- याचिका में आपत्तिकर्ता उपभोक्ता परिषद की लडाई रंग लायी
- हाई प्रोफाइल रिलायन्स रोजा पॉवर की याचिका पर नियामक आयोग का ऐतिहासिक फैसला
- आने वाले समय में रिलायन्स से खरीदी जाने वाली बिजली की दरों में 21 पैसे से 35 पैसे के बीच में आयेगी कमी जिसका लाभ प्रदेश की जनता को मिलना तय
- रिलायन्स रोजा द्वारा मांगे गये अतिरिक्त कैपिटल कास्ट रू0 517 करोड में से केवल आयोग ने 48 करोड किया अनुमोदित
- पहली बार नियामक आयोग ने PPA को नजरअंदाज कर रेग्यूलेशन के आधार पर सुनाया फैसला
लखनऊ 24 अगस्त: उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा लम्बे समय से रिजर्व हाई प्रोफाइल रिलायन्स की रोजा पावर के स्टेज 1 व स्टेज 2 का मल्टी ईयर टैरिफ (एमवाईटी) व वर्ष 2009-10 से वर्ष 2013-14 की टृ-अप याचिका व स्टेज 2 का फाइनल टैरिफ पर उप्र विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन श्री देश दीपक वर्मा व सदस्य श्री एस के अग्रवाल ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रिलायन्स पर कडी नकेल कसते हुए रिलायन्स की टैरिफ याचिका को पीपीए के बजाए रेग्यूलेशन के आधार पर निर्णय सुना दिया है। आयोग द्वारा 99 पन्नों में अपना फैसला सुनाया गया है। जिससे आने वाले समय में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में कमी होना तय है।
गौरतलब है कि इस याचिका में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद आपत्तिकर्ता के रूप में अनेकों सवाल खडा करते हुए याचिका पर रेग्यूलेशन के तहत फैसला सुनाने की मांग की गयी थी। नियामक आयोग द्वारा सुनाये गये फैसले में जहाॅं स्टेज 1 रोजा के टृ-अप मामले में रोजा पावर को लगभग 264 करोड रूपया पावर कारपोरेशन को वापस करना पडेगा वहीं स्टेज 2 फिक्सड चार्ज के मामले में लगभग 61.4 करोड वापस करना होगा। और एमवाईटी टैरिफ के मद में वर्ष 2016-17 तक जो ज्यादा फिक्सड चार्ज के आधार पर अधिक वसूली की गयी है उस मद में भी लगभग 306 करोड वापस करना होगा जिसमें बढोत्तरी भी हो सकती है। अर्थात रिलायन्स की रोजा पावर को पावर कारपोरेशन को कुल लगभग 631 करोड वापस करना होगा। सीधे तौर पर यह कहना गलत न होगा कि इसका लाभ प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को पावर कारपोरेशन को देना होगा।
रिलायन्स की एमवाईटी व टृ-अप याचिका में आपत्तिकर्ता उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ता परिषद ने इस याचिका में लम्बे समय से लम्बी लडाई लडी जिसके फलस्वरूप आने वाले समय में रिलायन्स से खरीदी जाने वाली बिजली की दरों में लगभग 21 से 35 पैसा प्रति यूनिट कमी आयेगी और जिसका लाभ भविष्य में उपभोक्ताओं को मिलेगा। रिलायन्स की रोजा पावर द्वारा मल्टी ईयर टैरिफ वर्ष 2014-15 से वर्ष 2018-19 के लिये जो कुल फिक्स चार्ज के मद में रू. 7153.21 करोड मांग की गयी थी आयोग द्वारा उसमें लगभग 709 करोड रू0 की कटौती करते हुए केवल रू0 6443.94 करोड ही अनुमोदित किया गया है। इसी प्रकार उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा रिलायन्स की रोजा द्वारा कैपिटल कास्ट के मद में अतिरिक्त रूप से मांगे गये 517 करोड रू0 में से केवल रू0 48 करोड ही माना गया। अर्थात लगभग 469 करोड को नही माना गया। नियामक आयोग द्वारा अपने फैसले में जिस प्रकार से पीपीए से हटकर रेग्यूलेशन के आधार पर याचिका में मानकों को देखा गया उससे आने वाले समय में रोजा के हीट रेट में भी एक प्रतिशत की कमी आयेगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि विगत दिनों पावर कारपोरेशन द्वारा वर्ष 2017-18 के लिये जो टैरिफ याचिका दाखिल की गयी है उसमें रिलायन्स पावर की फिक्स चार्ज रू. 1.76 प्रति यूनिट प्रस्तावित की गयी है लेकिन अब जब आयोग द्वारा फैसला सामने आ गया है तो उसमें वर्ष 2017-18 के लिये फिक्स चार्ज रू0 1.55 प्रति यूनिट तय की गयी है अर्थात लगभग 21 पैसे की कमी। आने वाले समय में इसका लाभ प्रदेश के उपभोक्ताओं को मिलना तय है।






