Post Views: 553
- उपभोक्ता परिषद का कम्पनियों पर बडा आरोप कहा कम्पनियेां का सिस्टम इस काबिल नही जिससे प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को अनवरत मिल सके 18 से 24 घण्टे बिजली।
- उपभोक्ता परिषद ने आयोग में दाखिल आपत्तियों के आधार पर व्यापक बिजली दर बढोत्तरी को बताया अनुचित आयोग से ग्रामीण घरेलू, शहरी व कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं को राहत देने की उठायी मांग
- उपभोक्ता परिषद ने बिजली चोरी, लाइन लास, सिस्टम मिसमैच, घटिया मीटर खरीद सहित उठाये अनेकों मुददे और आयोग से लगायी बिजली दर न बढाने की गुहार
- सरकारी विभागोें पर लगभग 9000 करोड बकाया व 400 करोड के मीटर खरीद पर भी उठाया सवाल
लखनऊ 21 सितम्बर। उप्र पावर कार्पोरेशन द्वारा बिजली कम्पनियों के लिए मल्टी ईयर टैरिफ व वर्ष 2017-18 हेतु प्रस्तावित व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव पर आज उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मिलकर अपनी आपत्तियाॅं 5 प्रतियों में आयोग को सौंप दी। जिस पर आयोग अध्यक्ष द्वारा अविलम्ब पावर कारपोरेशन से बिन्दुवार जवाब मंगाने का निर्देश दे दिया है। उपभोक्ता परिषद ने सर्वप्रथम प्रदेश के उपभोक्ताओं को 18 घण्टे से 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति देने के नाम पर उनकी दरों में बढोत्तरी पर ऐतराज जताते हुए कहा कि वर्तमान में पूरे प्रदेशक के विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 1 करोड 80 लाख है, उनके द्वारा लिया गया कुल संयोजित भार 4 करोड 65 लाख किलोवाट है। वहीं प्रदेश के 33 केवी स्तर पर ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता केवल 44677 एम वी है। अर्थात 3 करोड 79 लाख किलोवाट है अर्थात सिस्टम में 1 करोड किलोवाट की कमी है। ऊपर से इसी सिस्टम पर 25 प्रतिशत बिजली चोरी कर लो। ऐसे में डाइवरसी फैक्टर 1 अनुपात 1 पर गौर करें तो प्रदेश का सिस्टम उपभोक्ताओं को सुचारू रूप 18 से 24 घण्टे बिजली देने के समतुल्य ही नही है। पूरा सिस्टम मिसमैच है पहले कारपोरेशन अपने सिस्टम को सही करे फिर अधिक आपूर्ति के नाम पर बिजली दर बढाने की बात करे। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा शहरी, गा्रमीण उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 15 प्रतिशत ग्रामीण की दरों में लगभग 350 प्रतिशत व किसानों की दरों में लगभग 80 प्रतिशत बढोत्तरी को अनचित करार देते हुए अनेकों तथ्य पेश किये गये।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा अपनी आपत्तियों में यह ऐतराज जताया गया है कि बिजली कम्पनियों द्वारा पहले औसत विद्युत आपूर्ति कास्ट रू. 7.22 प्रति यूनिट प्रस्तावित किया गया और उसके आधार पर टैरिफ बढोत्तरी का प्रस्ताव दिया गया। पुनः उसमें संशोधन कर उसे रू0 6.97 प्रति यूनिट कर दिया गया। ऐसे में टैरिफ नियमावली के तहत प्लस माइनस 20 प्रतिशत औसत विद्युत आपूर्ति कास्ट के आधार पर टैरिफ बढोत्तरी प्रस्ताव को क्यों नही संशोघित किया गया जो कानूनन गलत है। उपभोक्ता परिषद ने इस बात पर भी आपत्ति जतायी कि पहले बिजली कम्पनियोे ने इस वित्तीय वर्ष में 1 करोड 23 लाख अतिरिक्त उपभोक्ता बढाने के नाम पर उनकी आधारभूत संरचान को लागू करने के नाम पर करोडों रू. एआरआर में दिखाया गया अब जब उसे कम करके 50 लाख कर दिया गया तो उसका खर्च सही तरीके से एआरआर से क्यों नही घटाया गया? उपभोक्ता परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली कम्पनियों द्वारा बिना आडिटेड आॅंकडों के टैरिफ प्रस्ताव दिया जाता है दुर्भाग्य की बात है कि बेन्च मार्किंग, एआरआर, उदय, पावर फार आल सभी के आॅंकडे अलग अलग होने के बावजूद भी आयोग उसपर सुनवाई कर रहा है। अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के यहाॅं मीटर लगाने के नाम पर कम्पनियों द्वारा 400 करोड रू. के मीटर के आर्डर पर सवाल उठाते हुए कहा कि अनेकों घटिया कम्पनियों केा आदेश निर्गत किये गये हैं जिसका खामियाजा जनता भुगतेगी। उपभोक्ता परिषद ने कारपोरेशन पर सवाल खडा करते हुए ओएनडम खर्च में 3000 करोड का बताया अधिक।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने उदय स्कीम के तहत देश के दर्जनों राज्यों का तुलनात्क विणरण बिजली दर बढोत्तरी पर पेश करते हुए उत्तर प्रदेश की औसत बिजली दर बढोत्तरी 22.66 प्रतिशत व खस तौर पर ग्रामीण उपभोक्ताओं की बिजली दरों में अधिकतम 350 प्रतिशत वृद्धि का विरोध किया। उपभोक्ता परिषद ने बिजली कम्पनियों के कुल 73 हजार करोड के घाटे के लिये बिजली कम्पनियों की अक्षमता व बिजली चोरी की मूल वजह बताते हुए पावर कारपोरेशन पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि पीएफसी द्वारा बिजली कम्पनियों को सी ग्रेड में घोषित करने के बाद भी बिजली कम्पनियाॅं लगभग 1628 करोड का फायदा मांग रही हैं जो पूरी तरह गलत है। उपभोक्ता परिषद ने सब्सिडी का मुददा उठाते हुए कहा कुल 5500 करोड सब्सिडी में 1500 करोड सब्सिडी जो इलेक्ट्रिसिटी डयूटी की परिवर्तित हुयी है वह किस श्रेणी के उपभोक्ता पर खर्च होगी बिजली कम्पनियों ने इसका ब्यौरा क्यों नही दिया? उपभोक्ता परिषद ने अपनी आपत्ति में ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में कोई बढोत्तरी न करने पर अपना एक तुलनात्मक विगत वर्षों में सरकार में रहीं अनेकों राजनैतिक पार्टियों के कार्यकाल का ग्रामीण आपूर्ति व दरों को भी आयोग के सामने पेश करते हुए वर्तमान सरकार में बढोत्तरी का व्यापक विरोध किया। उपभोक्त परिषद ने जनहित में काफी आपत्तियाॅं और भी सौंपी हैं।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा बिजली कम्पनियों के बकाये पर भी जोर देते हुए कहा गया कि प्रदेश की बिजली कम्पनियों का सरकारी विभागों पर लगभग 9 हजार करोड बकाया है यदि उसकी वसूली कर ली जाये तो काफी हद तक दरों में बढोत्तरी से बचा जा सकता है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा देश के लगभग आधा दर्जन राज्यों के सरकारी बकाये का एक तुलनात्मक चार्ट भी पेश किया गया।