UPPCL द्वारा प्रस्तावित बिजली दर बढोत्तरी पर आयोग का डंडा, 3 दर्जन से ज्यादा कमियों पर 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

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  • उपभोक्ता परिषद की लडाई रंग लायी नियामक आयोग का ऐतिहासिक फैसला
  • पावर कारपोरेशन द्वारा दाखिल बिजली दर बढोत्तरी प्रस्ताव पर आयोग का चला डंडा 3 दर्जन से ज्यादा कमियों पर आयोग ने पावर कारपोरेशन व बिजली कम्पनियों के प्रबन्ध निदेशकों व अध्यक्ष पावर कारपोरेशन से 7 दिन में मांगी रिपोर्ट
  • आयोग ने पावर कारपोरेशनल से किया सवाल, ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 253 प्रतिशत व किसानों की दरों में 70 से 88 प्रतिशत प्रस्तावित वृद्धि का क्या है आधार?
  • आयोग ने किया सवाल उदय स्कीम’’ पावर फार आल’’ व ARR के आंकणों में अंतर क्यों? एक्सल सीट आयेाग में तलब।
  • आयोग ने उठाया सवाल उदय स्कीमं में वर्ष 2017-18 हेतु प्रस्तावित 6.95  प्रतिशत औसत वृद्धि के विपरीत पावर कारपोरेशन ने 22.66 प्रतिशत की वृद्धि क्यां मांगी?

लखनऊ 23 अगस्त। पावर कारपोरेशन व प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा नियामक आयोग में दाखिल मल्टी इयर टैरिफ(एमवाईटी) के क्रम में वर्ष 2017-18 हेतु दाखिल व्यापक बिजली दर वृद्धि प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने कडा डण्डा चलाते हुए पावर कारपोरेशन पर अनेकों सवाल खडे किये हैं और बिजली दर  प्रस्ताव में लगभग 3 दर्जन से ज्यादा कमियां निकाली गयी हैं एवं 7 दिन में पावर कारपोरेशन व बिजली कम्पनियों के प्रबन्ध निदेशकों व अध्यक्ष पावर कारपोरेशन सेे सभी सवाालों का जवाब मांगा गया है। इससे पूर्व आयोग द्वारा एआरआर (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) में भी सैकडों कमियों का खुलासा किया गया था।
अन्ततः उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा आयोग में उठाये गये अब सभी अहम बिन्दुओं पर पावर कारपोरेशन को अब जवाब देना ही पडेगा। नियामक आयोग द्वारा पावर कारपोरेशन से  सबसे पहले यह सवाल दागा गया है कि एमवाईटी टैरिफ के तहत ARR 3 वर्ष का दाखिल किया गया है फिर बिजली दर प्रस्ताव केवल 1 वर्ष का क्यों? आयोग द्वारा पावर कारपोरेशन व बिजली कम्पनियों से यह सवाल दागा गया है कि कम्पनियों द्वारा उदय स्कीम में वर्ष 2017-18 से लेकर वर्ष 2019-20 तक क्रमशः 6.95, 6.80 एव 6.60 प्रतिशत औसत वृद्धि का अनुबन्ध किया गया फिर उसके विपरीत वर्ष 2017-18 में किस आधार पर 22.66 प्रतिशत की औसत वृद्धि मांगी गयी सवाल यह उठता है कि 3 साल की औसत वृद्धि एक ही साथ मांग लेना क्या उचित है? आयोग ने पावर कारपोरेशन से यह भी पूछा है कि उप्र सरकार द्वारा मल्टी ईयर टैरिफ में कितनी सब्सिडी उपलब्ध करायी जा रही है इसका भी जवाब दिया जाये।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग द्वारा पावर कारपोरेशन से यह भी सवाल दागा गया है कि ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 253 प्रतिशत की वृद्धि का क्या आधार है? इसी प्रकार आगे यह भी कहा गया है कि गाॅंव के किसानों की बिजली दरों में जो लगभग 70 से 88 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की गयी है उसका भी आधार क्या है? आयोग ने अपने सवालों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पूर्व में ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से जो टैरिफ 180 प्रति किलोवाट प्रति माह तय की गयी है उस पर आयोग का एक आंकलन था, लेकिन अब पावर कारपोरेशन यह बातये कि एकाएक ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की दरें 650 रू0 प्रति किलोवाट प्रतिमाह व 800 रू0 प्रति किलोवाट प्रतिमाह को प्रस्तावित करने का क्या आधार है।
आयोग द्वारा पावर कारपोरेशन व बिजली कम्पनियों से ग्रामीण व शहरी बीपलएल विद्युत उपभोक्ताओं की 1 किलोवाट 150 यूनिट के मानक को 1 किलोवाट 100 यूनिट तक ही सीमित कर क्यों प्रस्तावित किया गया? क्या 50 यूनिट कम करने से बीपीएल विद्युत उपभोक्ता चोरी के लिये नही प्रेरित होंगे? इसकी क्या कार्ययोजना है? नियामक आयोग द्वारा पावर कारपोरेशन पर सवाल खडा करते हुये कहा गया कि उदय स्कीम, पावर फार आल 24ग7 व बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल ARR में बडे पैमाने पर भिन्नता है। ऐसा क्यों है? इन सभी योजनाओं के वित्तीय मानकों की एक्सल सीट भी आयोग में तलब की गयी है।
आयोग द्वारा पावर कारपोरेशन से यह भी सवाल किया गया है कि जब विगत दिनों पावर कारपोरेशन द्वारा अनेकों उत्पादन ग्रहों केी PPA (पावर परचेज एग्रीमेन्ट) को निरस्त किया गया उसमें लगभग सभी निरस्त PPA से बिजली खरीदना ARR में प्रस्तावित था। ऐसे में अब उसके एवज में किन श्रोतों से बिजली खरीदी जायेगी और अब संशोधित ARR क्या होगा?
आयोग द्वरा पावर कारपोरेशन से अब तक रेग्यूलेटरी सरचार्ज के मद में की गयी वसूली सहित पूर्व में लागू एफआरपी स्कीम पर भी पूरी रिपोर्ट तलब की गयी है।