पॉवर फार आल व उदय की एक्सेल सीट मांगने पर UPPCL ने खडे किये हाथ?

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  • एआरआर, उदय व पावर फार आल में आंकडे अलग – अलग जिस पर नियामक आयेाग के सामने फंसा पेंच किन आंकडों को माने सही किनको करें खारिज
  • नियामक आयोग ने जब बिजली कम्पनियों से पावर फार आल व उदय स्कीम से संबंधित वित्तीय आंकडों की पडताल के लिये पावर कारपोरेशन से तलब की एक्सल सीट तो कारपोरेशन का जवाब एक्सल सीट नही है उपलब्ध ऐसे में इन योजनाओं के अनुबन्ध का क्या था वित्तीय मानक
  • पावर फार आल में 95131 मिलियन यूनिट बिजली बेचने की बात, उदय में 99833 मिलियन यूनिट बिजली बेचने की बात और एआरआर में 98694 मिलियन यूनिट बिजली बेचने की बात, सच्चाई क्या?
  • उपभोक्ता परिषद ने एक बार फिर नियामक आयेाग सदस्य से मिलकर उठायी मांग कहा बिजली कम्पनियों का एक तरफ आडिट नहीं वहीं मनगढंत आंकडों पर क्यों हो रही है बिजली दर बढवाने की तैयारी

लखनऊ 28 अगस्त। UPPCL व बिजली कम्पनियों की तरफ से नियामक आयोग में दाखिल मल्टी ईयर टैरिफ व विद्युत दर प्रस्ताव 2017-18 को लेकर आजकल बडी बहस छिडी हुयी है। जहाॅ पावर कारपोरेशन कभी पावर फार आल के आंकडो पर बात करता है तो कभी उदय के आंकडों तो कभी एआरआर के आंकडों। सबसे बडा चैंकाने वाला मामला यह सामने आ रहा है कि पावर फार आल, उदय व एआरआर सभी के आंकडे अलग अलग हैं और जब नियामक आयोग ने वित्तीय आंकडों की पडताल के लिये पावर फार आल व उदय की एक्सेल सीट मांगी तो पावर कारपोरेशन ने हाथ खडे कर दिये कहा हमारे पास नही है। तो सवाल यह उठता है कि जब पावर कारपोरेशन के पास नही है तो उसने इन दोनों योजनाओं में अनुबन्ध किस आधार पर कर लिया और उसका मानक क्या था? जहाॅं एक ओर बिना आडिटेड आंकडों के आधार पर बिजली दर कई वर्षों से बढवायी जा रही है वहीं अब आंकडों में अन्तर होने की वजह से एआरआर को स्वीकार करने में आयोग के सामने एक नया पेंच फंस गया है और मामला बेहद रोचक मोड पर आ गया है।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज इन सब पहलुओं और आंकडेबाजियों पर नियामक आयोग के सदस्य श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात कर सभी सत्य आंकडे मंगाने की मांग उठायी। गौरतलब है कि सब को 24 घण्टे बिजली देने के लिये बिजली कम्पनियेां द्वारा पावर फार आल का अनुबन्ध केन्द्र सरकार से किया गया । जिसमें वर्ष 2017-18 में 95131 मिलियन यूनिट बिजली प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को बेचने की बात कही गयी। वहीं एआरआर में इस वर्ष में 98694 मिलियन यूनिट बेचने की बात कही गयी और उदय स्कीम में 98833 मिलियन यूनिट बिजली बेचने की बात कही गयी। अब सवाल यह उठता है कि जिस योजना में आने वाले समय में 24 घण्टे बिजली देने की योजना है उसमें कम बिजली बेची जा रही है और जिस योजना में 18 से 20 घण्टे बिजली देने की बात हो रही है उसमें कहीं ज्यादा बिजली बेचने की बात हो रही है जो अपने आप में चिन्ता का विषय है। ऐसे में अब आयोग के सामने नई मुसीबत आ गयी है कि कौन सा आंकडा सही है और कौन सा आंकडा गलत। इसी प्रकार अन्य मद में भी आंकडे अलग अलग हैं। जो यह सिद्ध करते हैं कि कन्सल्टेन्टों द्वारा जो मनगढंत आंकडे कम्पनियों के सामने पेश कर दिये जाते हैं उसी पर बात शुरू हो जाती है।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा एआरआर व बिजली दर प्रस्ताव मे उदय व पावर फार आल की जब वित्तीय आंगडों को चेक करने के लिए एक्सेल सीट तलब की गयी तो पावर कारपोरेशन ने हाथ खडे कर दिये अब सबसे बडा सवाल यह उठ रहा है कि फिर इतना बडा अनुबन्ध तय करने के पहले क्या मानक अपनाया गया इसको लेकर जहाॅं आयेाग भी काफी धर्मसंकट में पड गया है वहीं पावर कारपोरेशन के अधिकारी दबी जुबान यह कहते फिर रहे हैं सब कुछ दिल्ली मंे बना वही जाने कि एक्सल सीट कहाॅं है?