मनमाने तरीके बिजली दर प्रस्ताव बनाने वाले उच्चाधिकारियों के खिलाफ सरकार उठाये सख्त कदम: उपभोक्ता परिषद

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file photo
  • बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल विद्युत दर प्रस्ताव पर उपभोक्ता परिषद का बडा खुलासा
  • बिजली कम्पनियों इस बार ओएनडम के मद में मांगा लगभग 4400 करोड ज्यादा ऐसा क्यों?
  • घाटे में चल रही सरकारी बिजली कम्पनियों ने रिटर्न आफ इक्यूटी के माध्यम से इस बार योगी सरकार में मांगा रू0 1628 करोड का फायदा और उसका खामियाजा भुगतेगी प्रदेश की जनता
  • आज तक किसी सरकार में बिजली कम्पनियों ने नही मांगा फायदा तो इस सरकार में क्यों?

लखनऊ 11 सितम्बर। प्रदेश के ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में अधिकतम 350 प्रतिशत वृद्धि प्रस्तावित करके पावर कारपोरेशन ने पूरे प्रदेश में हंगामा कर दिया कि बिजली कम्पनियाॅं बहुत बडे घाटे में चल रही हैं। पावर कारपोरेशन द्वारा वर्ष 2017-18 के लिये लगभग 14000 करोड रू. का गैप दिखाया गया। पूर्व में यह गैप 4 से 5 हजार करोड के बीच में रहता था। उपभोक्ता परिषद ने जब टैरिफ प्रस्ताव में लम्बी छानबीन की तब बेहद चैंकाने वाला मामला सामने आया कि इतना बडा गैप इस बार कैसे कम्पनियों ने प्रस्तावित किया। बिजली कम्पनियाॅं जो पिछले वर्षों में ओएनडम खर्च प्रस्तावित करती थीं इस वर्ष उससे 2 गुना अधिक खर्च प्रस्तावित किया है। वर्ष 2016-17 में नियामक आयोग द्वारा ओएनडम खर्च जहाॅं 3222 करोड अनुमादित किया गया था वहीं इस वर्ष 2017-18 के लिये बिजली कम्पनियों द्वारा कुल ओएनडम 7622 करोड प्रस्तावित किया गया है। अर्थात लगभग 4400 करोड ज्यादा। इसी प्रकार अरबों के घाटे में चल रही बिजली कम्पनियाॅं इस बार रिटर्न आफ इक्यूटी (आरओई) 16 प्रतिशत प्रस्तावित किया है यानि कि लगभग 1628 करोड फायदा माॅंगा है। प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं जो अपने आप को सरकारी कम्पनी कहलाती हैं आज तक के इतिहास में कभी भी रिटर्न आफ इक्यूटी नही मांगा लेकिन इस बार मा0 योगी सरकार में क्या हो गया कि सरकारी बिजली कम्पनियाॅं लगभग 1628 करोड फायदा मांगकर प्रदेश के उपभोक्ताओं पर बोझ डाल रही हैं। इस मनमानी कार्यवाही पर उपभोक्ता परिषद ने मा. मुख्यमंत्री जी से कठोर कार्यवाही की मांग उठायी है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कारपोरेशन द्वारा दाखिल कुल एआरआर लगभग 70460 करोड का है। अब प्रदेश की आम जनता अंदाजा लगा सकती है कि एआरआर में इतना बडा गैप कैसे हो गया? उपभोक्ता परिषद प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री जी से पूछना चाहता है कि इस बार आपकी सरकार में बिजली कम्पनियों के उच्चाधिकारी क्यों मनमाने तरीके से कार्यवाही कर रहे हैं और उपभोक्ताओं पर भार डालने के लिये हर तरकीब अपना रहे है। प्रदेश की बिजली कम्पनियों ने आज तक कभी भी प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत वितरण संहिता के प्राविधानों के तहत किसी भी व्यवधान व उपभोक्ता सेवा में विफल होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा नही दिया गया है। और आज वर्तमान सरकार मंे फायदा मांग रही है। विगत दिनों केन्द्र सरकार की रेटिंग में सी ग्रेड की श्रेणी में चिन्हित हुयी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज तक विद्युत उपभोक्ताओं की सेवा बिजली कम्पनियों ने किस प्रकार की होगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि केवल ओएनडम और रिटर्न आफ इक्यूटी के मद मंे 6000 करोड रू0 एआरआर में अतिरिक्त मांगा है अगर इसे हटा दिया जाये तो स्वतः ग्राीमण व किसानों की विद्युत दरों में शून्य विद्युत बढोत्तरी होगी।

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