- ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से इलेक्ट्रिसिटी डयूटी के मद में करोडों अधिक वसूली पर शाक्ति भवन में दिन भर मचा हंगामा उच्चाधिकारी परेशान मामले को उलझाने के लिये युक्ति ढॅूढने में लगे।
- पिछली सपा सरकार में जारी अधिसूचना का अर्थ का अनर्थ निकालकर 5 साल उपभोक्ताओं से वसूल लिया करोडों अरबों अधिक और वर्तमान भाजपा सरकार में भी उच्चाधिकारी उस व्यवस्था को बढाते रहे आगे
- उपभेाक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से लगायी गुहार, सरकार करे हस्तक्षेप और दोषी अधिकारियों को करे दंडित और उपभोक्ताओं से की गयी अधिक वसूली दिलाये उसे वापस
- उपभेाक्ता परिषद अध्यक्ष ने आज फिर नियामक आयेाग अध्यक्ष से की मुलाकात पूरे घटनाक्रम से उन्हें कराया अवगत आयोग अध्यक्ष ने कहा उपभोक्ताओं के साथ हर हाल में होगा न्याय
लखनऊ 27 दिसम्बर। पिछली सपा सरकार में जारी अधिसूचना का अर्थ का अनर्थ निकालकर प्रदेश के लाखों ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं पर बिजली कम्पनियों के आला अधिकारी 5 प्रतिशत के बजाय 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी डयूटी पिछले 5 वर्षों से वसूलते रहे। सबसे बडी विडम्बना यह है कि पिछली सरकार में जारी अधिसूचना का अर्थ का अनर्थ वर्तमान भाजपा सरकार में भी बिजली कम्पनियों के आला अधिकारी उसे आगे बढाते रहे। अब जब मामले में उपभोक्ता परिषद ने बडा खुलासा कर दिया, नियामक आयोग ने जवाब तलब कर लिया तो पूरे पावर कारपोरेशन में हंगामा मचा है।
बिजली कम्पनियों को प्रदेश के ग्रामीण 40 से 60 लाख अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं को लगभग रूपया 955 करोड न वापस करना पडे दिन भर शक्तिभवन में पत्रावली दौडती रही कि कहीं कोई ऐसी युक्ति मिल जाय जिससे मामले को फिर घुमाया जाये। यह कहना गलत नही होगा कि पहले चोरी फिर सीना जोरी। एक स्वस्थ परम्परा यह है कि पावर कारपोरेशन ने जो गलती की उसे प्रदेश के विद्युत उपभेाक्ताओं से माफी मांगते हुए उनसे की गयी अधिक वसूली का भुगतान मय ब्याज सहित करना चाहिये। पावर कारपोरेशन के कुछ उच्चाधिकारी इस जुगत में भी लगे रहे कि प्रमुख सचिव ऊर्जा व अध्यक्ष पावर कारपोरेशन एक है ऐसे में बैक डेट मंे भी कोई युक्ति निकाली जाये। लेकिन अन्ततः अधिसूचना विद्यान सभा से पारित होने के बाद लागू होती है यह बडा पेंच फंसा रहा।
उप्र राज्य विद्युत उपभेाक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं के साथ कोई अन्याय न होने पाये और उनसे की गयी अधिक वसूली उन्हें ब्याज सहित वापस हो जाये के लिये पुनः आज नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है। नियामक आयोग अध्यक्ष ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को आश्वासन दिया है कि आयोग द्वारा मांगी गयी विस्तृत आख्या आने दो किसी भी प्रदेश के उपभोक्ता के साथ अन्याय नही होने पायेगा। नियामक आयोग का नैतिक दायित्व है कि वह उसके साथ न्याय करे।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से भी गुहार लगायी है कि उप्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना का अर्थ का अनर्थ निकालकर पिछले 5 वर्षों से प्रदेश के लाखों ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं के साथ जो छल किया गया है उस पर सरकार हस्तक्षेप करे और जो भी इसके लिये दोषी हैं उनके खिलाफ कठोर कदम उठाया जाये। उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री जी से यह भी गुहार लगायी है कि यदि पिछली सरकार द्वारा जारी आदेश का गलत अर्थ निकालकर लाखों गाॅंव की जनता की जेब पर डाका डाला गया तो वर्तमान भाजपा सरकार में उस पर रोक लगाने की बजाय उसे आगे बढाने की युक्ति ढॅूढना पूरी तरह असंवैधानिक व सरकार की छवि धुमिल करने वाला कदम है। ऐसे अधिकारियों को चिन्हित कर कार्यवाही होना जरूरी है।







