- ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से इलेक्ट्रिसिटी डयूटी के मद में करोडों अधिक वसूली पर पावर कार्पोरेशन द्वारा 7 दिन पूरा होने के बाद जवाब ने देने पर नियामक आयोग हुआ गम्भीर पावर कार्पोरेशन प्रबन्ध निदेशक से अविलम्ब रिमाइन्डर भेज तलब की रिर्पोट
- उपभेाक्ता परिषद अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री से भी हस्तक्षेप की लागायी गुहार कहा उपभोक्ताओं से गलत तरीके से वसूले गये लगभग 955 करोड़ ब्याज सहित कराया जाये वापस और दोषियों को दी जाय सजा
- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आज फिर नियामक आयेाग अध्यक्ष से की मुलाकात और अविलम्ब न्याय दिलाने की उठाई मांग
लखनऊ,02 जनवरी। प्रदेश के लाखों ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं पर बिजली कम्पनियों के आला अधिकारी द्वारा 5% के बजाय 20% इलेक्ट्रिसिटी डयूटी पिछले 5 वर्षों से वसूले जाने के मामले में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के लोकमहत्व जनहित प्रत्यावेदन पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा 26 दिसम्बर को पावर कार्पोरेशन के प्रबन्ध निदेशक से 7 दिन में पूरे मामले पर विस्तृत आख्या तलब की गयी थी 7 दिन पूरा होने के बाद भी इस महत्वपूर्ण मामले में रिपोर्ट न प्राप्त होने पर आज विद्युत नियामक आयोग के सचिव संजय श्रीवास्तव ने पावर कार्पोरेशन के प्रबन्ध निदेशक को एक रिमाइन्डर भेजकर तत्तकाल पूरे मामले पर वांछित आख्या तलब की है।
आज इस पूरे मामले पर उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा पुनः नियामक आयोग अध्यक्ष एसके अग्रवाल से मुलाकात की और पूरे मामले पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के साथ यथाशीघ्र न्याय कराने की मांग उठायी। उप्र सरकार द्वारा बनाये गये कानून का उल्घंन करने के बाद उस पर हीलाहवाली किये जाने के पूरे मामले पर उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री जी से भी हस्तक्षेप कर अविलम्ब उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने व दोषियों को सजा दिलाने की मांग उठाई है।
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली कम्पनियों को प्रदेश के ग्रामीण 40 से 60 लाख अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं को लगभग रूपया 955 करोड मय ब्याज सहित वापस करना है और आगे 20% की जगह केवल 5% की इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूल करना है ऐसे में इस पूरे गम्भीर मामले पर पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को अविलम्ब उचित कदम उठाते हुये प्रदेश के उपभोक्ताओं से साथ न्याय करना चाहिए यह कितना गम्भीर मामला है कि जब बिजली दर में व्यापक बढ़ोत्तरी कराना था तो सभी विद्युत उपभोक्ताओं की आपत्तियों का जवाब आयोग को 24 घंटे में प्राप्त हो गया था और अब जब पावर कार्पोरेशन की घोर गलती के चलते उनसे वसूल किये गये करोड़ो अरबों वापस करने का मामला आया तो पावर कार्पोरेशन कछुए की चाल से चल रहा है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि यह कितना गम्भीर मामला है कि सरकार द्वारा पारित होने के बाद यह इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी का कानून 2012 में उप्र में लागू हुआ। ऐसे में सरकार द्वारा पारित किसी भी कानून का उलंघन सरकारी आदेश की अवमानना की श्रेणी में आता है सरकार द्वारा बनाया कोई भी कानून यथावथ प्रदेश की जनता पर लागू होना चाहिए यहां पर कानून का उल्घंन होने के बाद भी उपभोक्ताओं को न्याय देने में हो रही देरी भी एक तरह से गम्भीर मामला है।






