- बिजली कम्पनियों के एआरआर व टैरिफ प्रस्ताव को आयोग द्वारा शर्तों के आधार पर किया गया स्वीकार, आयोग का कडा फरमान, कम्पनियों द्वारा प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि को आयेाग नही मानने को तैयार
- उपभोक्ता परिषद की लम्बी लडाई रंग लायी आयेाग का फरमान बिजली कम्पनियों द्वारा प्रस्तावित औसत वृद्धि 22.48 उदय में अनुमोदित वृद्धि 6.95 से बहुत ज्यादा जो उपभेाक्ताओं के लिये टैरिफ शाक की श्रेणी में आयेाग का मत उपभोक्ताओं के वहन योग्य होनी चाहिये प्रस्तावित दरें।
- आयेाग का बडा फैसला बिजली कम्पनियाॅं मंहगी बिजली खरीदना करें बन्द सस्ती बिजली खरीद प्रसताव के आधार पर पुनः 10 दिन के अन्दर बिजली खरीद का संशोधित प्रस्ताव दें।
- आयेाग का बडा फैसला सब्सिडी वास्तव में सरकार से कितनी चाहिये इसका भी दे ब्यौरा
- टैरिफ प्रस्ताव स्वीकार होने के अधिकतम 120 दिन में जारी होगी नयी टैरिफ
- ग्रामीणों व किसानों की व्यापक वृद्धि पर आयोग नाराज कहा बतायें इसका कारण
लखनऊ 4 सितम्बर। प्रदेश की पाॅंचों बिजली कम्पनियों द्वारा मल्टी ईयर टैरिफ(एमवाईटी) के तहत दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व बिजली दर प्रस्ताव वर्ष 2017-18 को आज उ0 प्र0 विद्युत नियामक आयोग ने कारपोरेशन पर दर्जनों तीखे सवाल खडे करते हुए को शर्र्ताे के साथ स्वीकार किया है। गौरतलब है कि 21 जून 2017 को सभी बिजली कम्पनियों द्वारा लगभग 70 हजार 460 करोड का एआरआर नियामक आयोग में दाखिल किया गया था और 8 अगस्त को वर्ष 2017-18 का टैरिफ बढोत्तरी का प्रस्ताव दिया गया था। नियामक आयोग द्वारा आज एआरआर को स्वीकार करने के पहले उ0 प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाये गये समस्त बिन्दुओं को शामिल करते हुए बिजली कम्पनियों पर कडा दण्डा चलाया गया है। आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल द्वारा जारी एतिहासिक आदेश में बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल बिजली दर बढोत्तरी प्रस्ताव को दरकिनार कर दिया गया है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मिलकर आज भी उठाये अनेकों मुददे कहा पावर कारपोरेशन से सभी सवालों का जवाब मंगाये जाने के बाद ही आगे टैरिफ प्रस्ताव पर करे कार्यवाही।लखनऊ ४ सितम्बर प्रदेश की पाॅंचों बिजली कम्पनियों द्वारा मल्टी ईयर टैरिफ(एमवाईटी) के तहत दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व बिजली दर प्रस्ताव वर्ष 2017-18 को आज उ0 प्र0 विद्युत नियामक आयोग ने कारपोरेशन पर दर्जनों तीखे सवाल खडे करते हुए को शर्र्ताे के साथ स्वीकार किया है। गौरतलब है कि 21 जून 2017 को सभी बिजली कम्पनियों द्वारा लगभग 70 हजार 460 करोड का एआरआर नियामक आयोग में दाखिल किया गया था और 8 अगस्त को वर्ष 2017-18 का टैरिफ बढोत्तरी का प्रस्ताव दिया गया था।

नियामक आयोग द्वारा आज एआरआर को स्वीकार करने के पहले उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाये गये समस्त बिन्दुओं को शामिल करते हुए बिजली कम्पनियों पर कडा दण्डा चलाया गया है। आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल द्वारा जारी एतिहासिक आदेश में बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल बिजली दर बढोत्तरी प्रस्ताव को दरकिनार कर दिया गया है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मिलकर आज भी उठाये अनेकों मुददे कहा पावर कारपोरेशन से सभी सवालों का जवाब मंगाये जाने के बाद ही आगे टैरिफ प्रस्ताव पर करे कार्यवाही। उ0 प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग द्वारा आज एआरआर को स्वीकार करते हुए यह शर्त लगायी गयी है कि बिजली कम्पनियों द्वारा पहले उदय में 6.95 प्रतिशत बढोत्तरी की बात कही गयी फिर टैरिफ प्रस्ताव में 22.48 प्रतिशत औसत वृद्धि क्यों प्रस्तावित की गयी। नियामक आयेाग ने अपने आदेश में कहा कि ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 141 प्रतिशत वृद्धि व किसानों की 70 प्रतिशत वृद्धि विद्युत उपभोक्ताओं के लिये बडा झटका है जो टैरिफ शाक की श्रेणी में आता है।
विद्युत उपभोक्ताओं की दरें वहन करने योग्य होनी चाहिये। आयेाग ने अपने आदेश मंे कहा है कि बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल बिजली दर वृद्धि प्रस्ताव को कम्पनियों के मनमुताबितक नही माना जायेगा। आयेाग सुनवाई के बाद इस पर करेगा फैसला। नियामक आयेाग ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि केवल 5500 करोड की सब्सिडी क्या उचित है? कृपया यह बतायें कि वास्तव में कितनी सब्सिडी की जरूरत है? आयोग द्वारा जारी अपने आदेश में यह भी कडा फैसला सुनाया गया है कि बिजली कम्पनियों द्वारा खरीदी जा रही मंहगी बिजली को नही माना जायेगा। बिजली कम्पनियाॅं 10 दिन के अन्दर बिजली खरीद को इस प्रकार संशोधित करके लायें जिसमे सस्ती बिजली से उपभोक्ताओं को लाभ मिले। आयोग ने अपने फैसले में अप्रैल 2017 से सितम्बर 2017 की पूरी बिजली खरीद का भी ब्यौरा तलब किया है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा आयेाग द्वारा जारी अपने आदेश में यह फैसला भी सुना दिया गया है कि उदय पावर फार आल व एआरआर में क्यों विसंगति सामने आ रही है? सभी मुददांे पर समस्त कागजात आयेाग को उपलब्ध कराये जायें। पहली बार ऐसा हुआ है कि जब उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाये गये समस्त बिन्दुओं को आयेाग ने जारी अपने एआरआर स्वीकृत के आदेश में बिन्दुवार शामिल किया है। आयेाग द्वारा जारी आदेश के तहत 3 दिन के अन्दर बिजली कम्पनियों द्वारा प्रस्तावित एआरआर को समाचार पत्रों में प्रकाशित कराना होगा। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा आज एआरआर को स्वीकृत करने के बाद विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत अधिकतम 120 के अन्दर बिजली कम्पनियों में आम सुनवाई करने के उपरान्त टैरिफ आदेश जारी करना होगा।







