- उपभोक्ता परिषद ने देश के अनेकों राज्यों में वर्ष 2017-18 हेतु जारी टैरिफ आदेश में औसत वृद्धि का अलग-अलग खुलासा कर उप्र सरकार से बढ़ी बिजली दर वापस लेने की उठायी मांग।
- देश के सभी राज्यों में बिजली दरों में औसत वृद्धि बहुत कम ऐसे में उप्र में वृद्धि उदय अनुबन्ध से ज्यादा क्यों?

लखनऊ 17 दिसम्बर। प्रदेश के गा्रमीण व कृषि क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में पावर कार्पोरेशन द्वारा 50 से 150 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में उपभोक्ता परिषद जहां लगातार अपनी योजना के तहत कार्य कर रहा है। वहीं उपभोक्ता परिषद ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि बिजली कम्पनियों द्वारा नियामक आयोग से जो बिजली दर आदेश जारी कराया गया, है, उसमें घरेलू लाइफ लाइन उपभोक्ताओं की दरों को उचित ठहराने के लिये देश के अनेकों राज्यों का तुलनात्मक अध्ययन भी दर्शाया गया है लेकिन शायद पावर कार्पोरेशन यह भूल गया कि इन राज्यों में भी विगत दिनों जब वर्ष 2017-18 की बिजली दरों को अन्तिम रूप दिया जा चुका है और आयोग द्वारा जो बिजली दर आदेश जारी किया गया, वह उदय स्कीम के तहत प्रस्तावित वृद्धि के आस-पास ही है। ऐसे में उप्र में उदय स्कीम से अधिक व्यापक औसत वृद्धि कराना गलत है। उपभोक्ता परिषद निम्न राज्यों की स्थिति का जो खुलासा कर रहा है, वह स्वतः सच्चाई बयां कर देंगे। ऐसे में उप्र सरकार को देश के अनेकों राज्यों का अनुसरण कर उप्र में बढ़ी बिजली दर को अविलम्ब वापस लेना चाहिए।
राज्य केन्द्र सरकार की उदय स्कीम में आयोगों द्वारा जारी बिजली दर में प्रस्तावित वृद्धि (वर्ष 2017-18 में) वास्तविक वृद्धि (वर्ष 2017-18 में)
उत्तराखण्ड 4.27 प्रतिशत 5.72 प्रतिशत
आन्ध्र प्रदेश 5.00 प्रतिशत 3.60 प्रतिशत
गुजरात 0.50 प्रतिशत 0.00 प्रतिशत
छत्तीस गढ़ 6.00 प्रतिशत 1.46 प्रतिशत
महाराष्ट्र 9.01 प्रतिशत 2.00 प्रतिशत
तेलंगाना 8.00 प्रतिशत 0.00 प्रतिशत
हिमाचल प्रदेश 3.00 प्रतिशत 0.00 प्रतिशत
असम 6.50 प्रतिशत 6.00 प्रतिशत
उत्तर प्रदेश 6.95 प्रतिशत 13 प्रतिशत
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि देश के ज्यादातर राज्यों ने भारत सरकार के तहत उदय स्कीम में जो अनुबन्ध साइन किया और उसमें आने वाले 3 वर्षों के लिये जो अलग-अलग बिजली कम्पनियों हेतु आंकलित औसत वृद्धि प्रस्तावित की। उसी के अन्तर्गत ही राज्यों के नियामक आयोग में अपनी वृद्धि को दर्शाया। ज्यादातर राज्यों में उदय स्कीम के तहत अधिक वृद्धि अनुमानित का अनुबन्ध किया गया लेकिन वहां के राज्यों ने प्रदेश की जनता के हित में पुनर्विचार कर कम वृद्धि प्रस्तावित कर जनता पर कम से कम बोझ डाला और वहां के नियामक आयोगों द्वारा जो बिजली दर आदेश जारी किया गया, वह बहुत अधिक नहीं थी और सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं पर बराबर वृद्धि का भार डाला गया। परन्तु उप्र में अभी वर्ष 2017-18 का जो टैरिफ आया है जो औसत वृद्धि है वह उदय स्कीम में अनुबन्ध 6.95 प्रतिशत से अधिक लगभग 13 प्रतिशत है, जो प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के साथ बड़ा अन्याय है। सबसे बड़ा चैकाने वाला मामला यह है कि घरेलू ग्रामीण व किसानों की दरों में लगभग 50 से 150 प्रतिशत की वृद्धि।







