- प्रदेश के अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं से बिजली कम्पनियां अर्थ का अनर्थ लगाकर इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के मद में वसूल लिया करोड़ों रूपया अधिक। उपभोक्ता परिषद ने आज पावर कार्पोरेशन की पकड़ी सबसे बड़ी चोरी।
- इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूल की जानी थी 5 प्रतिशत और वर्षो से वसूल रहे हैं ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से 20 प्रतिशत।
- वर्ष 2012 में जारी शासनादेश के आधार पर कल 23 दिसम्बर को पावर कार्पोरेशन द्वारा जारी आदेश के बाद उपभोक्ता परिषद ने पकड़ा बिजली कम्पनियों का बड़ा कारनामा।
- उपभोक्ता परिषद का ऐलान वसूला गया करोड़ों रूपया अधिक जब तक नहीं करा लेंगे वापस जारी रखेंगे लड़ाई।
लखनऊ 24 दिसम्बर। उप्र का लगभग 60 लाख ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ता जहां बढ़ी बिजली दर से परेशान है वहीं उपभोक्ता परिषद आज जो खुलासा किया है उससे प्रदेश के ग्रामीण अनमीटर्ड 60 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को प्रदेश की बिजली कम्पनियों को करोड़ों रूपया वापस करना पड़ेगा। ऊर्जा विभाग उप्र द्वारा इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के बारे में 2012 में एक आदेश निर्गत किया गया था जिसमें घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के लिये 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूलने, राज्य के सरकारी विभागों से 5 प्रतिशत वसूलने एवं सरकारी व घरेलू को छोड़कर अन्य से 7.5 प्रतिशत व अनमीटर्ड उपभोक्ताओं से फिक्स चार्ज पर 20 प्रतिशत वसूलने का आदेश जारी हुआ था, यानि कि इस आदेश से पूरी तरह स्पष्ट है कि घरेलू व सरकारी उपभोक्ताओं से 5 प्रतिशत से ऊपर नहीं वसूला जायेगा। लेकिन अर्थ का अनर्थ लगाकर प्रदेश की बिजली कम्पनियां लाखों की संख्या में अनमीटर्ड घरेलू ग्रामीण उपभोक्ताओं, जो फिक्स चार्ज वर्तमान में रू0 300 प्रति किलोवाट अदा कर रहे हैं और पहले रू0 180 प्रति किलोवाट उनसे भी 20 प्रतिशत की वसूली वर्षो से कर ली, जबकि उनसे केवल 5 प्रतिशत ही वसूला जाना था। जबकि शासनादेश में पूरी तरह स्पष्ट है कि घरेलू व सरकारी को छोड़कर अन्य उपभोक्ताओं पर ही यह व्यवस्था लागू होगी।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ता परिषद के संज्ञान में यह मामला तब आया जब कल 23 दिसम्बर,2017 को पावर कार्पोरेशन द्वारा नई बिजली दर के सम्बन्ध में जारी निर्देश के तहत सभी श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं के लिये उप्र सरकार द्वारा इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के सम्बन्ध में वर्ष 2012 में शासनादेश के अनुसार वसूली का नया आदेश जारी किया गया। सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि कई वर्षो से ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं जिनसे फिक्स चार्ज पर 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की वसूली की जानी थी, उससे 20 प्रतिशत वसूला जाता रहा। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि प्रदेश के पावर कार्पोरेशन व बिजली कम्पनियों में जहां बड़े-बड़े तकनीकी विशेषज्ञ और कानूनी दांव पेंच के जानकार बैठते हैं, उनके द्वारा अर्थ का अनर्थ लगाकर किस प्रकार से ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं को ठगा गया। उपभोक्त परिषद ने पूरे मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से भी हस्तक्षेप की गुहार लगायी है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब तक प्रदेश के ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं को वर्षो से वसूला गया करोड़ों रूपया पावर कार्पोरेशन से उपभोक्ताओं को वापस नहीं दिला देगा तब तक चुप बैठने वाला नहीं है।







