भाजपा की जनविरोधी नीतियों का सपा ने किया जमकर विरोध

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लखनऊ 14 दिसम्बर। उत्तर प्रदेश विधानमण्डल के शीतकालीन सत्र के पहले दिन आज समाजवादी पार्टी के विधायकों ने विधान सभा और विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल भाजपा की जनविरोधी नीतियों का विरोध किया। दोनों सदनों में समाजवादी विधायकों ने भाजपा सरकार पर विपक्ष को उत्पीड़ित करने, अपराध की घटनाओं में अंधाधुंध वृद्धि, कानून व्यवस्था की बदतर हालत, विद्युत दरों में भारी वृद्धि के साथ किसानों, नौजवानों और गरीबों के हित की समाजवादी सरकार की योजनाओं को बंद कर देने के खिलाफ आवाज उठाई।

समाजवादी पार्टी के विधायकों ने भाजपा सरकार पर सत्ता का दुरूपयोग करने, चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त करने, सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के नाम पर घोटाला करने का भी आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी ने भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तावित यूपीकोका जैसे जनविरोधी कानून को विपक्षियों और जनता को प्रताड़ित करने वाला करार देते हुए उसे तत्काल वापस लिए जाने की मांग की।

1- उत्तर प्रदेश मेें भाजपा सरकार को बने 9 महीने हो चुके है। इस अवधि में जनहित में कोई नया काम नहीं हुआ है। समाजवादी सरकार के समय की कई जनोपयोगी योजनाएं बंद हो गई हैं। नोटबंदी, जीएसटी और मंहगाई से परेशान जनता बदहाल और परेशान है। कोई दिन ऐसा नही जाता है जबकि महिलाओं और बच्चियों तक से दुष्कर्म की घटनाएं नही होती हों, लूटपाट, अपहरण, डकैती और हत्या की वारदातों में बढ़़ोत्तरी है। व्यापारियों के साथ लूट और हत्या की कई घटनाओं का खुलासा भी नही हो पाया है।

2- भाजपा सरकार से कानून व्यवस्था तो सुधर नही रही उससे अपराधियों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि वह पुलिस पर भी हमलावर होने में नही हिचकते हैं। पुलिस का इकबाल गिरता जा रहा है। भाजपा नेता, मंत्री, विधायक और सांसद सत्ता मद में प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप के साथ अधिकारियों को प्रताड़ित करने का काम धड़ल्ले से कर रहे हैं। समाजवादी सरकार ने यूपी 100 डायल व्यवस्था लागू की जिससे अपराध नियंत्रण होता। 1090 वूमेन पावर सेवा मेें महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं रूक रही थी। भाजपा सरकार ने इन व्यवस्थाओं को बर्बाद कर दिया।

3- भाजपा सरकार ने सत्ता का दुरूपयोग करते हुए प्रशासनतंत्र को पंगु बना दिया है। निर्वाचित ब्लाक प्रमुखों एवं जिला पंचायत अध्यक्षों को हटाने के लिए पुलिस बल का खुला दुरूपयोग किया गया। निकाय चुनावों में भी प्रशासनिक मशीनरी का पक्षपात दिखाई दिया।

4- भाजपा सरकार के दबाव में प्रशासन विरोधीपक्ष के कार्यकर्ताओं , नेताओं का उत्पीड़न करने में लगा है। ऐसे में यूपीकोका जैसा जनविरोधी कानून लाया जा रहा है ताकि विपक्षियों और जनता को प्रताड़ित किया जा सके।

5- प्रदेश में विद्युत की व्यवस्था चरमरा गई है। समाजवादी सरकार के समय की व्यवस्थाओं को ध्वस्त किया जा रहा है। किसानों को विद्युत आपूर्ति बाधित है। अब यह सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की दरें 67 से 150 फीसदी बढ़ाकर किसानों को तबाह कर रही हैं।

6- भाजपा सरकार में किसान सबसे ज्यादा प्रताड़ित हैं। उन्हें खाद, बीज, कीटनाशक, समय से नहीं मिल रहे हैं। मंहगाई ने उनकी कमर तोड़ दी है। धान की खरीद लक्ष्य से कोसों दूर है। गन्ना किसानों का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। नहरों की सिंचाई बंद है। स्वास्थ्य सेवाओं का हाल खराब है। चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त है। मरीजों के लिए अस्पतालों में दवाओं का अभाव है। प्राईवेट क्लीनिक मनमानी पर उतारू है। एम्बूलेंस सेवा 102, 108 ठप्प है। कैंसर अस्पताल भी ठीक से काम नहीं कर रहा है।

7- लोक निर्माण विभाग का हाल तो और भी खराब है। स्वीकृत सड़कों की धनराशि लेकर कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं। सड़के गड्ढा मुक्त करने का प्रचार जोरशोर से हुआ पर इसमें घोटाला हो गया है। समाजवादी सरकार के विकासोन्मुख निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं।

8- ग्रामीण विकास की सभी योजनाएं बंद हैं। गरीबों के आवास के नाम पर पैसों का बंदर-बांट होने लगा है। गांव और किसान की घोर उपेक्षा की जा रही है। भाजपा सरकार ने गांव, गरीब, किसान, नौजवान और अल्पसंख्यकों, महिलाओं के हितों की तमाम योजनाएं रोक दी हैं और भाजपा सरकार रागद्वेष की भावना से काम कर रही हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं समाजवादी पार्टी विधानमण्डल दल के नेता श्री अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी जनता के साथ किये जा रहे अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी। भाजपा राज में जनता हर तरह से त्रस्त है। उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। सŸाा मद में भाजपा नेता लोकतांत्रिक मर्यादाओं का तिरस्कार कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी सदन से लेकर सड़क तक भाजपा सरकार की मनमानी के विरूद्ध लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेगी।

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