बिजली दर संबंधी सार्वजनिक सूचना में अतिरिक्त रेग्यूलेटरी सरचार्ज लगाने से मचा बवाल

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  • बिजली दर संबंधी सार्वजनिक सूचना में अतिरिक्त रेग्यूलेटरी सरचार्ज लगाने की सूचना से मचा बवाल
    उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग अध्यक्ष से मिलकर दाखिल किया जनहित प्रत्यावेदन
  • नियामक आयेाग का बडा फैसला, निदेशक वाणिज्य पावर कारपोरेशन से मांगा स्पष्टीकरण और उक्त
  • सार्वजनिक सूचना के अंश को आयोग आदेश के माना विपरीत कहा अविलम्ब जारी करे कारपोरेशन शुद्धि पत्र
  • उपभोक्ता परिषद का बडा आरोप पावर कारपोरेशन को कैसे पता चल गया कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओ पर आगे लगेगा एक और अतिरिक्त रेग्यूलेटरी सरचार्ज

लखनऊ 9 सितम्बर। उप्र पावर कारपोरेशन द्वारा बिजली कम्पनियों के लिये मल्टी ईयर टैरिफ व वर्ष 2017-18 हेतु प्रस्तावित बिजली दर बढोत्तरी प्रस्ताव पर आज विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित टैरिफ सम्बंधी सार्वजनिक सूचना पर उस समय बवाल मच गया जब उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मिलकर उन्हें एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपते हुये यह मुददा उठाया कि पावर कारपोरेशन द्वारा बिना आयोग के आदेश के सार्वजनिक सूचना में एक नोट अंकित कर उसमें ’’राजस्व अंतर की प्राप्ति हेतु रेग्यूलेटरी सरचार्ज मा. आयोग के अनुमोदनानुसार अतिरिक्त लगाया जायेगा’’ प्रकाशित करा दिया गया है। जो आयोग की अवमानना की श्रेणी में आता है। पावर कारपोरेशन के पास कौन सा त्रिनेत्र है जिससे उसको पता चल गया कि आने वाले समय में प्रदेश के उपभोक्ताओं पर एक अतिरिक्त रेग्यूलेटरी सरचार्ज और लगेगा। इस प्रकार का असंवैधानिक कार्यवाही करके पावर कारपोरेशन आयोग के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहा है।

आयेाग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अविलम्ब प्रकरण पर परीक्षण कर अपना फैसला सुना दिया। आयोग के सचिव श्री संजय श्रीवास्तव ने अविलम्ब पावर कारपोरेशन के निदेशक वाणिज्य, श्री संजय कुमार सिंह का स्पष्टीकरण मांगते हुए उन्हें यह निर्देश दिया कि उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा 4 सितम्बर 2017 को जब एआरआर का एडमिटेस आर्डर जारी किया गया था उसमें रेग्यूलेटरी सरचार्ज संबंधी कोई भी इस प्रकार का आदेश आयोग द्वारा नही जारी किया गया था। इसके बावजूद भी पावर कारपोरेशन द्वारा इस प्रकार की सूचना समाचार पत्रों में क्यों प्रकाशित करायी गयी? आयोग ने अपने आदेश में पावर कारपोरेशन पर कडी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे आयोग आदेश के विपरीत माना और अविलम्ब समाचार पत्रों मंे शुद्धिपत्र जारी करने का आदेश दिया।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बडी चालाकी से पावर कारपोरेशन ने सार्वजनिक सूचना में उपभोक्ताओं पर भविष्य में एक और रेग्यूलेटरी सरचार्ज लगाया जायेगा की बात प्रकाशित करायी गयी। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि पावर कारपोरेशन मनमाने तरीके से आयोग के अधिकार की परिधि में अपना हस्तक्षेप कर रहा है। जो पूरी तरह टैरिफ फिक्सिंग की श्रेणी में आता है और यह सिद्ध करता है कि पावर कारपोरेशन ग्रामीण व किसानों सहित अन्य उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक वृद्धि प्रस्ताव देकर संतुष्ट नही हुआ है। चोर दरवाजे से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डलवाने के लिये प्रयासरत हैं। जो पूरी तरह उपभेाक्ता विरोधी कार्यवाही में आता है।