- बिजली दर बढोत्तरी के मामले में उपभेाक्ता परिषद द्वारा दाखिल लोक महत्व पुनिर्विचार याचिका पर पावर कारपोरेशन ने आयोग को सौंपा आधा अधूरा मनगढंत जवाब प्रस्ताव 2017-18 का जवाब 2018-19 तक कैसे?
- पावर कारपोरेशन का जवाब उसी के गले की हडडी बना जब बिजली दर वर्ष 2017-18 के लिये की गयी अनुमोदित तो पावर कारपोरेशन ने कैसे दे दिया जवाब कि ग्रामीण के लिये वर्ष 2018-19 तक अनुमोदित
लखनऊ 22 दिसम्बर। पावर कारपोरेशन के दबाव में नियामक आयोग द्वारा प्रदेश के ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 67 से 150 प्रतिशत किसानों की दरों में 50 प्रतिशत आम विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 15 प्रतिशत की गयी व्यापक बढोत्तरी के विरोध में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 94 एफ के तहत दाखिल लोक महत्व विषयक याचिका संबंधी जनहित पुनर्विचार प्रत्यावेदन पर आयोग द्वारा पावर कारपोरेशन से मांगी गयी विस्तृत आख्या पर अन्ततः आज उप्र पावर कारपोरेशन के रेग्यूलेटरी अफेयर्स इकाई के मुख्य अभियन्ता द्वारा आयोग में अपना आधा अधूरा मनगढंत जवाब दाखिल कर दिया गया।
सबसे बडा चैंकाने वाला मामला यह है कि पावर कारपोरेशन द्वारा प्रदेश के अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों को लागत से काफी कम बढोत्तरी बतायी जा रही है जो यह सिद्ध करता है कि पावर कारपोरेशन को प्रदेश की जनता से कोई लेना देना नही। उपभोक्ता परिषद द्वारा लगाये गये आरोप की नियामक आयोग ने कारपोरेशन के दबाव में टैरिफ जारी किया के मुददे पर पावर कारपोरेशन ने अपने उत्तर में नो कमेंट कह कर जवाब दिया। यानि कि उपभोक्ता परिषद की बात सही है। पावर कारपोरेशन का जवाब दाखिल होने के बाद अब नियमानुसार आयेाग को टैरिफ पुनर्विचार याचिका पर आगे सुनवाई प्रारम्भ करना होगा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा द्वारा दाखिल अपनी याचिका में यह मुददा उठाया गया था कि जब बिजली दर की सुनवाई वर्ष 2017-18 के लिये केवल हुयी तो आयोग द्वारा किस आधार पर ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोकताओं की दरों में मार्च तक रूपया 300 प्रति किलोवाट प्रति माह और 1 अप्रैल के बाद रूपया 400 प्रति किलोवाट प्रति माह बढोत्तरी दर्शायी गयी क्योंकि यह वर्ष 2018-19 की टैरिफ की परिधि में आ गया जिसके बारे में प्रस्ताव ही नही था।
इस पर पावर कारपोरेशन की तरफ से यह जवाब दिया गया है कि आयोग द्वारा चरणबद्ध तरीके से ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू उपभोक्तओं की श्रेणी में वर्ष 2018-19 तक की टैरिफ अनुमोदित की गयी है जिसमें पावर कारपोरेशन स्वतः अपने जाल में उलझ गया। क्योंकि इस जवाब से यह सिद्ध हो गया कि वर्ष 2018-19 का भी टेरिफ आयोग द्वारा तय कर दिया गया। और आगे अन्य किसी श्रेणी में कोई बढोत्तरी नही होगी। उपभोक्ता परिषद द्वारा किसान व ग्रामीण भले ही दोनों की श्रेणी अलग है लेकिन उनकी दरों में बढोत्तरी एक ही परिवार द्वारा अदा करने पर भी सवाल उठाया गया जिसपर पावर कारपोरेशन ने कहा कि अलग अलग श्रेणी की दरें आयोग ने तय की हैं। उपभोक्ता परिषद के ज्यादातर विधिक सवालों पर पावर कारपोरेशन ने अपने को फंसता देख केवल यह लिखना उचित समझा कि आयोग द्वारा टैरिफ पालिसी व अपने रेग्यूलेशन के तहत उचित निर्णय लिया गया है।
उपभोक्ता परिषद द्वारा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या में बढोत्तरी होने के बावजूद भी 4.28 प्रतिशत रेग्यूलेटरी सरचार्ज की वसूली को गलत बताते हुए यह भी तर्क दिया गया कि जो वर्तमान में लाखों की संख्या में नये उपभोक्ता बन रहे हैं उनसे पुराने घाटे की वसूली क्यों हो रही है? रेग्यूलेटरी सरचार्ज तब तक नही वसूला जा सकता जब तक पुराने वर्षों की हर मानक की सोशल आडिट न करा ली जाये। इस पर पावर कारपोरेशन द्वारा यह उत्तर दिया गया है कि नये व पुराने विद्युत उपभोक्ताओं के लिेय कोई पृथक आदेश आयोग द्वारा नही निर्गत किया गया है। और रेग्यूलेटरी सरचार्ज काफी कम है। पावर कारपोरेशन ने आयेाग पर भी सवाल खडा करते हुए कहा गया है कि एआरआर में 4694 करोड के गैप के बारे में स्थित स्पष्ट नही है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा यह भी मुददा उठया गया था कि सुनवाई के दौरान किसानों से जो लगभग रूपया 834 पुराने टैरिफ के अनुसार 5 हार्स पावर तक वसूला जाना था उनसे लगभग 3000 रूपया बिलिंग में गडबडी कर वसूला गया जिस पर आयोग द्वारा कमेटी गठित की गयी है। अभी तक उस पर पावर कारपोरेशन की उदासीनता के चलते कार्यवाही विचाराधीन है। ऐसे में टैरिफ निर्धारण गलत है। इस पर पावर कारपोरेशन द्वारा यह कहा गया है कि जाॅंच समिति का निर्णय आने के बाद उसे लागू किया जायेगा। वर्तमान जारी टैरिफ से उसका कोई मतलब नही है।
उपभोक्ता परिषद द्वारा रिटर्न आफ इक्यूविटी के तहत मांगे गये लगभग रूपया 1527 करोड़ के अतिरिक्त भार को गलत बताया गया था जिस पर पावर कारपोरेशन ने उसे सही करार दिया। इसी प्रकार ओएनडम को बहुत ज्यादा 6825 करोड अनुमोदित करने के मामले पर पावर कारपोरेशन ने उसे रेग्यूलेशन के तहत करार दिया। इसी प्रकार लाइफ लाइन घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के 1 किलोवाट 150 यूनिट को बाजीगरी कर उसके स्लैब को कम करने से पहले जो उपभोक्ता रूपया 540 अदा करते थे अब उन्हें रूपया 835 देना पडेगा के मामले पर भी पावर कारपोरेशन ने कोई उत्तर न देकर रेग्यूलेशन का हवाला दे दिया। इसी प्रकार शहरी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के फिक्सड चार्ज को समाप्त किये जाने पर कारपोरेशन ने इसे 2 पार्ट टैरिफ का मामला बताया जबकि जब यह व्यवस्था लागू हुयी थी तो प्रति कनेक्शन फिक्स चार्ज वसूला जाता था जो प्रति किलोवाट गलत है।






