) 17, 22 एवं 28
महाराष्ट्र (1 डिस्काम) 13
पंजाब (1 डिस्काम) 11
राजस्थान (3 डिस्काम) 7, 9 एवं 15
तेलंगाना (2 डिस्काम) 10 एवं 16
उत्तर प्रदेश (5 डिस्काम) दक्षिणांचल 32, मध्याॅंचल 33, पूर्वांचल 29, पश्चिमाॅंचल 23, केस्को 6
छत्तीसगढ (1 डिस्काम) 20
वेस्ट बंगाल (1 डिस्काम) 27
झारखण्ड (1 डिस्काम) 31
कर्नाटका (5 डिस्काम) 8, 14, 18, 24 एवं 25
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जहाॅं बिजली कम्पनियाॅं सुधार के बडे बडे दावे करती हैं जब वह अपनी ही स्टडी मे फेल साबित हो रही हैं तो इसका मतलब यह सिद्ध हो गया कि बिजली कम्पनियों का प्रबन्धन अक्षमता के लिये जिम्मेदार है। ऐसे में बिजली दर बढोत्तरी का खामियाजा प्रदेश की जनता क्यो भुगते? अभी भी समय है प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री महोदय को बिजली कम्पनियों के प्रबन्धन के खिलाफ सख्त कदम उठाकर बिजली दर बढोत्तरी को वापस लेना चाहिये।







