अधिक वसूली धनराशि क्यों न की जाये वापस: आयोग

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नियामक आयोग अध्यक्ष ने पावर कारपोरेशन के निर्देश वाणिज्य का जवाब किया खारिज, कहा 5 % इलेक्ट्रिसिटी डयूटी का आदेश केवल जारी करने से नही चलेगा काम अधिक वसूली की धनराशि क्यों न की जाये वापस, कारपोरेशन 7 दिन में दे जवाब

लखनऊ,04 जनवरी। प्रदेश के लगभग 50 लाख ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से 5 प्रतिशत की जगह 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी डयूटी पावर कारपोरेशन के गलत निर्णय की वजह से वसूले जाने के मामले में भले ही पावर कारपोरेशन ने अपना आदेश वापस लेकर आगे से केवल 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी डयूटी वसूलने का आदेश जारी कर दिया है लेकिन वहीं दूसरी ओर विद्युत नियामक आयोग की पावर कारपोरेशन के इस असंवैधानिक निर्णय के खिलाफ नजर टेढ़ी हो गयी है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा द्वारा दाखिल लोक महत्व जनहित प्रत्यावेदन पर पावर कारपोरेशन के निदेशक संजय कुमार सिंह द्वारा नियामक आयेाग को भेजे गये जवाब पर आज नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल ने गंभीरता से विचार करते हुए एतिहासिक फैसला सुनाया है। नियामक आयोग ने पावर कारपोरेशन को कडी फटकार लगाते हुए कहा कारपोरेशन ने अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रिसिटी डयूटी की धनराशि वापस करने हेतु अविलम्ब कार्यवाही क्यों नही की?
आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल के निर्देश पर नियामक आयोग सचिव श्री संजय श्रीवास्तव ने पावर कारपोरेशन के निदेशक वाणिज्य श्री संजय कुमार सिंह को भेजे गये अपने निर्देश में यह कहा है कि पावर कारपोरेशन का यह जवाब कि पावर कारपोरेशन द्वारा इलेक्ट्रिसिटी डयूटी उप्र सरकार की अधिसूचना वर्ष 2012 के अनुसार थी पूरी तरह स्वीकार करने योग्य नही है। क्योंकि इलेक्ट्रिसिटी डयूटी अधिसूचना के मुताबिक ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से वर्ष 2012 से ही केवल 5 प्रतिशत वसूली जानी चाहिये थी लेकिन पावर कारपोरेशन के आदेश की वजह से ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी डयूटी वसूली गयी जो गलत है।
 
अधिक वसूली की धनराशि वापस करने के लिए अविलम्ब कार्यवाही क्यों नही की गयी: आयोग
नियामक अयोग ने निदेशक वाणिज्य को भेजे गये अपने फैसले में यह गंभीर मुददा उठाया है कि 2012 से ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रिसिटी डयूटी क्यों नही वापस करने का निर्णय लिया गया? जब कि पावर कारपोरेशन ने अपनी गलती मानते हुए आगे 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी डयूटी वसूल किये जाने का आदेश निर्गत किया है। आयोग द्वारा जारी फैसले में पावर कारपोरेशन को यह भी निर्देश दिया गया है कि पावर कारपोरेशन पूरे मामले को गंभीरता से लें। और 7 दिन में पूरी कार्यवाही से आयोग को अवगत करायें।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज पुनः नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात कर लम्बी चर्चा करते हुए कहा कि जब पावर कारपोरेशन ने असंवैधानिक तरीके से उप्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना का अर्थ का अनर्थ लगाकर 2012 से उपभोक्ताओं से लगभग रूपया 955 करोड अधिक वसूल लिया तो उसे मय ब्याज सहित वापस करने के बजाय प्रमुख सचिव ऊर्जा से अभिमत मांगना पूरी तरीके से असंवैधानिक व गलत है। नियमानुसार पावर कारपोरेशन को ऐसे दोषी उच्चाधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाना चाहिये जिनकी वजह से प्रदेश के लगभग 50 लाख अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं को अधिक धनराशि नियम विरूद्ध चुकानी पडी। पावर कारपोरशन के इस कृत्य के खिलाफ जल्द ही उपभोक्ता परिषद प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर पावर कारपोरेशन प्रबन्धन के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने की मांग उठायेगा।

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