बिजली चोरी की तो देना होगा 2 गुना जुर्माना

0
2313
  • बिजली चोरी के मामले में नियामक आयोग हुआ सख्त, बनाया गया नया कानून
  • बिजली चोरी के मामलों में शमन शुल्क जमा करने के बाद भी उपभोक्ता को देना होगा 2 गुना पेनाल्टी, अभी तक 1 गुना पेनाल्टी का था आदेश
  • महिनों से ट्रांसफार्मर व लाइन फाल्ट होने के बावजूद कम्पनियों द्वारा तय मानक के तहत ट्रांसफार्मर न बदलने वाले मामले पर उपभोक्ता को अब सीधे नियामक आयोग में फिक्स चार्ज/मिनिमम चार्ज को समाप्त करने पर वाद दायर करने का होगा अधिकार
  • उपभोक्ता परिषद ने रखा था प्रस्ताव जब विद्युत आपूर्ति नही तो फिक्स व मिनिममन चार्ज क्यांे?
  • कनेक्शन देने मीटर बदलने अन्य किसी बे्रक डाउन इत्यादि के मामले पर अब उपभोक्ता को मुआवजा न दिये जाने पर उपभोक्ता को सीधे नियामक आयेाग में लाइसेंसी के खिलाफ 142 का वाद दायर करने का होगा अधिकार निर्णय के बाद देना होगा मुआवजा
लखनऊ 18 सितम्बर। विद्युत वितरण संहिता 2005 रिव्यू पैनल सब कमेटी की आज एक बैठक नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल की अध्यक्षता में नियामक आयोग सभागार में सम्पन्न हुयी। जिसमें कमेटी के सदस्य सर्वश्री ए पी सिंह, प्रबन्ध निदेशक मध्याॅंचल, अवधेश कुमार वर्मा, उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद, श्री राजीव गोयल, एनपीसीएल पैनल के संयोजक श्री विकास चन्द्र अग्रवाल, नियामक आयोग सचिव श्री संजय श्रीवास्तव, पावर कारपोरेशन के निदेशक वाणिज्य, श्री संजय सिंह सहित कम्पनियों के अनेकों निदेशक वाणिज्य उपस्थित थे।
कमेटी की बैठक में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा दाखिल याचिका बिजली चोरी के मामले में सम्मन शुल्क जमा होने के बाद भी 2 गुना पेलाल्टी लगाये जाने के मामले में पैनल के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह कानून पास कर दिया कि अब बिजली चोरों के साथ कोई समझौता नही होगा। सम्मन शुल्क जमा करने के बाद भी बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ता से 2 गुना राजस्व वसूला जायेगा। गौरतलब है कि अभी तक सम्मन शुल्क जमा करने वाले उपभोक्ता से केवल 1 गुना राजस्व पेनाल्टी के रूप में वसूला जाता था। बिजली चोरी के मुददे पर आज पहली बार सब कमेटी की बैठक में दिखा कि उपभोक्ता प्रतिनिधि व लाइसेंसी सभी एक मत बिजली चोरी पर कठोर कानुन के पक्ष में थें।
सब कमेटी की बैठक में पैनल के सदस्य उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा द्वारा 2 प्रस्ताव रखे गये जिसको कमेटी के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पास किया। उपभोक्ता परिषद द्वारा पहला प्रस्ताव यह रखा गया कि यदि किसी क्षेत्र में विद्युत उपभोक्ता को आपूर्ति करने वाला ट्रांसफार्मर व लाईन संहिता में दिये गये प्राविधानों की तय समय सीमा के अनुरूप नही बदला जाता और विद्युत उपभोक्ता को महिनों सप्लाई नही मिलती ऐसे मामलों में उपभोक्ता से फिक्सड चार्ज व मिनिमम गारण्टी चार्ज न वसूला जाये के सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद का एक आदेश भी कोड किया। जिसपर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि केस टू केस बेसिस के तहत उपभोक्ता सीधे नियामक आयेाग में 142 के तहत वाद दाखिल कर फिक्स चार्ज व मिनिमम चार्ज को खत्म करने की मांग सकता है। आयेाग द्वारा जो निर्णय लिया जायेगा उसके आधार पर उपभोक्ता को लाइसेंसी द्वारा छूट दी जायेगी।
उपभोक्ता परिषद ने दूसरा प्रस्ताव यह रखा कि विद्युत वितरण संहिता में दिये गये प्राविधानों के तहत तय मानक पर कोई भी व्यवधान बिजली कम्पनी द्वारा न दूर किये जाने चाहे वह कनेक्शन का मामला हो, मीटर बदलने का मामला हो, बिलिंग का मामला हो, तार फ्यूज का मामला हो, केबिल फाल्ट का मामला हो इत्यादि सभी उपभोक्ता मानकों पर यदि बिजली कम्पनियाॅं उपभोक्ताओं को मुआवजा नही देती तो विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 57 के तहत उपभोक्ता सीधे नियामक आयोग में बिजली कम्पनियेां के अधिकारियों के खिलाफ विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत वाद दायर कर सकते हैं। जिस पर कमेटी के सदस्यों ने अपनी
सहमति व्यक्त की। कमेटी की बैठक में लाइसेंसी सहित सभी सदस्यों ने उपभोक्ता परिषद के प्रस्ताव का समर्थन किया।