10 को मुख्यालय पर धरना, 13 की मध्यरात्रि से कार्य बहिष्कार
लखनऊ, 7 अक्टूबर। उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के लगभग 24 हजार संविदा चालक-परिचालक अपना वेतनमान बढ़ाने, वेतनमान में प्रतिवर्ष बढ़ोत्तरी करने, निर्धारित दूरी को चार हजार किमी और कार्यदिवसों को 22 करने, सेवा नियमावली बनाने, निगम की रिक्तियों में उन्हें समायोजित करने, मांगा गया न्यूनतम वेतनमान व सभी सुविधाएं महानगर परिवहन सेवा में लागू करने और निकाले गये संविदा कर्मियों को एक और अवसर देकर पुनः सेवा में लेने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को निगम मुख्यालय पर धरना देंगे। मांगे न पूरी होने पर वे 13 अक्टूबर मध्यरात्रि से कार्य बहिष्कार करेंगे।
यहां पत्रकार वार्ता में उक्त जानकारी देते हुए संविदा चालक -परिचालक संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय सिंह व महामंत्री कन्हैयालाल पाण्डेय ने बताया कि परिवहन निगम में लगभग 24 हजार संविदा चालक-परिचालक निगम की सेवा में कार्यरत हैं, संविदा चालक-परिचालक पूरी ईमानदारी एवं निष्ठापूर्वक लगभग 15 वर्षो से निगम की सेवा कर रहे हैं। परिवहन निगम में संविदा चालकों- परिचालकों के सहभागिता से लगभग संचालित मार्गों का 85 प्रतिषत संचालन संविदा कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, संविदा चालक-परिचालक अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी तरह से तो कर रहे है परन्तु निगम प्रषासन द्वारा उन संविदा चालकों-परिचालकों को इतना पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है कि वे अपने-अपने परिवार का भरण पोषण कर सके।
उन्होंने बताया कि निगम में कार्यरत संविदा चालक-परिचालक द्वारा दिन-रात, सर्दी बरसात एवं घने कोहरे में भी परिश्रम करके अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए बसों का संचालन तो कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने दायित्वों के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियों को भी निभाना हैं। उन्होंने कहा कि संविदा चालक-परिचालक निगम के दायित्वों का तो निर्वहन पूरी तरह से कर रहे है परन्तु कम पारिश्रमिक मिलने के कारण अपने-अपने परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं जिससे संविदा चालकांे-परिचालकों की भावनाएं कुण्ठित हो रही हैं जो कि निगम हित में नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमारा संगठन द्वारा बार-बार निगम प्रषासन व राज्य सरकार को पत्र व्यवहार व वार्तालाप करके संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को बारे में समय-समय पर अवगत कराता रहा है, परन्तु निगम प्रषासन द्वारा उक्त समस्याओं के सम्बन्ध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। निगम प्रशासन द्वारा केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा निर्गत आदेष के अनुपालन में न्यूनतम वेतनमान दिया जा रहा है जिसमें निगम के कुछ अधिकारियों द्वारा कूटनीति करते हुए इतनी शर्ते लागू कर दी गयी हैं कि कार्यरत लगभग 24 हजार संविदा चालकों-परिचालको में से लगभग 2800 को ही इसका लाभ मिल पा रहा है। बाकी समस्त संविदा चालक-परिचालकों को इस व्यवस्था से वंचित रखा गया है, जो कि न्याय संगत नहीं है।
उन्होंने बताया कि आज निगम के प्रबंध निदेशक को जो 5 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया है उसमें उनसे मांगों पर गम्भीरता पूर्वक विचार करते हुए साकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया गया है। हमारी मांग है कि निगम में कार्यरत सभी संविदा चालकों-परिचालकों को तय न्यूनतम वेतनमान दिया जाय। निगम द्वारा उक्त वेतनमान के लिए निर्धारित 6000 किमी0 एवं 24 कार्य दिवस के स्थान पर 4000 किमी0 एवं 22 दिन का कार्य दिवस किया जाय। साथ ही मंहगाई को दृष्टिगत रखते हुए वेतनमान में प्रतिवर्ष सम्मानजनक वृद्धि की जाय। संविदा चालक-परिचालक की सेवा नियमावली बनायी जाये। भविष्य में होने वाली रिक्तियों में 100 प्रतिषत संविदा चालकों-परिचालकों का समायोजन करने के पष्चात ही बाहरी भर्ती की जाये। उक्त वेतनमान एवं सभी सुविधाएं सभी महानगर परिवहन सेवा में भी लागू किया जाये।
किन्हीं कारणों से निकाले गये संविदा चालक-परिचालक को एक अवसर प्रदान करते हुए सेवा में लिया जाये।
उन्होंने कहा कि यदि निगम द्वारा शीघ्र साकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन मजबूर होकर मंगलवार 10 अक्टूबर को निगम मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करेगा। फिर भी निगम प्रशासन मांगों पर विचार नहीं करता है तो शुक्रवार 13 अक्टूबर की मध्य रात्रि से अनिष्चित कालीन कार्य बहिष्कार करेगा। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी निगम प्रषासन एवं राज्य सरकार की होगी।
यहां पत्रकार वार्ता में उक्त जानकारी देते हुए संविदा चालक -परिचालक संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय सिंह व महामंत्री कन्हैयालाल पाण्डेय ने बताया कि परिवहन निगम में लगभग 24 हजार संविदा चालक-परिचालक निगम की सेवा में कार्यरत हैं, संविदा चालक-परिचालक पूरी ईमानदारी एवं निष्ठापूर्वक लगभग 15 वर्षो से निगम की सेवा कर रहे हैं। परिवहन निगम में संविदा चालकों- परिचालकों के सहभागिता से लगभग संचालित मार्गों का 85 प्रतिषत संचालन संविदा कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, संविदा चालक-परिचालक अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी तरह से तो कर रहे है परन्तु निगम प्रषासन द्वारा उन संविदा चालकों-परिचालकों को इतना पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है कि वे अपने-अपने परिवार का भरण पोषण कर सके।
उन्होंने बताया कि निगम में कार्यरत संविदा चालक-परिचालक द्वारा दिन-रात, सर्दी बरसात एवं घने कोहरे में भी परिश्रम करके अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए बसों का संचालन तो कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने दायित्वों के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियों को भी निभाना हैं। उन्होंने कहा कि संविदा चालक-परिचालक निगम के दायित्वों का तो निर्वहन पूरी तरह से कर रहे है परन्तु कम पारिश्रमिक मिलने के कारण अपने-अपने परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं जिससे संविदा चालकांे-परिचालकों की भावनाएं कुण्ठित हो रही हैं जो कि निगम हित में नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमारा संगठन द्वारा बार-बार निगम प्रषासन व राज्य सरकार को पत्र व्यवहार व वार्तालाप करके संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को बारे में समय-समय पर अवगत कराता रहा है, परन्तु निगम प्रषासन द्वारा उक्त समस्याओं के सम्बन्ध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। निगम प्रशासन द्वारा केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा निर्गत आदेष के अनुपालन में न्यूनतम वेतनमान दिया जा रहा है जिसमें निगम के कुछ अधिकारियों द्वारा कूटनीति करते हुए इतनी शर्ते लागू कर दी गयी हैं कि कार्यरत लगभग 24 हजार संविदा चालकों-परिचालको में से लगभग 2800 को ही इसका लाभ मिल पा रहा है। बाकी समस्त संविदा चालक-परिचालकों को इस व्यवस्था से वंचित रखा गया है, जो कि न्याय संगत नहीं है।
उन्होंने बताया कि आज निगम के प्रबंध निदेशक को जो 5 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया है उसमें उनसे मांगों पर गम्भीरता पूर्वक विचार करते हुए साकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया गया है। हमारी मांग है कि निगम में कार्यरत सभी संविदा चालकों-परिचालकों को तय न्यूनतम वेतनमान दिया जाय। निगम द्वारा उक्त वेतनमान के लिए निर्धारित 6000 किमी0 एवं 24 कार्य दिवस के स्थान पर 4000 किमी0 एवं 22 दिन का कार्य दिवस किया जाय। साथ ही मंहगाई को दृष्टिगत रखते हुए वेतनमान में प्रतिवर्ष सम्मानजनक वृद्धि की जाय। संविदा चालक-परिचालक की सेवा नियमावली बनायी जाये। भविष्य में होने वाली रिक्तियों में 100 प्रतिषत संविदा चालकों-परिचालकों का समायोजन करने के पष्चात ही बाहरी भर्ती की जाये। उक्त वेतनमान एवं सभी सुविधाएं सभी महानगर परिवहन सेवा में भी लागू किया जाये।
किन्हीं कारणों से निकाले गये संविदा चालक-परिचालक को एक अवसर प्रदान करते हुए सेवा में लिया जाये।
उन्होंने कहा कि यदि निगम द्वारा शीघ्र साकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन मजबूर होकर मंगलवार 10 अक्टूबर को निगम मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करेगा। फिर भी निगम प्रशासन मांगों पर विचार नहीं करता है तो शुक्रवार 13 अक्टूबर की मध्य रात्रि से अनिष्चित कालीन कार्य बहिष्कार करेगा। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी निगम प्रषासन एवं राज्य सरकार की होगी।







