सोलर पावर प्लाण्टों की उच्च दरों पर नियामक आयोग में हंगामेदार रही सार्वजनिक सुनवाई

0
531

नियामक आयोग अध्यक्ष ने नेडा को लिया आडे हाथों

लखनऊ, 25 अक्टूबर। उप्र विद्युत नियामक आयोग सभागार में आज पावर कारपोरेशन व नेडा द्वारा संयुक्त रूप से दाखिल याचिका 215 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर बिडिंग रूट टैरिफ एडाप्सन के मामले पर सार्वजनिक सुनवाई आयेाग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुयी जो काफी हंगामेदार रही। जिसमें नियामक आयोग सचिव श्री संजय श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक श्री अभिषेक श्रीवास्तव, पावर कारपोरेशन व नेडा के प्रतिनिधियों सहित प्रदेश में सोलर प्लाण्ट स्थापित करने वाले निजी घरानों के प्रतिनिधियों सहित उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने भाग लिया। गौरतलब है कि इस हाई प्रोफाइल मामले पर आयोग द्वारा 22 फरवरी 2017 को अपना फैसला सुनाते हुए सोलर पावर की दरें ज्यादा बताते हुए पावर कारपोरेशन व नेडा द्वारा संयुक्त रूप से दाखिल याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए इस शर्त के साथ वापस कर दिया गया था कि मार्केट दर जो याचिका में 15 निजी घरानों मेसर्स एस एल इन्फ्रा, सुराना टेलीकाम, सुधाकर इन्फ्राटेक, लोहिया, फेरोमर सिपिंग, सुखबरी एग्रो, टेक्निकल एसोसिएटस, सहश्र धारा अडानी ग्रीन एनर्जी अवध रबर, पिनाकल, एनपी एग्रो, श्री राधे राधे जो सोलर बिडिंग में शामिल है और उनकी उनकी न्यूनतम दर रू0 7.02 प्रति यूनिट व अधिकतम रू0 8.60 प्रति यूनिट के बीच आई है वह बहुत ज्यादा हैं इस पर नेडा पुनर्विचार करे।

नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल ने नेडा के प्रतिनिधि को आडे हाथों लेते हुए कडी फटकार लगाते हुए कहा कि नेडा द्वारा जो याचिका दी गयी है उसमें 25 वर्ष के पीपीए अवधि की तुलना की जा रही है। जबकि नेडा द्वारा दाखिल याचिका में पीपीए की अवधि 12 वर्ष है जो स्वतः सोचनीय है। आयोग अध्यक्ष ने उपभोक्ता प्रतिनिधियों को 7 दिन में अपना लिखित आपत्ति दाखिल करने को कहा और फैसला रिजर्व कर लिया।

सुनवाई में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का पक्ष रखते हुए उ0 प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कमार वर्मा ने निजी घराने के प्रतिनिधियों को आडे हाथों लेते हुए कहा कि नेडा व पावर कारपोरेशन द्वारा दाखिल याचिका में उप्र में जिन 9 कार्यरत सोलर पावर प्लाण्ट की दरों को रू0 7.02 प्रति यूनिट के आधार पर कुल 135 मेगावाट प्लाण्ट के एडाप्सन आफ टैरिफ पर अपनी सहमति दी गयी है। उसमें से केवल 3 सोलर पावर प्लाण्टों ने रू0 7.02 प्रति यूनिट पर अपनी सहमति दी है। लेकिन वह भी दरें बहुत ज्यादा है। क्योंकि वर्तमान में नेडा द्वारा जो याचिका दाखिल की गयी है उसमें केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग की वर्ष 2015-16 की बेन्चमार्क दर रू0 7.06 प्रति यूनिट को आधार बनाया गया है। नेडा शायद यह भूल गया कि एडाप्सन आफ टैरिट विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 63 के तहत तभी संभव है जब बिडिंग पूरी तरह पारदर्शी व भारत सरकार की गाइड लाइन के तहत हों लेकिन उप्र में ऐसा नही है। पूरे देश में पीपीए की अवधि 25 साल है लेकिन उप्र में 12 वर्ष है जो पूरी तरह भारत सरकार की नीतियों के खिलाफ है। और उपभोक्ता हितों के विपरीत भी। नेडा द्वारा केन्द्रीय विद्युत नियामक अयोग के वर्ष 2015-16 के जिस बेन्च मार्क दर से तुलना की गयी है वह 25 वर्ष के पीपीए पर आधारित है। ऐसे में यह याचिका पूरी तरह धारा 63 के विपरीत है इसे खारिज किया जाना चाहिये। जहा तक वर्तमान में सोलर की मार्केट दरों का सवाल है तो विगत दिनों राजस्थान में 500 मेगावाट सोलर पार्क की जो दरें सामने आयी है। वह रू0 2.44 प्रति यूनिट है ऐसे में यदि उप्र के इन सोलर पावर प्लाण्टों की दरें वर्ष 2016-17 के आधार पर तय की जाये तो वह रू0 4 प्रति यूनिट से रू0 5 प्रति यूनिट से ज्यादा नही होनी चाहिये। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने पीपीए की अवधि पर भारत सरकार सहित कर्नाटका विद्युत नियामक आयोग के आदेश की प्रति आयोग को सौंपते हुए कहा कि पीपीए की अवधि 25 वर्ष से कम नही होनी चाहियें जो पूरी रह उपभोक्ता हित में है। उ0 प्र0 में 12 वर्ष पीपीए की अवधि से सोलर पावर लगाने वाले निजी घरानों को फायदा है और वहीं प्रदेश के उपभोक्ताओं को बडा नुकसान है।

सोलर पावर प्लाण्ट लगाने वाले निजी घरानों की तरफ से सुनवाई में शामिल मा. उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं व पावर कारपोरेशन के अधिवक्ता ने भी अपनी बात रखी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here